जूट उत्पादन करने वाले किसानों के लिए बड़ा ऐलान, आज कैबिनेट बैठक में सरकार ने लिया ये फैसला

जूट की खेती
जूट की खेती

कैबिनेट और CCEA की बैठक के बाद सरकार ने जूट किसानों (Jute Farmers) के लिए बड़ा फैसला लेने की जानकारी दी है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने कहा कि 100 फीसदी अनाज की पैकेजिंग जूट के बैग में ही की जाएगी. 

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  • Last Updated: October 29, 2020, 4:01 PM IST
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नई​ दिल्ली. कैबिनेट और CCEA (Cabinet Committee on Economic Affairs) की बैठक में जूट की खेती को बढ़ावा देने और इसके उत्पादन करने वाले किसानों (Jute Farmers) के लिए सरकार ने नया ऐलान किया है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने बताया कि बैठक में 100 फीसदी अनाज की पैकेजिंग जूट के बैग (Jute Bag) में ही की जाएगी. इसके अलावा कम से कम 20 फीसदी चीनी की पैकेजिंग भी जूट के बैग में ही की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस फैसले जूट से उत्पादन करने वाले किसानों को लाभ मिलेगा. आज की बैठक में सरकार ने एथेनॉल की कीमतों (Ethanol Price) में भी इजाफा करने का फैसला लिया है.

सरकार के इस फैसले से जूट सेक्टर में काम करने वाले करीब 3.7 लाख कामगारों और लाखों किसानों को फायदा होगा. इस फैसले से खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में रहने वाले किसानों को मदद मिलेगी.


सरकारी क्षेत्र में हर साल 6500 करोड़ रुपये के जूट बैग की खरीद
बता दें कि जूट उद्योग मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र पर ही निर्भर है, जो खाद्यान्न की पैकिंग के लिए हर साल 6500 करोड़ रुपये से भी अधिक कीमत की जूट बोरियां खरीदता है. ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि जूट उद्योग के लिए मुख्य मांग निरंतर बनी रही और इसके साथ ही इस क्षेत्र पर निर्भर कामगारों एवं किसानों की आजीविका में आवश्यक सहयोग देना संभव हो सके. इस निर्णय से पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में रहने वाले किसान एवं कामगार लाभान्वित होंगे.



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हाल में जूट को लेकर किए कई और ऐलान- केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने हाल में राष्ट्रीय बीज निगम और भारतीय पटसन निगम (जेसीआई) के बीच समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर किए. उन्होंने, जूट किसानों को कम लागत पर अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने में राष्ट्रीय बीज निगम के कार्य की सराहना की. देश में कच्चे जूट के उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इससे उत्पादों के मूल्य संवर्धन से प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.

उन्होंने तय समय सीमा के भीतर जूट निर्यात क्षमता के निर्माण के लिए एक रोड मैप तैयार करने पर भी जोर दिया.इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने किसानों को प्रमाणित जूट बीज प्रदान करने के लिए कृषि मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय के बीच हुए तालमेल के लिए आभार व्यक्त किया, जिसकी शुरुआत तीन साल पहले हुई थी.

उन्होंने कहा कि इस वर्ष फरवरी में घोषित राष्ट्रीय तकनीकी कपड़ा मिशन में जूट और जूट वस्त्र उत्पादों के लिए एक विशेष प्रावधान है. जल निकायों के तटबंध (लाइनिंग) बनाने में, सड़क निर्माण में और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन रोकने के लिए संरचनाओं के निर्माण में जूट के उपयोग को बढ़ाने की अपार संभावना है.

केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने कहा कि घरेलू बाजार के लिए जूट की जरूरत में आत्मनिर्भर होने के अलावा, अगला लक्ष्य जूट और इसके उत्पादों के सन्दर्भ में देश की निर्यात क्षमता को मजबूत करना है.

जूट परियोजना, आईकेयर के अंतर्गत क्षेत्र की तीन एजेंसियां ​​- भारतीय पटसन निगम (जेसीआई), राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) और सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर जूट एंड एलाइड फाइबर्स (सीआरआईजेएएफ) जूट की मात्रा और गुणवत्ता के समग्र सुधार के लिए आधुनिक कृषि-विज्ञान आधारित प्रथाओं को बढ़ावा दे रहीं हैं.

निम्न गुणवत्ता वाले बीजों और / या नकली बीजों के कारण पिछले कुछ वर्षों में उत्पादित कच्चे जूट की गुणवत्ता प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई है. यह समझौता ज्ञापन यह सुनिश्चित करेगा कि जूट किसान, विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों और गहन फसल प्रणाली के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले बीज प्राप्त करने में सक्षम हैं.
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