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देखभाल करने वाले व्यक्ति सावधान हो जाएं! आपको मधुमेह रोगियों के इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए

देखभाल करने वाले व्यक्ति सावधान हो जाएं! आपको मधुमेह रोगियों के इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए

 इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन एटलस 2019 के अनुसार, 2019 में यह संख्या 4 लाख 20 हज़ार तक पहुंच गई थी.

इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन एटलस 2019 के अनुसार, 2019 में यह संख्या 4 लाख 20 हज़ार तक पहुंच गई थी.

सभी लोगों को एक बीमारी ऐसी है, जिसके बारे में हमें जागरूक होना चाहिए, वह है मधुमेह. मधुमेह और इससे जुड़ी परेशानियों की वजह से हर साल लाखों लोगों की मौत होती है. इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन एटलस 2019 के अनुसार, 2019 में यह संख्या 4 लाख 20 हज़ार तक पहुंच गई थी. आइए आज हम इसी पर विस्तार से चर्चा करेंगे.

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नई दिल्ली . हम में से ज़्यादातर लोग चाहकर भी, अपने स्वास्थ्य के लिए सही चुनाव नहीं कर पाते. हम जानते हैं कि क्या कि क्या सही है और क्या गलत. हमें कसरत करना चाहिए, विटामिन लेना चाहिए, मीठे और तले हुए खाने से बचना चाहिए. इतना ही नहीं, सिर्फ़ तब ही खाना चाहिए, जब असलियत में भूख लगे. मगर हम ऐसा नहीं करते. यह सब बहुत मुश्किल है और रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियों के साथ तो नामुमकिन है. इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि हमारी उम्र क्या है, हमारी सामाजिक और वित्तीय स्थिति क्या है, हम सिंगल हैं या शादीशुदा. हालांकि, यह सब बातें उस वक्त बेमाने हो जाती हैं, जब हमें किसी अपने का ख़्याल रखना होता है.

इन सबके बावजूद, सच यह है कि हम सब बड़े हो रहे हैं. हमारे साथ हमारे माता-पिता, दादा-दादी, सास-ससुर, और चाचा-चाची वगैरह की उम्र भी बढ़ रही है. यह लोग हमसे देखभाल की उम्मीद रखते हैं. यह एक बड़ी ज़िम्मेदारी है जो हमें उठानी होगी. अगर अभी हम यह ज़िम्मेदारी नहीं उठा रहे हैं, तब भी आगे जाकर हमें यह करना पड़ सकता है. तो हम इस काम को सही तरीके से कैसे कर सकते हैं? इसका जवाब है जानकारी, जानकारी, और ढेर सारी जानकारी. हम जितना ज़्यादा जानते हैं, उतना ही ज़्यादा चीज़ों को समझते हैं और मुश्किल हालातों में हम इस अनुभव का इस्तेमाल करते हैं. किसी काम को सीखने का सबसे अच्छा तरीका है ज़्यादा से ज़्यादा अभ्यास.

80% लोगों को किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां 
देखभाल करने में सक्षम लोगों के तौर पर, एक बीमारी जिसके बारे में हमें ज़्यादा जानकार होना चाहिए, वह है मधुमेह. मधुमेह और इससे जुड़ी परेशानियों की वजह से हर साल लाखों लोगों की मौत होती है. इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन एटलस 2019 के अनुसार, 2019 में यह संख्या 4 लाख 20 हज़ार तक पहुंच गई थी. अकेले मधुमेह और कुछ मामलों में उच्च रक्तचाप और मधुमेह की वजह से, दुनियाभर में 80% लोगों को किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो जाती हैं. मधुमेह और किडनी की गंभीर बीमारियां, दोनों ही हृदय रोगों1 से जुड़ी हुई हैं. दुनिया भर1 में डायबिटिक फुट और शरीर के निचले धड़ के अंगों में होने वाली परेशानियों की वजह से मधुमेह के 40 से 60 लाख मरीज़ों पर असर पड़ता है. अल्सर की गंभीर बीमारी और शरीर के किसी अंग को काटने की वजह से जीवन की गुणवत्ता में काफ़ी कमी आती है और जल्दी मृत्यु होने का खतरा बढ़ जाता है.

