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घाटे में चल रही कंपनियों के CEO की सैलरी से जुड़ा नया कानून जल्द आएगा, सरकार की तैयारी पूरी

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 7:19 PM IST
घाटे में चल रही कंपनियों के CEO की सैलरी से जुड़ा नया कानून जल्द आएगा, सरकार की तैयारी पूरी
अपराध की लिस्ट की जाएगी छोटी

मौजूदा अपराधों की सूची को दो तिहाई छोटा किया जा सकता है. यानी कुल 44 अपराधों को गैर-आपराधिक कैटेगरी में डालने का प्रस्ताव है. कैबिनेट में मंजूरी के बाद सरकार की योजना इसे बजट सत्र में पास कराने की है. सरकार कैबिनेट (Cabinet) में प्रस्ताव लाकर बजट में इसका ऐलान कर सकती है.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 7:19 PM IST
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नई दिल्ली. घाटे में चल रही कंपनियों के लिए राहत की खबर है. नुकसान झेल रही कंपनियों के सीईओ (CEO) और टॉप मैनजेमेंट को सैलरी मिलती रहे, इसके लिए सरकार कंपनी कानून (Companies Act) में बदलाव कर सकती है. साथ ही मौजूदा अपराधों की सूची को दो तिहाई छोटा किया जा सकता है. यानी कुल 44 अपराधों को गैर-आपराधिक कैटेगरी में डालने का प्रस्ताव है. कैबिनेट (Cabinet) में मंजूरी के बाद सरकार की योजना इसे बजट सत्र में पास कराने की है. सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर बजट (Budget) में इसका ऐलान कर सकती है.सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक घाटा झेल रही कंपनी के टॉप मैनेजमेंट को राहत देने के लिए कंपनी कानून में बदलाव किए जा सकते हैं जिससे कि KMPs यानी मैनेजेरियल पर्सन को लगातार सैलरी मिलती रहे.

सीईओ की सैलरी से जुड़े नए कानून की तैयारी
कैबिनेट में इससे संबंधित कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा जाएगा. सरकार की बजट में इस नए बदलाव का ऐलान कराने की योजना है. इसके लिए अभी बैंक, क्रेडिटर्स और शेयरहोल्डर्स की सहमति जरूरी है. नए नियम पास होने पर शेयरहोल्डर्स स्पेशल रिजॉल्यूशन पास करके इसके लिए मंजूरी दे सकेंगे. इंफ्रा, टेलीकॉम, पावर सेक्टर को इसका फायदा मिल सकता है.

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अपराध की लिस्ट की जाएगी छोटी
इसके साथ ही कंपनी कानून में बदलाव कर अपराध की लिस्ट छोटी की जाएगी. CSR, डिस्क्लोजर, कंटेम्प्ट के मामलों में भी राहत मिल सकती है. 44 अपराधों को गैर-आपराधिक कैटेगरी में डाला जा सकता है.इज ऑफ डूइंड बिजनेस के लिए भी कानून में बदलाव किया जाएगा. कंपीटिशन कानून और IBC में स्पेशल बेंच के गठन का भी ऐलान हो सकता है.

नॉन लिस्टेड कंपनियों को हर तिमाही देनी होगी जानकारी
इसके अलावा नॉन लिस्टेड कंपनियों के डिस्लोजर नॉर्म सख्त किए जाने की भी तैयारी है. अब Registrar of Companies (RoC) को हर तिमाही आधार पर जानकारी देनी होगी.

(आलोक प्रियदर्शी, संवाददाता- CNBC आवाज़)

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First published: January 16, 2020, 6:27 PM IST
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