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New Research: क्या पैसे से खुशी हासिल होती है? जी हां! पैसे से खुशियां खरीदी जा सकती है: रिसर्च

पैसे के हिसाब से खुशियां यानी इमोशन का स्तर पर भी बढ़ जाता है. (फोटो क्रेटिड : ब्लूमबर्ग)
पैसे के हिसाब से खुशियां यानी इमोशन का स्तर पर भी बढ़ जाता है. (फोटो क्रेटिड : ब्लूमबर्ग)

अमेरिका में हुए एक रिसर्च पेपर में किया गया दावा, रिसर्च के लिए आईफोन में एक एप से अमेरिकियों पर पैसे और खुशी का एनालिसिस किया

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 11:26 AM IST
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न्यूयार्क. हम से ज्यादातर लोगों का मानना है कि हद से ज्यादा पैसा कमा भी लिया जाए तो उससे खुशियां हासिल नहीं होंगी. या यूं कहें कि पैसे से खुशियां नहीं खरीदी जा सकती है. लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है.
ब्लूमबर्ग के जस्टिन फॉक्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. फॉक्स ने विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा है कि पैसे से खुशियां नहीं खरीदने वाली बात एक पुरानी धारणा है. आधुनिक शोध के मुताबिक जिनके पास खूब सारा पैसा है, उन्हें पैसे से खुशियां खरीदने का अच्छा अनुभव होता है.
पब्लिक ओपिनियन पर आधारित आधुनिक शोध के बाद से कई विशेषज्ञ इस थ्योरी की टेस्टिंग अलग-अलग रिजल्ट्स के साथ करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ का कहना है कि खुशी के अलग-अलग पहलू हो सकते हैं. उसी के हिसाब से पैसे से खुशी खरीदने की बात का नतीजा निकाला जा सकता है. वर्ष 2010 में एक बहुचर्चित रिसर्च पेपर में अर्थशास्त्र में नोबल पुरस्कार विजेता मनोवैज्ञानिक डैनियल काह्नमैन और अर्थशास्त्री एंगस डिएटन ने गैलप सर्वे की स्टेडी की। उन्होंने बताया कि अमेरिकियों को अपने जीवन में संतुष्टि का स्तर एक निश्चित आय से आता है। वर्ष 2010 में 75 हजार डॉलर की सालाना आय उनके लिए खुशी और संतुष्टि वाली होती है। आज के हिसाब से देखे तो यह रकम 90,000 डॉलर होगी.
जब काहेनमैन और डिएटन इस शोध को कर रहे थे, तब हार्वर्ड में मनोविज्ञान के डॉक्टरेट छात्र और पूर्व सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट मैनेजर मैथ्यू किलिंग्सवर्थ भी पैसे से खुशी नापने की मैथेड विकसित कर रहे थे. उन्होंने आईफोन में ट्रैक योर हैप्पीनेस नाम का एप विकसित किया। यह एप रैंडमली यूजर से फीडबैक के लिए पूछता था और उनकी गतिविधियों और भावनाओं पर नजर रखता था। इसके द्वारा 2010 में शुरूआत रिसर्च में बताया मन में जितना भटकाव रहता है, उतना ही मन दुखी होता है। फिर किलिंगवर्थ ने इस एप के जरिए खुशी और आय के बीच की कड़ी को मापने का काम किया। इसका निष्कर्ष प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किया गया है. इसके मुताबिक पैसे का संबंध जीवन की संतुष्टि के लिए बेहद मजबूत है। यह 75 हजार या 90 हजार डॉलर तक सीमित नहीं है. बल्कि जिनके पास अथाह संपत्ति है, उनके लिए पैसा खुशियां खरीदता है.
इसलिए हुई रिसर्च

वर्ष 1974 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री रिचर्ड ईस्टरलीन ने अपने एक रिसर्च में पाया था कि यदि किसी देश में प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय बहुत ज्यादा भी है तो उससे खुशियां नहीं लाई जा सकती है. उनके इसी निष्कर्ष की जांच के लिए बाद में बहुत बहस हुई. दरअसल उनके रिसर्च के बाद विकसित देशों में लोग पैसों को तवज्जों देना कम कर रहे थे. इससे राष्ट्रीय आय के साथ जीवन सूचकांकों में गिरावट आने लगी थी। यही नहीं, इस परिस्थिति से लोग धीरे-धीरे अवसाद में जाने लगे थे.



इसलिए इस स्टडी की विश्वसनीयता ज्यादा

किलिंग्सवर्थ ने अपने एप का उपयोग 33,391 नौकरीापेशा अमेरिकियों पर किया और इससे 17,25,994 सैंपल एकत्रित किए. वर्ष 2019 में अमेरिकी औसत घरेलू आय 68,703 डॉलर थी लेकिन किलिंगवर्थ ने सर्वे में औसत 85,000 डॉलर आय वालों का शामिल किया, ताकि ज्यादा आय वाले लाेगों पर पैसे से खुशी खरीदने वाला प्रयोग हो सके.
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