अगर आपके परिवार में और जान-पहचान के किसी अन्य इंसान को मधुमेह है, तो आज ही इससे ज़ड़ी मुश्किलों के बारे में पढ़ना और सीखना शुरू करें. अगर शुरुआती स्तर पर ही जांच कर ली जाए, तो सही इलाज हो सकता है. अक्सर देखा गया है कि मधुमेह से जुड़ी सभी बीमारियों में ऐसा होता है.

आंखों की रोशनी कम होती है 
इस बारे में कम ही लोग जानते हैं, लेकिन मधुमेह से होने वाली सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, आंखों की रौशनी का कम होना. मधुमेह की वजह से आंखों की होने वाली सबसे अहम बीमारियां हैं: डायबिटिक रेटिनोपैथी, डायबिटिक मैकुलर एडिमा, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, दोहरी दृष्टि (एक ही चीज़ का दो दिखना), और ध्यान केंद्रित करने में होने वाली मुश्किल1. इनमें से डायबिटिक रेटिनोपैथी को अंधेपन की मुख्य वजहों में से एक माना जाता है. इसकी वजह से कामकाजी उम्र की आबादी में व्यक्तिगत और सामाजिक आर्थिक1 तौर पर बहुत बुरा असर देखने को मिलता है. ऊपर बताई गई बीमारियों में से यह सबसे ज़्यादा नुकसानदेह है. ऐसा इसलिए, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके कोई लक्षण पता नहीं चलते. इसका मतलब यह है कि जब तक लक्षण दिखना शुरू होते हैं, तब तक आंखों की रौशनी को ऐसा नुकसान हो चुका होता है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता.

Eye

अगर आपको चश्मा बदलने के बाद भी पढ़ने में मुश्किल होती है, तो इसे अनदेखा न करें.

यहां कुछ लक्षण दिए गए हैं जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए. देखभाल करने वाले शख्स और शुभचिंतक, दोनों के तौर पर यह बहुत ज़रूरी है.

पढ़ते वक़्त होने वाली परेशानी
यह एक मुश्किल काम है, क्योंकि सामान्य ज्ञान कहता है कि हमारी आंखें उम्र के साथ कमज़ोर होती जाती हैं. हालांकि, जब हम पढ़ते हैं, तो हम आंख के एक खास हिस्से का इस्तेमाल करते हैं जिसे मैक्युला कहा जाता है, वह जगह जो तेज़ निगाह2 का काम करती है. यह आंख का वही हिस्सा है जिसका इस्तेमाल हम गाड़ी चलाते समय और चेहरे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समय करते हैं. मधुमेह की वजह से मैक्युला में सूजन आ सकती है. इस स्थिति को डायबिटिक मैकुलर एडिमा कहा जाता है, जो डायबिटिक रेटिनोपैथी के समूह3 का हिस्सा है.

अगर आपको चश्मा बदलने के बाद भी पढ़ने में मुश्किल होती है, तो इसे अनदेखा न करें. रेटिना सोसाइटी ऑफ इंडिया की संयुक्त सचिव डॉ मनीषा अग्रवाल के अनुसार, यह डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षणों में से एक है. इसकी वजह से आंखों में काले या लाल धब्बों के थक्के पड़ सकते हैं. इतना ही नहीं, आंखों में रक्तस्राव की वजह से अचानक दिखना भी बंद हो सकता है.

नेत्र चिकित्सक के पास जाने पर ज़ोर दें और जब तक आप डॉक्टर से मिलें, तब तक आंखों से जुड़ी किसी भी परेशानी पर नज़र रखें. जब आंखों की बात आती है, तो हर जानकारी ज़रूरी होती है.

