नए जमाने की खेती से लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं ये महिला, जानें क्या है ये बिज़नेस?

अगर आप भी मोती की खेती करना चाहते हैं तो जान लीजिए इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें...

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2019, 10:44 AM IST
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उत्तराखंड के देहरादून में रहने वाली आशिया अपने घर पर रहकर ही मोती की खेती कर रही है. इस खेती से वह 4 लाख रुपए से ज्यादा सालाना की कमाई कर रही हैं. आपको बता दें कि इस तरह की खेती के लिए सरकार लोन भी देती है. साथ ही, कई सरकारी संस्थाएं इसकी ट्रेनिंग भी कराती है.आम फसलों की खेती की तरह  ही मोती को भी प्राकृतिक रूप से तैयारी किया जाता है. मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है. इसके लिए आपको 500 वर्गफीट का तालाब बनाना होगा. तालाब में आप 100 सीप पालकर मोती उत्‍पादन शुरू कर सकते हैं. प्रत्‍येक सीप की बाजार में कीमत 15 से 25 रुपए होती है. इसके लिए स्‍ट्रक्‍चर सेट-अप पर खर्च होंगे 10 से 12 हजार रुपए, वाटर ट्रीटमेंट पर 1000 रुपए और 1000 रुपए के आपको इंस्‍ट्रयूमेंट्स खरीदने होंगे.

आइए जानें मोती की खेती के बारे में...

(1) कितनी होगी कमाई- खेती शुरू करने के 20 महीने बाद एक सीप से एक मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है. बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है. (ये भी पढ़ें-तेजी से बढ़ रही है इस बिजनेस की डिमांड, हर महीने लाखों कमाने का मौका!)




इस तरह अगर एक मोती की औसत कीमत आप 800 रुपए भी मानते हैं तो इस अवधि में 80,000 रुपए तक कमा सकते हैं. सीप की संख्‍या आप बढ़ाकर अपने संसाधनों के आधार पर कर सकते हैं मसलन अगर 2000 सीप पालते हैं तो इस पर खर्च करीब 2 लाख रुपए आएगा. इस हिसाब से आप 15 से 20 महीने की फसल पर हर महीने आप 1 लाख रुपए तक कमा सकते हैं. बशर्ते आपके मोती बेहतर क्‍वालिटी के हों.

(2) बीज कहां से मिलेगा- सबसे पहले आपको इस खेती के लिए कुशल वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण की आवश्‍यकता होती है जो भारत सरकार के द्वारा कराया जाता है. प्रशिक्षण के बाद आपको सरकारी संस्‍थानों या मछुआरों से सीप खरीदने होंगे. सीपों को खुले पानी में दो दिन के लिए छोड़ा जाता हे. इससे उनके उपर का कवच और मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं.



सीपों को ज्‍यादा देर तक पानी से बाहर नहीं रखना चाहिए. मांशपेशियां ढीली होने के बाद सीपों की सर्जरी कर उनकी सतह पर 2 से 3 एमएम का छेद करके उसमें रेत का एक छोटा कण डाला जाता है. यह रेत का कण जब सीप को चुभता है तो वह उस पर अपने अंदर से निकलने वाला पदार्थ छोड़ना शुरू कर देता है.

सीपों को नायलॉन के बैग में रखकर (एक बैग में 2 से 3) तालाब में बांस या पीवीसी के पाईप के सहारे छोड़ दिया जाता है. 15 से 20 महीने बाद सीप में मोती तैयार हो जाता है आप उसका कवच तोड़कर मोती निकाल सकते हैं. (ये भी पढ़ें-सिर्फ 5 हजार में ले सकते हैं पोस्ट ऑफिस की फ्रेंचाइजी, पहले दिन से शुरू होगी कमाई)

(4) सरकार देती है ट्रेनिंग- इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च के तहत एक नए विंग सीफा यानि सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर इसके लिए निशुल्‍क ट्रेनिंग कराती है.

इसका मुख्‍यालय भुवनेश्‍वर में है और यह 15 दिनों की ट्रेनिंग देता है, जिसमें सर्जरी समेत सभी कुछ सिखाया जाता है. मोती की खेती पहले समुद्र तटीय क्षेत्रों में की जाती थी लेकिन सीफा के प्रयोगों के बाद अन्‍य राज्‍य भी इसके लिए मुफीद हैं.

(5) कहां से मिलेगा लोन- मोती की खेती का यदि आपके पास प्रशिक्षण है तो इसे बड़े स्‍तर पर शुरू करने के लिए आप लोन भी ले सकते हैं. इसके लिए नाबार्ड और अन्‍य कमर्शियल बैंक आपको 15 सालों के लिए सिंपल इंटरेस्‍ट पर लोन उपलब्‍ध कराते हैं.

केंद्र सरकार की ओर से इस पर सब्सिडी की योजनाएं भी समय-समय पर चलाई जाती हैं. यदि आप इसमें कामयाब हो जाते हैं तो अपने बिजनेस को बढ़ाकर कंपनी भी बना सकते हैं और कमाई करोड़ों में कर सकते हैं.

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