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कैबिनेट की बैठक में हुए ये दो बड़े फैसले, आम आदमी पर होगा सीधा असर

सूूत्रों के मुताबिक कैबिनेट की बैठक में NBFCs और HFC के लिए आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम (Partial Credit Guarantee Scheme) की शर्तों में ढील दी है.

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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दो सेक्टर को लेकर बड़े फैसले लिए गए हैं. कैबिनेट ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर (HFC) को बड़ी राहत दी है. कैबिनेट ने NBFC और HFC में नकदी बढ़ाने का फैसला लिया है. इस फैसले के तहत आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम (Partial Credit Guarantee Scheme) की शर्तों में ढील दी गई है.

    क्रेडिट गारंटी स्कीम शर्तों में ढील को मंजूरी
    इसमें ढील का मतलब ये हुआ अब NBFC और HFC के BBB+ रेटिंग वाले एसेट्स को सरकारी बैंक खरीद सकेंगे. सरकारी बैंक खरीदेंगे तो उसके एवज में कर्ज मिलेगा. NBFC और HFCs को नकदी आसानी से मिल जाएगी. अभी तक शर्त ये थी कि सिर्फ AA+ रेटिंग वाले एसेट्स ही खरीदने होंगे. एनबीएसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को नकदी मिलने से रियल एस्टेट सेक्टर के साथ घर खरीदारों को भी राहत मिलेगी.

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    BBB+ रेटिंग वाले एसेट्स क्वालिटी के लिहाज से पांचवें पायदान पर होते हैं. यानी थोड़े से कमजोर एसेट्स को भी सरकारी बैंक खरीद सकेंगे. हालांकि इसमें शर्त ये होती है कि सरकार इसमें गारंटी देती है 10 फीसदी की कीमत का. अगर वो एनपीए होता है तो वो 10 फीसदी की भरपाई सरकार करेगी. लेकिन इसकी गारंटी सिर्फ 24 महीने की होगी.

    चालू कारोबारी साल में 1 लाख करोड़ रुपये के एसेट खऱीदने का लक्ष्य है. ये स्कीम 6 महीने या 1 लाख करोड़ रु तक के एसेट पूरा होने तक जारी रहेगी.

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    NHAI को इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट बनाने की दी मंजूरी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को इंस्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) बनाने की मंजूरी दे दी है. SEBI के InvIT गाइडलाइंस के तहत इंस्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट बनाया जाएगा. इससे NHAI के प्रोजेक्ट को मोनेटाइज करने का रास्ता आसान हो जाएगा. यह राष्ट्रीय राजमार्गों को एक वर्ष में कम से कम एक टोल संग्रह ट्रैक रिकॉर्ड का मोनेटाइजेशन करने के लिए NHAI को सक्षम करेगा और NHAI के पास आइडेंटिफाइड हाइवे पर टोल वसूलने का अधिकार रहेगा.
    IIFCL के लिए पूंजी बढ़ाने का फैसला
    वहीं, इंफ्रास्क्ट्रक्चर सेक्टर के लिए IIFCL के लिए पूंजी बढ़ाने का फैसला लिया गया है. IIFCL के लिए ऑथोराइज्ड कैपिटल और इक्विटी सपोर्ट में बढोतरी करने का फैसला हुआ. वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार IIFCL को अतिरिक्त 5,300 करोड़ रुपये मुहैया कराएगी और वित्त वर्ष 2020-19 में 10,000 करोड़ रुपये देगी. इसके अलावा कैबिनेट ने IIFCL के ऑथोराइज्ड कैपिटल को 6,000 करोड़ रुपये बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है.

    इसके अलावा Aircraft Act 1934  में बदलाव करने का फैसला भी लिया गया है. एविएशन सेक्टर में रेगुलेशन को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए जरूरी प्रावधान करने का भी निर्णय लिया गया है. साथ ही दिल्ली मेट्रो फेज 4 के लिए फंडिंग की शर्तों में बदलाव करने का निर्णय भी लिया गया है.

    (लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिटिकल एडिटर- CNBC आवाज़)

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