अब Infosys भी शेयर बायबैक करने की तैयारी में, जानिए आखिर ऐसा क्याें करती है कंपनियां

इंफाेसिस ओपन मार्केट रूप से अधिकतम करीब 5.3 करोड इक्विटी शेयरों का बायैबक करेगी

इंफाेसिस ओपन मार्केट रूप से अधिकतम करीब 5.3 करोड इक्विटी शेयरों का बायैबक करेगी

इंफोसिस ओपन मार्केट रूप से अधिकतम करीब 5.3 करोड इक्विटी शेयरों का बायबैक करेगी जो उसके पेड-अप कैपिटल के 1.23 फीसदी हैं. इसका मतलब ये है कि कंपनी के वर्तमान शेयर धारक इस ऑफर में सीधे अपने शेयर टेंडर नहीं कर पाएंगे.

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नई दिल्ली. इंफोसिस (Infosys) ने कहा है कि वह 1,750 रुपए प्रति शेयर भाव पर अपने 9,200 करोड़ रुपए के शेयर बायबैक ( buybackकरेगी. इस बायबैक की ऑफर प्राइस शेयरों की वर्तमान प्राइस से करीब 30 फीसदी ज्यादा है. इंफाेसिस पहली कंपनी नहीं है जिससे अपने शेयर बायबैक करने की घाेषणा की है. वर्तमान में 10 से ज्यादा बॉयबैक ऑफर चालू हैं. इसमें HPCL, Jagran Prakashan, NIIT, Rane Braking, Aarti Drugs और Gujarat Apollo Industries के बॉयबैक शामिल हैं. क्याेंकि बॉयबैक को कोई बेहतर अधिग्रहण का मौका होने और दूसरे विकल्प होने पर कंपनियों के लिए सरप्लस फंड को उपयोग में लाने का सबसे बेहतर तरीका समझा जाता है. यही वजह है कि इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि 2020-21 में 35,000 करोड़ रुपये के कुल 61 बॉयबैक ऑफर आए. सिर्फ साल 2021 के शुरुआती 3 महीनों में हमको 2,000 करोड़ रुपये के 16 बॉयबैक ऑफर देखने को मिले.



इंफोसिस भी ओपन मार्केट रूप से अधिकतम करीब 5.3 करोड इक्विटी शेयरों का बायैबक करेगी जो उसके पेड-अप कैपिटल के 1.23 फीसदी हैं. कंपनी की बॉयबैक कमेटी उस तरीके और फ्रिक्वेंसी का निर्धारण करेगी जिसके आधार पर बाजार से शेयरों का बॉयबैक किया जाएगा.



बायबैक है क्या?



सरल शब्दों में बायबैक का मतलब होता है कि कंपनी बाजार से अपने ही शेयर खरीदने जा रही है. ये प्रक्रिया दो तरीके से सम्पन्न की जाती है. इसके पहले तरीके को ओपन मार्केट रूट (खुले बाजार में खरीदारी) कहा जाता है जिसके तहत जिसके तहत कंपनी अपने ही शेयरों को सेकेंडरी मार्केट से खरीदती है. जबकि दूसरे तरीके को टेंडर ऑफर रूट कहा जाता है जिसमें शेयरधार कंपनी की तरफ से रखे गए  ऑफर  के तहत अपने शेयर टेंडर कर सकते हैं. बायबैक को सामान्यतौर पर शेयरधारकों को फायदा पहुचानें या कंपनी की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के एक तरीके के तौर पर देखा जाता है. क्योंकि इससे कंपनी फाइनेंशियल रेश्यो (वित्तीय अनुपातों) में सुधार आता है और कंपनी का वैल्यूएशन बेहतर होता है. ये कंपनी में उसके प्रोमोटरों के विश्वास को भी बताता है. क्योंकि बायबैक के बाद कंपनी में प्रोमोटरों की हिस्सेदारी बढ़ती है. प्रोमोटर अपनी हिस्सेदारी तभी बढ़ाना चाहेंगे जब कंपनी का आगे का आउटलुक मजबूत हो. बता दें कि बायबैक में खरीदे गए या टेंडर किए गए शेयर रद्द (extinguishe) कर दिए जाते हैं और आउट स्टैडिंग शेयरों की कुल संख्या कम हो जाती है. 


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Buyback offer के निवेशकों के लिए क्या हैं मायने ?



