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यूक्रेन से तेल सहित ये चीजें खरीदता है भारत, युद्ध से होंगी महंगी

यूक्रेन से तेल सहित ये चीजें खरीदता है भारत, युद्ध से होंगी महंगी

रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) युद्ध से भारत में कई चीजें महंगी हो सकती हैं.

रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) युद्ध से भारत में कई चीजें महंगी हो सकती हैं.

यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद कच्चे तेल में वृद्धि से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और मुद्रास्फीति बढ़ेगी जिससे समग्र रूप से सभी वस्तुओं के दाम में वृद्धि होने की आशंका है. माल की विनिर्माण और परिवहन लागत अधिक महंगी हो जाएगी.

    नई दिल्‍ली. रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है, खास तौर पर तब जब भारतीय बाजार कोविड महामारी से उबरने का प्रयास कर रहा है. युद्ध के कारण कच्चे तेल में अपेक्षित वृद्धि महंगाई को बढ़ावा देगा,जबकि सोने की कीमतों (Gold Price) में अपेक्षित वृद्धि भी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का कारण बनेगी. दूसरी ओर, इस मौजूदा परिस्थितियों के परिदृश्य में रुपये के कमजोर होने की आशंका है जो निश्चित रूप से भारत के व्यापार संतुलन को प्रभावित करेगा. मौजूदा हालात को देखते हुए ये बातें कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की ओर से कही गई हैं.

    कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भारतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध (Russia-Ukraine War) से उत्पन्न वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा कि चालू वर्ष में, भारत का कुल तेल आयात 25.8 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई. थोक मूल्य सूचकांक में कच्चे तेल और संबद्ध उत्पादों की हिस्सेदारी 9% है. कच्चे तेल (Crude Oil) में वृद्धि से पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में और मुद्रास्फीति बढ़ेगी जिससे समग्र रूप से सभी वस्तुओं के दाम में वृद्धि होने की आशंका है. माल की विनिर्माण और परिवहन लागत अधिक महंगी हो जाएगी. कच्चे तेल का इस्तेमाल, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, पेंट और कई अन्य वस्तुओं आदि के निर्माण में किया जाता है जो कीमतों को और बढ़ाने का कारक बनेगा.

    यूक्रेन से ये चीजें खरीदता है भारत
    कच्चे तेल के अलावा, भारत दवा कच्चे माल, सूरजमुखी, जैविक रसायन, प्लास्टिक, लोहा और इस्पात आदि का यूक्रेन से आयात करता है जबकि भारत फल, चाय, कॉफी, दवा उत्पाद, मसाले, तिलहन, मशीनरी और मशीनरी सामान आदि का निर्यात करता है. दूसरी ओर, रूस भारत के साथ व्यापार में 25 वां सबसे बड़ा भागीदार है, रूस को 2.5 बिलियन डॉलर का निर्यात किया जाता है और रूस से $6.9 बिलियन डॉलर का आयात करता है.

    यूक्रेन से आने वाले शिपमेंट फंसने की आशंका
    भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि भारत के व्यापारी सामान्य तौर पर यूक्रेन के आपूर्तिकर्ताओं को अग्रिम भुगतान करते है, जो अब अनिश्चितकालीन के लिए फंसने की उम्मीद है. यूक्रेन से आने वाले शिपमेंट अगर फंस जाते हैं तो निश्चित रूप से इसका भारतीय व्यापारियों को नुकसान होगा. डॉलर की कीमतों में अपेक्षित वृद्धि अन्य देशों के साथ व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी क्योंकि भारतीय व्यापारियों को शिपमेंट के समय प्रचलित कीमत का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाएगा. सोने की कीमतों में बढ़ोतरी घरेलू बाजार को और प्रभावित करेगी. भारत का समग्र व्यापार भविष्य में अस्थिर होने की उम्मीद है.

    केंद्र से की ये मांग
    देश का व्यापारिक समुदाय मौजूदा संकट के समय मे सरकार के साथ एकजुटता से खड़ा है और देश में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा उठाए जाने वाले किसी भी कदम का समर्थन करेगा. कैट ने केंद्र सरकार से रूस और यूक्रेन के बीच मौजूदा युद्ध पर नजर रखते हुए देश में व्यापार और वाणिज्य के लिए कुछ सहायक उपायों की घोषणा करने का आग्रह किया है.

    Tags: Import-Export, India russia, Petrol diesel prices, Ukraine

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