वंदे भारत ट्रेन बनाने के लिए चीनी ज्वाइंट वेंचर को नहीं दिया जाए मौका: CAIT

वंदे भारत ट्रेन बनाने के लिए चीनी ज्वाइंट वेंचर को नहीं दिया जाए मौका: CAIT
कैट ने कहा है कि भारतीय रेलवे की यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के आह्वान का एक हिस्सा है.

व्यापारी संगठन कैट पत्र लिखकर कहा कि रेल मंत्री पीयूष गोयल वंदे भारत ट्रेन के लिए चीनी ज्वाइंट वेंचर को भाग नहीं लिया जाए. चीन के स्वामित्व वाली कंपनी सीआरआरसी कॉरपोरेशन गुरुग्राम की एक कंपनी के साथ 2015 में ज्वाइंट वेंचर बनाई थी.

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नई दिल्ली. कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने सरकार से मांग की है कि भारतीय रेलवे की अर्ध-उच्च गति स्वदेशी ट्रेन-18 परियोजना के लिए वैश्विक निविदा में चीन के स्वामित्व वाली कंपनी सीआरआरसी कॉरपोरेशन (CRRC Corporation) को भाग नहीं लेने दिया जाए. कैट ने शनिवार को इस बारे में रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है. 44 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए इस परियोजना का कुल मूल्य 1,500 करोड़ रूपये से अधिक है.

निविदा पेश करने वाली कंपनियों में एक चीनी ज्वाइंट वेंचर भी शामिल
गोयल (Piyush Goyal) को लिखे पत्र में कैट ने महासचिव प्रवीण खंडलेवाल ने कहा कि चीन की कंपनी सीआरआरसी कॉरपोरेशन गुरुग्राम की एक कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम में इन रेलों की प्रणोदन प्रणाली या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की के ठेकेखरीद के लिए निविदा पेश करने वाली छह कंपनियों में एक है.

भारतीय कं​पनियों पर ही जोर दे रेल मंत्रालय
कैट ने कहा है कि भारतीय रेलवे की यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के आह्वान का एक हिस्सा है, इसलिए इस तथ्य और वर्तमान में चल रही परिस्थितियों को देखते हुए चीनी कंपनी को इस परियोजना में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. पत्र में कहा गया है कि रेल मंत्रालय को इस परियोजना के लिए भारतीय कंपनियों पर ही जोर देना चाहिए.



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इन कंपनियों ने भी पेश की दावेदारी
उपरोक्त ज्वाइंट वेंचर के अलावा जिन अन्य 5 कंपनियों ने रुचि दिखाई, उसमें सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भारत इंडस्ट्रीज, इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, मेधा सर्वो ड्राइव्स प्राइवेट लिमिटेड, पावरनेटिक्स इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड हैं. रेल मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी दी है.

चीनी फर्म्स द्वारा प्राइवेट ट्रेनों के टेंडर बिड में भाग लेने को लेकर रेलवे बोर्ड चेयरमैन यादव ने कहा था, 'जहां तक चीनी कंपनियों द्वारा इस टेंडर में भाग लेने की बात है तो मेक इन इंडिया पॉलिसी के तहत कुछ गाइडलाइंस हैं, जिसे डिपार्टमेंट फॉर प्रोमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड ने तैयार किया है. हम इसे ही फॉलो करेंगे.'

पीएम मोदी ने पहली वंदे भारत ट्रेन को ​दिखाई थी हरी झंडी
बता दें कि पिछले साल ही फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ​नई दिल्ली-वाराणसी रूट के लिए देश के पहले वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी. इसके बाद दूसरी वंदे भारत ट्रेन नई दिल्ली और श्री माता वैष्णोदेवी कटरा के लिए चलाई गई. इस ट्रेन को गृह मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर को हरी झंडी दिखाई थी.

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पिछले सप्ताह ही रेल मंत्रालय ने प्राइवेट कंपनियों को 109 रूटों पर प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए औपचारिक प्रोसेस शुरू किया था. इसके साथ ही भारतीय रेल के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब प्राइवेट कंपनियों की साझेदारी बढ़ेगी. (भाषा इनपुट के साथ)
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