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केंद्र सरकार विवादित Retrospective Tax कानून को करेगी खत्‍म, लोकसभा में संशोधन विधेयक किया पेश

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विवादित कानून को खत्‍म करने के लिए बृहस्‍पतिवार को लोकसभा में कर कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विवादित कानून को खत्‍म करने के लिए बृहस्‍पतिवार को लोकसभा में कर कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया.

केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet Decision) ने वोडाफोन और केयर्न एनर्जी के साथ केंद्र सरकार का विवाद खड़ा करने वाले रेट्रोस्‍पेक्टिव टैक्‍स एक्‍ट (Retrospective Tax Act) को रद्द करने का फैसला लिया है. सरकार ने लोकसभा (Lok Sabha) में संशोधन विधेयक पेश कर दिया है.

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    नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet Decision) ने वोडाफोन और केयर्न एनर्जी जैसी कंपनियों के साथ केंद्र सरकार का विवाद खवाद खड़ा करने वाले रेट्रोस्‍पेक्टिव टैक्‍स एक्‍ट (Retrospective Tax Act) को खत्‍म करने की मंजूरी दे दी है. दोनों कंपनियों ने वित्‍त अधिनियम 2012 के इसी विवादित कानून के सहारे भारत के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. कैबिनेट ने इसे रद्द करने के लिए आयकर कानून में बदलाव (Income Tax Act Amendment) को मंजूरी दे दी है. साथ ही सरकार ने संसद में इससे जुड़ा संशोधन विधेयक भी पेश कर दिया है.

    लोकसभा में पेश हुआ कर कानून (संशोधन) विधेयक, 2021
    वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विवादित कानून को खत्‍म करने के लिए बृहस्‍पतिवार को लोकसभा में कर कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया. मंत्रालय ने साथ ही ये प्रस्‍ताव भी रखा कि अगर लेनदेन 28 मई 2012 से पहले हुआ है तो किसी तरह की रेट्रो टैक्‍स डिमांड नहीं की जा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस कदम से भारत कम टैक्‍स रेट्स पर निवेश का शानदार विकल्‍प बनकर उभरेगा. सरकार ने कहा कि फाइनेंशियल और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में पिछले कुछ साल में कई बड़े सुधार किए गए हैं. इससे देश में निवेश का अच्‍छा माहौल बना है.

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    वित्‍त अधिनियम 2012 के कारण हो रही हैं कई दिक्‍कतें
    केंद्र सरकार ने संसद में कहा कि सुधारों की वजह से बने निवेश के शानदार माहौल के बाद भी इस कानून के कारण की जाने वाली टैक्‍स डिमांड से कई निवेशक पीछे हट रहे हैं. कोरोना संकट के बाद देश उस जगह आकर खड़ा हो गया है, जहां अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी से बढ़ोतरी करना समय की मांग बन चुका है. देश की आर्थिक रफ्तार को बढ़ाने में विदेशी निवेश की अहम भूमिका रहेगी. इससे देश में रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे. ऐसे में ये कानून अड़चन पैदा कर रहा है. ये कानून बताता है कि केंद्र 2012 के कानून के तहत भुगतान की गई राशि बिना ब्याज के वापस लौटाने को तैयार है. इसके कारण केयर्न और वोडाफोन जैसी फर्मों ने अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुकदमा किया. सभी मुकदमों में भारत को हार का सामना करना पड़ा था.

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    कंपनियों से पहले के सौदों पर भी वसूला जा रहा था टैक्‍स
    रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स वो टैक्स है, जो कंपनियों से पहले के सौदों पर भी वसूला जा रहा था. आसान शब्‍दों में समझें तो अगर आज किसी कंपनी पर कोई टैक्स की देनदारी बनती थी तो वह आज से नहीं बल्कि तब से वसूली जाती है, जब से वह इस टैक्स के दायरे में आई हो. वित्‍त मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है. इस बिल के पास होने पर किसी कंपनी से रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स की डिमांड नहीं की जाएगी. इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन के बाद कंपनियों के लिए यह नियम 28 मई 2012 से पहले जैसा हो जाएगा. वित्‍त मंत्री सीतारमण ने कहा, ‘सरकार ने ये प्रस्ताव भी रखा है कि इन मामलों में जो टैक्स लिया गया है उसे ब्याज सहित वापस किया जाएगा.’

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