दिलशाद गार्डन से गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम तक मेट्रो को कैबिनेट की मंजूरी! GST को लेकर लिया ये फैसला: सूत्र

बुधवार को कैबिनेट की हुई बैठक में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन को मंजूरी मिल गई है. इसके साथ ही कुवैत के साथ करार को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है.
बुधवार को कैबिनेट की हुई बैठक में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन को मंजूरी मिल गई है. इसके साथ ही कुवैत के साथ करार को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है.

बुधवार को कैबिनेट की हुई बैठक में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन को मंजूरी मिल गई है. इसके साथ ही कुवैत के साथ करार को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 23, 2019, 2:35 PM IST
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बुधवार को कैबिनेट की हुई बैठक में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन को मंजूरी मिल गई है. इसके लिए जीएसटी संबंधी अधिनियमों में संशोधन करने होंगे. प्राधिकरण ऐसे मामलों की सुनवाई करेगा जिनमें दो राज्य स्तरीय अग्रिम निर्णय प्राधिकरणों (AAR) के निर्णय एक दूसरे से भिन्न होंगे. इसके साथ ही कुवैत के साथ करार को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है. इस करार से कुवैत में कामकाजी भारतीयों को फायदा होगा. साथ ही कैबिनेट ने दिल्ली के दिलशाद गार्डन से गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम तक मेट्रो को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी है.

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दिसंबर में केंद्रीकृत AAAR गठन का हुआ था फैसला
वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद ने दिसंबर में हुई बैठक के दौरान एक केंद्रीकृत AAAR के गठन का निर्णय किया था. जीएसटी परिषद में सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं. यह जीएसटी पर निर्णय करने वाली सर्वोच्च इकाई है. सूत्रों ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में केंद्रीय जीएसटी अपीलीय प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी गई.
समान मसलों पर अलग-अलग राज्यों के एएआर के अलग-अलग विरोधाभासी फैसलों को लेकर उद्योग जगत लंबे समय से एक अपीलीय प्राधिकरण के गठन की मांग कर रहा था.





6 महीने तक नहीं भरा GST रिटर्न, तो नहीं जनरेट होगा ई-वे बिल-जीएसटी प्रणाली के लिए सूचना प्रौद्योगिकी ढांचा उपलब्ध कराने वाली कंपनी जीएसटी नेटवर्क (GSTN) एक ऐसी प्रणाली विकसित कर रही है जो कारोबारों के जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने पर नजर रखेगी. ऐसे में यदि कोई कारोबारी दो रिटर्न दौर में जीएसटी रिटर्न यानी छह महीने तक कोई जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करता है तो प्रणाली उसे ई-वे बिल बनाने से रोक देगी.

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