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जेब में रखे नोट से भी बीमारी फैलने का खतरा, CAIT ने सरकार से की अपील

करंसी नोट
करंसी नोट

कॉनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने सरकार को चिट्ठी लिखी है और अपील की है सरकार डिजिटल लेनदेन (Digital Transaction) को बढ़ाने पर जोर दे. ऐसी करेंसी नोट्स चलाने पर विचार करे जिनसे संक्रमण का ख़तरा कम हो.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर आम सरकार से लेकर आम लोगों की चिंताए लगातार बढ़ती जा रही है. अब कोरोना वायरस को लेकर आशंका जताई जा रही है कि यह करंसी नोट्स के जरिए भी फैस सकता है. कॉनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने सरकार को चिट्ठी लिखी है और अपील की है सरकार डिजिटल लेनदेन (Digital Transaction) को बढ़ाने पर जोर दे. ऐसी करेंसी नोट्स चलाने पर विचार करे जिनसे संक्रमण का ख़तरा कम हो. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी WHO यानि करेंसी नोट्स के बजाय कॉन्टेक्टलेस ट्रांजैक्शन की सलाह दी है.

ईरान से कैश लेनदेन करने से बचने की सलाह
CAIT ने सरकार से डिजिटल पेमेंट बढ़ाने की अपील करते हुए प्लास्टिक के नोट्स चलाने पर विचार करने को कहा है. पेपर नोट्स पर बैक्टीरिया, फंगस की आशंका है जिससे WHO ने करेंसी ट्रांजैक्शन से बचने को कहा है. ईरान ने भी कैश में लेनदेन से बचने की सलाह दी है.

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कंरसी नोट के जरिए तेजी से बढ़ता है संक्रमण


CAIT ने वित्त मंत्रालय को लिए गए इस लेटर में कई स्टडीज और मीडिया रिपोर्ट्स की मदद से अपनी सुझाव को सपोर्ट किया हे. इन स्टडीज में कहा गया है कि करंसी नोट्स पर माइक्रो-ऑर्गेनिज्म होते हैं, जिनसे सबसे तेजी से संक्रमण फैलता है. एक्सपर्ट्स ने कई बार इस बात की चेतावनी दी है कि कई तरह के संक्रमण करंसी नोट्स के जरिए ही फैलते हैं. इनमें यूरिनरी, सांस लेने, स्किन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

किसी भी वायरस के फैलने की बढ़ती आशंका
CAIT के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ट्रेडिंग कम्युनिटी में ही सबसे करंसी का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने कहा, 'यह आम बात है कि करंसी एक हाथ से दूसरे हाथ में बार-बार ट्रांसफर होती रहती है. इसके दूषित होने की संभावना सबसे अधिक होती है. ध्यान देने वाली बात है कि भारत में नोट गिनते वक्त अधिकतर लोग अपनी उंगली को बार-बार मुंह में रखते हैं ताकि नोट गिनने में आसानी हो सके. इससे किसी भी वायरस के फैलने की आशंका बढ़ जाती है.'

CAIT ने सुझाव दिया कि यूनाइटेड किंग्डम, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने पॉलिमर नोटों को का इस्तेमाल शुरू कर दिया है ताकि संक्रमण की आशंक कम हो सके. ऐसे में भारत में भी पॉलिमर नोटों की संभावना को तलाशना चाहिए.

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