शेयर बाजार सामान्यतौर पर बायबैक ऑफर को सकारात्मक तौर पर लेता है. बाजार ये मानकर चलता है कि जिन प्रमोटरों को इस बात का भरोसा होता है कि उनकी कंपनी मजबूत है और आगे भी उसके कारोबार में ग्रोथ जारी रहेगी वही बायबैक लाने का विकल्प अपनाते हैं. इस बात के साक्ष्य भी हैं कि buyback ऑफर के बाद शेयरों में बढ़ोत्तरी होती है. बायबैक से कंपनी के वैल्यूएशन में भी सुधार होता है. ये देखने को मिला है कि बायबैक ऑफर के बाद अर्निंग प्रति शेयर (EPS), रिटर्न ऑन कैपिटल (return on capital) और रिटर्न ऑन नेटवर्थ जैसे अहम रेश्यो में बायबैक के बाद सुधार देखने को मिलता है.



सबसे अहम बात ये है कि शेयर बायबैक ऑफर चाहे टेंडर रूट से लाया गया हो या ओपन मार्कट रूट से शेयर धारकों को हरहाल में फायदा होता है. इसके अलावा चूंकि शेयर बायबैक प्रस्ताव बाजार भाव से प्रीमियम पर लाए जाते हैं इस लिए ऑफर प्राइज कई मायनों में बेंचमार्क बन जाते हैं. इंफोसिस के बायबैक के मामले में इसका ऑफर प्राइस शेयर के बाजार भाव से 29 फीसदी ज्यादा प्रीमियम पर है.



Buyback offer के निवेशकों के लिए क्या हैं मायने ?



बायबैक के जरिए कंपनी पर प्रोमोटर्स की होल्ड या पकड़ और मजबूत हो जाती है क्योंकि बायबैक के बाद कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या कम हो जाती है. इसका महत्व उस समय समझ में आता है जब किसी कंपनी को होस्टाइल तरीके (जबरन) से अधिग्रहित करने की कोशिश होती है. क्योंकि जिस कंपनी में प्रोमोटरों का होल्डिंग ज्यादा होती है उसका होस्टाइल एक्वीजीशन करना मुश्किल होता है. इसके अलावा बायबैक कंपनी को निवेशकों के बीच ज्यादा लोकप्रिय बनाता है. इसकी वजह ये है कि बायबैक निवेशकों को फायदा पहुचाने का ज्यादा टैक्स इफिसिएंट तरीका होता है. इसका मतलब ये है कि बायबैक के जरिए मिलने वाली राशि पर लागू टैक्स की दर डिविडेंड से मिलने वाली राशि पर लागू टैक्स की दर से कम होती है. बता दें की डिविडेंड में  तीन स्तरों पर टैक्स चुकाना होता है.



इसके अलावा बायबैक किसी कंपनी की पूंजी घटाने का आसाना और जल्दी से पूरा होने वाला तरीका है. समान्य तरीके से पूंजी घटाने के लिए किसी कंपनी को National Company Law Tribunal (NCLT) से अनुमति लेनी होती है. इसके अलावा कंपनियां मंदी और बाजार के उतार-चढ़ाव की स्थिति में अपने शेयर प्राइस को सपोर्ट देनें के लिए भी  ये तरीका अपनाती हैं.



 कंपनियों और निवेशकों के लिए बायबैक की ऊपर बताई गई अहमियत के अलावा कुछ और भी ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से बाजार बायबैक को सकारात्मक नजरिए से देखता है. बायबैक के जरिए कंपनियां अपने सरप्लस कैश को उपयोग में ला सकती हैं.शेयर होल्डर्स के फंड को कंपनी के ऊपर अतिरिक्त उत्तरदायित्व समझा जाता है. बायबैक के जरिए शेयरधारकों के फंड में होने वाली कमी से लिस्टेड कंपनी के ओवरऑल दायित्व में कमी आती है जिससे उसकी बैलेंस शीट मजबूत होता है. 



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इंफोसिस के शेयर धारकों के लिए बायबैक ऑफर के क्या हैं मायने 



इंफोसिस ओपन मार्केट रूप से अधिकतम करीब 5.3 करोड इक्विटी शेयरों का बायबैक करेगी जो उसके पेड-अप कैपिटल के 1.23 फीसदी हैं. इसका मतलब ये है कि कंपनी के वर्तमान शेयर धारक इस ऑफर में सीधे अपने शेयर टेंडर नहीं कर पाएंगे. लेकिन इस बायबैक ऑफर से कंपनी के शेयर धारकों को अप्रत्यक्ष फायदा होगा क्योंकि कंपनी द्वारा करीब 30 फीसदी प्रीमियम यानी 1,750 रुपये प्रति शेयर के भाव पर रखे गए इस ऑफर से बाजार के सेंटीमेंट को बूस्ट मिलेगा. जिससे सेकेंड्री मार्केट में शेयरों के भाव में बढ़त देखने को मिलेगी और शेयर धारक अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ हासिल करेंगे.


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