कैबिनेट की बैठक शुरू! चिटफंड अमेंडमेंट बिल समेत इन पर लग सकती है मुहर

कैबिनेट की बैठक शुरू हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में चिटफंड अमेंडमेंट बिल 2019 को मंजूरी मिल सकती है.

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 2:10 PM IST
कैबिनेट की बैठक शुरू! चिटफंड अमेंडमेंट बिल समेत इन पर लग सकती है मुहर
कैबिनेट की बैठक शुरू! इन बिलों परर लग सकती है मुहर
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Updated: July 31, 2019, 2:10 PM IST
कैबिनेट की बैठक शुरू हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में चिटफंड अमेंडमेंट बिल 2019 को मंजूरी मिल सकती है. साथ ही, सीसीईए (आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति) की बैठक में और P&K फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों के सब्सिडी को भी मंजूरी मिल सकती हैं. इसके अलावा जम्मू कश्मीर रिजर्वेशन बिल 2019 को मंजूरी मिल सकती है.

कैबिनेट बैठक का मुख्य एजेंडा
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जम्मू कश्मीर रिजर्वेशन बिल 2019 को मंजूरी मिल सकती है.
>> चिटफंड अमेंडमेंट बिल 2019 को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी कैबिनेट एजेंडे में शामिल है.

>> P&K फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी के आवंटन को मंजूरी मिल सकती है.



आपको बता दें कि केंद्रीय केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने राज्यसभा में बताया था कि सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर यूरिया की सब्सिडी दर को फिक्स नहीं किया जाएगा. सरकार किसी भी हाल में खेती की जरूरत वाली फर्टिलाइजर को बाजार के भरोसे नहीं छोड़ सकती है. यह किसानों के हित में नहीं होगा.

केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में लिखित सवालों के जवाब में यह बात कही है. वर्ष 2017-18 में जहां फर्टिलाइजर सब्सिडी 69,197 करोड़ रुपये थी, वहीं वर्ष 2018-19 में बढ़कर यह 73,435 करोड़ रुपये हो गई. मानसून देश के अन्य हिस्सों में गति पकड़ने लगा है. खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है. बोआई जून के आखिरी सप्ताह से विभिन्न हिस्सों में शुरूहो जाएगी, जिसके लिए फर्टिलाइजर की जरूरत पड़ेगी. ऐसे समय में सरकार के इस स्पष्टीकरण से किसी तरह का संदेह नहीं रह जाएगा.

गौड़ा ने कहा कि पोटाश और फॉस्फेट वाले फर्टिलाइजर (पीएंडके) की पोषण आधारित सब्सिडी की योजना पहली अप्रैल, 2010 को शुरु की गई थी. इसके तहत प्रति किलो के हिसाब से सब्सिडी तय की गई थी. इसमें नाइट्रोजन, फास्फेट, पोटाश और सल्फर पर सालाना सब्सिडी की गणना की जाती है. इसमे अंतरराष्ट्रीय मूल्य, एक्सचेंज रेट और तत्कालीन स्टॉक को ध्यान में रखा जाता है.

गौड़ा ने सदन में बताया कि किसानों को वैधानिक अधिसूचित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर ही मुहैया कराई जाती है. यूरिया का एमआरपी फिलहाल 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम है. हालांकि इसमें नीम कोटिंग और टैक्स अलग से जुड़ जाता है.

यूरिया पर मिलने वाली सब्सिडी का भुगतान किसान के खाद खरीदने के बाद संबंधित यूरिया कारखाने को किया जाता है. आने वाले दिनों में इसे सीधे किसान के खाते में जमा कराने की योजना पर काम चल रहा है.

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First published: July 31, 2019, 2:00 PM IST
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