कैबिनेट ने इंश्‍योरेंस एक्‍ट में बदलाव को दी मंजूरी, अब बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा होगी 74 फीसदी

कैबिनेट ने इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में एफडीआई की सीमा बढ़ाने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है.

कैबिनेट ने इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में एफडीआई की सीमा बढ़ाने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है.

कैबिनेट (Cabinet Decisions) ने बीमा क्षेत्र में 25 फीसदी एफडीआई (FDI in Insurance Sector) बढ़ाने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है. अभी लाइफ और जनरल इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में एफडीआई की सीमा (FDI Limit) 49 फीसदी है, जो बढ़कर 74 फीसदी हो जाएगी.

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  • Last Updated: March 10, 2021, 10:34 PM IST
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नई दिल्‍ली. कैबिनेट (Cabinet Decisions) ने आज इंश्योरेंस एक्ट में बदलाव (Insurance Act Amendment) को मंजूरी दे दी है. इससे इश्योरेंस सेक्टर में 74 फीसदी प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (FDI in Insurance Sector) का रास्ता साफ हो गया है. अभी लाइफ और जनरल इंश्योरेंस (Life & General Insurance) सेक्‍टर में एफडीआई की सीमा 49 फीसदी है. अब इस सेक्टर में एफडीआई सीमा 25 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 74 फीसदी हो जाएगी. सरकार ने बजट 2021 (Budget 2021) में बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को 25 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था.

आखिरी आदमी तक बीमा उत्‍पाद पहुंचाने में मिलेगी मदद

केंद्र सरकार के इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में एफडीआई बढ़ाने के कदम का मकसद विदेशी कंपनियों को इस क्षेत्र में बड़ा निवेश करने के लिए आकर्षित करना है. इससे देश में बीमा की पहुंच हर आम आदमी तक बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. जानकारों का कहना है कि इंश्योरेंस में एफडीआई की सीमा बढ़ाने से दो फायदे होंगे. एक, इस सेक्टर में पूंजी का प्रवाह (Money Flow) बढ़ेगी. साथ ही कंपनियों का विस्तार होने से नौकरियों के अवसर (Job Opportunities) भी बनेंगे. इसके अलावा कंपनियां अपनी पहुंच ज्यादा लोगों तक बनाने की कोशिश करेंगी. जमीनी स्तर पर आखिरी आदमी तक बीमा उत्पाद पहुंचाने की कोशिश की जाएगी.

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पीएम स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा निधि साल के अंत में नहीं होगी लैप्‍स

कैबिनेट ने इसके अलावा पीएम स्वास्थ्य सुरक्षा निधि (PMHSF) को भी मंजूरी दे दी है. ये फंड हेल्थ, एजुकेशन सेस (Health & Education Cess) से चलेगा. कारोबारी साल खत्म होते ही फंड लैप्स नहीं (Non-Lapsable Fund) होगा. हेल्थ और एजुकेशन सेस का पैसा इस फंड में डाला जाएगा. हेल्थ सेक्टर की फ्लैगशिप स्कीम पर इसी फंड से खर्च किया जाएगा. इसके अलावा आज कैबिनेट से वीवी-पैट मशीन की खरीद को भी मंजूरी मिल गई है. वीवीपैट मशीनें बीईएल और सीआईएल जैसी कंपनियों से खरीदी जाती हैं. चालू कारोबारी साल में 1005 करोड़ रुपये इसके लिए आवंटित किए गए थे.
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