धुंधला दिखना
नज़र के धुंधले होने की परेशानी कई तरह से हो सकती है. कुछ लोगों को रंग हल्के नज़र आने लगते हैं. वह रंगों के अलग-अलग शेड को नहीं पहचान पाते. जैसे किसी सफ़ेद दीवार के पास सफ़ेद रंग का दीपक रखा हो, तो उन्हें इन चीज़ों को देखने में परेशानी होगी. ऐसे लोगों को रात के समय भी देखने में परेशानी होती है. इन सबके बावजूद सबसे पुख्ता लक्षण है धुंधला दिखना, अस्पष्ट दिखना या ऐसी चीज़ें दिखना जैसे सब अंधेरे में हो, मानों आप किसी घूंघट के पीछे से सब देख रहे हों. हो सकता है कि असलियत में ऐसा ही हो रहा हो4.

मोतियाबिंद से आंख के लेंस पर असर होता है, जिससे आंखों के लेंस पर ही एक धुंधली परत बन जाती है. मधुमेह की बीमारी झेल रहे लोगों में मोतियाबिंद होने का सबसे ज़्यादा खतरा होता है. मधुमेह के मरीज़ों को उन लोगों की तुलना में मोतियाबिंद जल्दी हो सकता है जिन्हें मधुमेह की बीमारी नहीं है. शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि ज़्यादा ग्लूकोज़ की वजह से, लेंस पर धुंधली परत5 बन जाती है (मोतियाबिंद हो जाता है).

आंख में दबाव महसूस होना
आंखों में सूजन की शिकायत पर ध्यान दें. कई बार, पीड़ित व्यक्ति की सूजन दिखाई नहीं देती है, लेकिन उसे अपनी आंखों में सूजन महसूस होने लगती है. हालांकि, कई नेत्र रोगों की वजह से आंखों में सूजन हो सकती है, लेकिन मधुमेह के मरीज़ों को ग्लूकोमा6 का ध्यान रखना चाहिए.

मधुमेह की वजह से ग्लूकोमा3,6 होने की संभावना दोगुनी हो जाती है, जिसका इलाज अगर जल्दी न किया जाए तो नज़र कमज़ोर हो सकती है और अंधापन भी हो सकता है. उम्र6 के साथ खतरा भी बढ़ता है.
ग्लूकोमा तब होता है जब आंख में दबाव बनता है. दबाव की वजह से, रेटिना और ऑप्टिक तंत्रिका तक खून ले जाने वाली नसों में थक्के पड़ जाते हैं. इससे धीरे-धीरे नज़र कमज़ोर हो जाती है, क्योंकि रेटिना और तंत्रिका खराब6 हो जाती हैं.

नज़र के सामने तैरती हुई वे चीज़ें जिनका रंग गहरा होता है
हम सभी को समय-समय पर अपनी आंखों के सामने कुछ तैरती हुई चीज़ें दिखती हैं. वे दिलचस्प और छोटी-छोटी पारदर्शी आकृतियां जिन्हें हम सिर्फ़ तब ही देखते हैं जब हम ठोस रंग की किसी दीवार या आसमान की तरफ़ देखते हैं. यह बिल्कुल सामान्य है. हालांकि, अगर आपको मोटी या गहरे रंग की आकृतियां दिखती हैं, तो आपको इसे बहुत गंभीरता7 से लेना चाहिए.

आमतौर पर, यह लक्षण इतने कम समय के लिए होता है कि आप इन धुंधली आकृतियों के बारे में किसी को भी कम ही बात करते सुनेंगे. इसलिए पूछें. खासतौर पर अगर आपको पढ़ने में परेशानी हो रही है, गाड़ी चलाने में दिक्कत आ रही है या चेहरे देखने में उलझन हो रही है. डायबिटिक रेटिनोपैथी के बाद के चरणों में, खून की नसों से आंखों में कांच के तरल पदार्थ जैसा रिसाव होता है. इस वजह से धुंधली आकृतियां दिखने लगती हैं और आंखों पर काले धब्बे8 पड़ने लगते हैं. परेशानी यह है कि वे अपने आप ठीक8 हो जाते हैं और उनसे कोई गंभीर समस्या नहीं होती. इसलिए, अगर आप किसी की देखभाल कर रहे हैं और वह आपको इस समस्या के बारे में बताए, इसकी संभावना कम ही है. इसके लिए सबसे सही उपाय है कि मरीज़ को इस बात पर खास ध्यान देने के लिए कहा जाए, ताकि जब उन्हें ऐसी कोई परेशानी हो तो वे इसके बारे में आपको ज़रूर बताएं!

