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केंद्र सरकार बेचेगी एक और सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान जिंक की पूरी हिस्सेदारी बिक्री को कैबिनेट की मंजूरी

हिंदुस्तान जिंक में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.

हिंदुस्तान जिंक में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में हिंदुस्तान जिंक की पूरी हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. कंपनी में सरकार की 29.54 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि 64.92 फीसदी हिस्सेदारी अनिल अग्रवाल की वेदांता ग्रुप के पास है.

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नई दिल्ली. हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc Ltd) में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी मिल गई है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. इस कंपनी में सरकार की 29.54 फीसदी हिस्सेदारी है. बाकी 64.92 फीसदी हिस्सेदारी अनिल अग्रवाल की वेदांता ग्रुप के पास है.

सरकार को इस हिस्सेदारी बिक्री से लगभग 36,500 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. सरकार के इस फैसले से बुधवार को हिंदुस्तान जिंक का शेयर दिन के कारोबार में 7.28 फीसदी तक चढ़ गया. हालांकि, बाद में इसमें गिरावट आई और बाजार बंद होने तक एनएसई पर इसका भाव 4.10 फीसदी की बढ़त के साथ 307.50 रुपये रहा.

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आएगा एफपीओ

अभी हाल ही में सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा था कि अगर सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचती है तो वे 5 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी खरीद ही नहीं सकते हैं.  हिस्सेदारी बिक्री के लिए सरकार को बाजार में शेयर बेचने होंगे. इसका मतलब यह हुआ कि हिंदुस्तान जिंक का फॉलोऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) लाया जाएगा. इस बारे में अभी फैसला लिया जाना बाकी है.

विनिवेश से 65,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य

आपको बता दें कि सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 65,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है. चालू वित्त वर्ष के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार हिंदुस्तान जिंक में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है. चालू वित्त वर्ष में मोदी सरकार ने विनिवेश से लगभग 23,575 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इनमें से 20,560 करोड़ रुपये एलआईसी की हिस्सेदारी बिक्री से और 3,000 करोड़ रुपये ओएनजीसी की 1.5 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री से जुटाए गए हैं. सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, पवन हंस, आईडीबीआई बैंक और भारत पेट्रोलियम का भी विनिवेश करना चाहती है, मगर इनके रणनीतिक विनिवेश में देरी हो रही है.

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ग्लोबल हालात को देखते हुए सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के निजीकरण को सरकार ने फिलहाल टाल दिया है. शिपिंग कॉरपोरेशन का विनिवेश समय से पीछे चल रहा है. सरकारी हेलिकॉप्टर सेवा प्रदाता कंपनी पवन हंस की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है. पिछले महीने पवन हंस में अपनी 51 फीसदी हिस्सेदारी स्टार9 मोबिलिटी को बेचने की सरकार ने मंजूरी दी थी. लेकिन स्टार9 पर सवाल उठने के बाद बिक्री रोक दी गई. इस कंपनी में बाकी 49 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी तेल व गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी की है.

Tags: Cabinet decision, Central cabinet meeting, Modi cabinet, Narendra Modi Govt

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