केयर रेटिंग्स का अनुमान, FY22 में 10.2 फीसदी रह सकती है GDP ग्रोथ

कोरोना के बढ़ते मामलों में बढ़ोतरी से आर्थिक गतिविधियों पर असर

कोरोना के बढ़ते मामलों में बढ़ोतरी से आर्थिक गतिविधियों पर असर

कोरोना वायरस (Coronavirus) मामले में तेजी से वृद्धि के साथ विभिन्न राज्यों में लगाई जा रही पाबंदियों से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने के साथ वृद्धि दर के अनुमान को कम किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 21, 2021, 9:43 PM IST
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नई दिल्ली. रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स (Care Ratings) ने वित्त वर्ष 2021-22 (FY22) के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी (Gross Domestic Product) वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 10.2 फीसदी कर दिया है. पूर्व में वृद्धि दर 10.7 से 10.9 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी.

कोरोना वायरस मामले में तेजी से वृद्धि के साथ विभिन्न राज्यों में लगाई जा रही पाबंदियों से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने के साथ वृद्धि दर के अनुमान को कम किया गया है. पिछले एक महीने में यह तीसरा मौका है जब रेटिंग एजेंसी ने अनुमान को संशोधित किया है.

पहले 11 से 11.2 फीसदी रहने का अनुमान था

केयर रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा, ''हमने 2021-22 के लिये जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित किया है. पिछले लगभग 30 दिनों में जो बदलाव हुआ है, उसके कारण अनुमान को संशोधित किया गया है. हमने इसे कम कर अब 10.2 फीसदी कर दिया है.'' इससे पहले, केयर रेटिंग्स ने 24 मार्च, 2021 को जीडीपी वृद्धि दर 11 से 11.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था.
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महाराष्ट्र में कोविड संक्रमण तेजी से फैलने के बाद राज्य सरकार ने अप्रैल के पहले सप्ताह से अपेक्षाकृत कम कड़ाई के साथ ‘लॉकडाउन’ लगाये जाने की घोषणा की थी. राज्य में पाबंदियों के कारण आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने से एजेंसी ने पांच अप्रैल को 2020-21 के लिये जीडीपी अनुमान को घटाकर 10.7 से 10.9 फीसदी कर दिया था.

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केयर रेटिंग्स के अनुसार लेकिन बाद में 20 अप्रैल से लॉकडाउन को कड़ा कर दिया गया जिसे व्यापार गतिविधियों पर आने वाले समय में अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है. इसके अलावा कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई अन्य राज्यों ने भी पाबंदियां लगाई है. इसमें वीकेंड लॉकडाउन, पूर्ण रूप से लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू शामिल हैं.
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