अंधेपन की मुख्य वजह
मधुमेह के मरीज़ों को आंखों से जुड़ी परेशानियों में होने वाली सबसे ज़ोखिम भरी समस्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी. डायबिटिक रेटिनोपैथी को और बीमारियों की तुलना में संभावित रूप से रोका जा सकता है और इसका इलाज किया जा सकता है. इसके बावजूद ज़्यादातर देशों में इसे कामकाजी उम्र की आबादी में अंधेपन की मुख्य वजह माना जाता है, जिस वजह से व्यक्तिगत और सामाजिक आर्थिक तौर पर कई गंभीर समस्याएं होती हैं.

हालांकि, जो बात इसे और भी दुखद बनाती है, वह यह है कि डायबिटिक रेटिनोपैथी को रोका जा सकता है! यूके जैसे देशों में, जहां आंखों की जांच की नीति पेश की गई थी, वहां अब डायबिटिक रेटिनोपैथी की वजह से कामकाजी आबादी में अंधेपन के आंकड़े बहुत कम हुए हैं. खासतौर पर वेल्स में यह देखा गया कि सिर्फ़ 8 सालों1 में आंखों की परेशानियों और अंधेपन की घटनाओं में 40-50% की कमी आई.

शुरुआती दौर में इसके लक्षण पता नहीं चलते 
इससे क्या साबित होता है? आसान और नियमित तौर पर की जाने वाली दर्द रहित नेत्र जांच से मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी को रोक सकता है! हालांकि, यह जांच नेत्र चिकित्सक से ही कराई जाए, किसी चश्मे की दुकान पर नहीं! शुरुआती दौर में इसके लक्षण पता नहीं चलते. इसका मतलब अगर इसे शुरुआत में ही पहचान लिया जाए तो आंखों को कोई नुकसान नहीं होता है. इतना ही नहीं, अगर मरीज़ अपने डॉक्टर के कहे मुताबिक चले तो इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.

इसलिए नेटवर्क18 ने नोवार्टिस के सहयोग से Netra Suraksha’ – इंडिया अगेंस्ट डायबिटीज़  की पहल की है. इससे उन लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जा सकती है जो डायबिटिक रेटिनोपैथी से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इसके तहत चिकित्सा के विशेषज्ञों और नीति बनाने वाले बेहतरीन लोगों को एक साथ लाया गया, जिन्होंने उन तरीकों के बारे में बताया जो भारत के लिए सबसे असरदार साबित होंगे. इस पहल का मकसद गोलमेज़ चर्चाओं, जानकारी वाले वीडियो, और लेख की मदद से मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी है. आपको यह सभी जानकारी, News18.com पर Netra Suraksha पहल  के पेज पर मिल सकती है.

देखभाल करने वाले संभावित व्यक्ति के तौर पर हमारी यह ज़िम्मेदारी भी है कि हम अपने भी स्वास्थ्य का ख्याल रखें. हमारा सुझाव है कि हर कोई हमारा ऑनलाइन डायबिटिक रेटिनोपैथी सेल्फ चेक अप  करे, ताकि वह अपने और अपने प्रियजनों के ज़ोखिम का आकलन कर सके. इसके बाद हमारी सलाह है कि आप नियमित तौर पर सालाना नेत्र जांच कराएं. इस जांच को अपने स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य जांचों के साथ जोड़ लें, जैसे कि खून की जांच और अन्य ज़रूरी जांचें. आखिरकार, क्या कोई ऐसा चाह सकता है कि उसे किसी ऐसी बीमारी के बारे में जल्दी पता चलने के बजाय देर में पता लगे? इसलिए, इंतज़ार न करें.

संदर्भ : 

Tags: Eyes, Health, Health News, Health updates

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