चिटफंड में पैसा लगाना होगा सुरक्षित, मोदी सरकार ला रही नया कानून

कैबिनेट ने चिटफंड (अमेंडमेंटेंट) बिल, 2019 को संसद में पेश करने की मंजूरी दे दी. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि चिटफंड को और सुरक्षित बनाने के लिए फिर से चिटफंड बिल आएगा.

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 5:55 PM IST
चिटफंड में पैसा लगाना होगा सुरक्षित, मोदी सरकार ला रही नया कानून
चिटफंड में पैसा लगाना होगा सुरक्षित, सरकार ला रही नया कानून
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Updated: July 31, 2019, 5:55 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. कैबिनेट ने चिटफंड (अमेंडमेंटेंट) बिल, 2019 को संसद में पेश करने की मंजूरी दे दी. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि चिटफंड को और सुरक्षित बनाने के लिए फिर से चिटफंड बिल आएगा. ताकि सुसंगठित औऱ सुव्यवस्थित रूप से चिटफंड का बिजनेस चले और लोगों के लिए बचत का रास्ता खुले. इसके लिए सरकार ने चिटफंड को एक रेगुलेटेड रजिस्टर्ड बिजनेस में परिवर्तित करने का निर्णय लिया.

उन्होंने कहा, 'स्टैंडिंग कमेटी के सामने चिटफंड बिल को पेश किया गया था. स्टैंडिंग कमेटी ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. चिटफंड के रेगुलेटेड रजिस्टर्ड बिजनेस के लिए नया बिल होगा. यह बिल में चिट ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए है.'

चिटफंड में निवेश करने की सीमा बढ़ाई
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चिटफंड में व्यक्तिगत और कंपनियों की निवेश की सीमा बढ़ाई गई है. चिटफंड में व्यक्तिगत निवेश की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है. वहीं कंपनियों के लिए यह सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 18 लाख रुपये की गई है.

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क्या है चिटफंड?
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चिटफंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिटफंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे. चिटफंड एक्ट 1982 के सेक्शन 61 के तहत चिट रजिस्ट्रार की नियुक्ति सरकार के द्वारा की जाती है. चिटफंड के मामलों में कार्रवाई और न्याय निर्धारण का अधिकार रजिस्ट्रार और राज्य सरकार का ही होता है.

चिटफंड कंपनियां गैर-बैंकिंग कंपनियों की श्रेणी में आती हैं. ऐसी कंपनियों को किसी खास योजना के तहत खास अवधि के लिए रिजर्व बैंक और सेबी की ओर से आम लोगों से मियादी (फिक्स्ड डिपाजिट) और रोजाना जमा (डेली डिपाजिट) जैसी योजनाओं के लिए धन उगाहने की अनुमति मिली होती है. जिन योजनाओं को दिखाकर अनुमति ली जाती है, वह तो ठीक होती हैं. लेकिन इजाजत मिलने के बाद ऐसी कंपनियां अपनी मूल योजना से इतर विभिन्न लुभावनी योजनाएं बनाकर लोगों से धन उगाहना शुरू कर देती हैं.

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First published: July 31, 2019, 5:11 PM IST
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