आनंद महिंद्रा ने की बिहार के 'कैनाल मैन' की तारीफ, ताजमहल और मिस्र के पिरामिड से की उनकी बनाई नहर की तुलना

आनंद महिंद्रा ने की बिहार के 'कैनाल मैन' की तारीफ, ताजमहल और मिस्र के पिरामिड से की उनकी बनाई नहर की तुलना
आनंद महिंद्रा ने बिहार के गया में अकेलेदम 3 किमी लंबी नहर बनाने वाले व्‍यक्ति की जमकर तारीफ की.

अरबपति कारोबारी आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने ट्वीट कर बिहार में गया (Gaya) के 'कैनाल मैन' (Canal Man) लौंगी भुइयां की तारीफ की है. भुइयां ने अकेले ही 3 किमी लंबी नहर तैयार कर डाली, जिसकी मदद से नजदीकी पहाड़ी से आने वाला बरसाती पानी (Rainwater) गांव के खेतों की सिंचाई में इस्‍तेमाल किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 14, 2020, 10:28 PM IST
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नई दिल्‍ली. सोशल मीडिया पर हमेशा सक्रिय रहने वाले अरबपति कारोबारी आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) अकसर कुछ हटकर करने वाले आम लोगों की जमकर तारीफ करते हैं. इस बार उन्‍होंने बिहार (Bihar) में गया के एक किसान के काम की तारीफ करते हुए ट्वीट किया है. दरअसल, गया (Gaya) के एक किसान ने नजदीकी पहाड़ी से आने वाले बरसाती पानी (Rainwater) को अपने गांव के खेतों तक पहुंचाने के लिए अकेले ही 3 किमी लंबी नहर बना डाली. गया के लहथुआ (Lahthua) इलाके के कोठिलवा (Kothilwa) गांव के किसान लौंगी भुइयां को ये नहर बनाने में 30 साल लगे. अब इससे पूरे गांव को फायदा मिल रहा है.

महिंद्रा ने कहा, सात अजूबों से कम नहीं भुइयां की बनाई नहर
आनंद महिंद्रा ने भुइयां की तुलना 22 साल तक अकेले पहाड़ काटकर रास्‍ता बनाने वाले दशरथ मांझी (Dashrath Manjhi) से की. महिंद्रा ने कहा कि भुइयां की इस नहर किसी भी मायने में ताजमहल और मिस्र के पिरामिड समेत दुनिया के सात अजूबों से कम नहीं है. उन्‍होंने ट्वीट किया, 'दुनियाभर में सैकड़ों स्‍मारकों को हजारों लोगों की कड़ी मेहनत और तपस्‍या के साथ बनाया गया है, लेकिन उनमें से ज्‍यादातर राजाओं की सोच का नतीजा थे, जिन्‍हें बनाने के लिए उन्‍होंने श्रमिकों का इस्‍तेमाल किया. मेरे लिए ये नहर किसी भी पिरामिड या ताजमहल से कम शानदार नहीं है.'
नहर बनाने के लिए भुइयां ने 30 साल तक हर दिन की खुदाईनहर को अकेलेदम बनाने वाले कोठिलवा गांव के लौंगी भुइयां ने बताया कि मुझे इसे बनाने में 30 साल का लंबा वक्‍त लगा. अब इस नहर की मदद से नजदीकी पहाड़ी से आने वाला बरसाती पानी गांव में बने एक तालाब में इकट्ठा होता है. फिर इसका इस्‍तेमाल गांव के खेतों की सिंचाई (Irrigation) में किया जाता है. मैं पिछले 30 साल से अपने मवेशियों को चराने के लिए जंगल में ले जाता था. इसके बाद उन्‍हें चरने के लिए छोड़कर हर दिन नहर खोदता रहता था.

'नहर बनाने में गांव के किसी व्‍यक्ति ने नहीं दिया मेरा साथ'


भुइयां ने बताया कि नहर की खुदाई के काम में गांव के किसी व्‍यक्ति ने मेरा साथ नहीं दिया. हमारे गांव के लोग मेहनत मजूदरी करके अपने परिवार को पालने के लिए बड़े शहरों को चले जाते हैं, लेकिन मैंने तय किया कि मैं यहीं रुकूंगा और इस नहर को पूरा करके ही रहूंगा. बता दें कि कोठिलवा गांव चारों तरफ से घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा है. ये गया से 80 किमी दूर है. इस गांव को माओवादियों के लिए पनाहगाह (Refuge for Maoists) के तौर पर चिह्नित किया गया है.
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