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Cash Management: सेलरी वालों के लिए कैश को मैनेज करना बेहद जरूरी, जानिए सबसे कारगर तरीके

 Cash Management सीखना एक जरूरी है.

Cash Management सीखना एक जरूरी है.

आपको नकद प्रबंधन (cash management) सीखना होगा. यह एक ऐसी कला है जिसमें एक बार महारत हासिल करने के बाद यह आपको मीलों तक ले जाएगी. तो आइए जानते हैं इस नकद प्रबंधन के सुनहरे नियम क्या हैं.

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    Cash Management: ‘पैसे को अपना जीवन न चलाने दें, पैसे को अपने जीवन को बेहतर ढंग से चलाने में मदद करने दें.’ Financial और marketing expert John Rampton की ये बात लगभग हर सेलरीड पर्सन पर लागू होती है.

    एक वेतनभोगी व्यक्ति (salaried person) अपने महीने के खर्चे के लिए महीने की सेलरी पर निर्भर रहता है. हम हर महीने मिलने वाले वेतन के आधार पर अपने जीवन का बजट बनाते हैं. हालांकि, ऐसा नहीं होना चाहिए. यदि आप समझदारी से अपने cash inflows and outflows की योजना बनाएंगे तो इस तरह की समस्याओं का आपको सामना नहीं करना पड़ेगा.

    लेकिन ऐसा होने के लिए, आपको नकद प्रबंधन (cash management) सीखना होगा. यह एक ऐसी कला है जिसमें एक बार महारत हासिल करने के बाद यह आपको मीलों तक ले जाएगी. तो, आइए जानते हैं इस नकद प्रबंधन के सुनहरे नियम क्या हैं.

    1) Budgeting- अपने कैश फ्लो को मैनेज करने की दिशा में पहला कदम बजट बनाना है यानी कैश फ्लो प्लान. आपको अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति पर विचार करना चाहिए और फिर अपने सभी खर्चों को अलग-अलग मद में बांटना चाहिए. जैसे- मनोरंजन, शिक्षा और अन्य खर्चे. इससे आपको अपने खर्च की प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी. एक बजट अक्सर रोड मैप के रूप में कार्य करता है और स्वस्थ नकदी प्रवाह प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है.

    यह भी पढ़ें- क्या आपका भी Aadhar-Pan Card लिंक नहीं है, जानिए कुछ मिनटों में कैसे लिंक करें? 

    2) Check the flow of your money – क्रेडिट बनाम डेबिट. यह इस बात का माप है कि आपके पास क्या है बनाम क्या बकाया है. यह तरीका आपको अपनी आय और व्यय के बीच एक संबंध विकसित करने में मदद करेगा. इससे आपको एसेट निर्माण और देनदारियों को कम करने में मदद मिलेगी.

    3) Set Ambitious but realistic goals-
    अपने कैश फ्लो की योजना बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात जो आपको करनी चाहिए वह है लक्ष्य निर्धारित करना. टारगेट सेट करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप जहां होना चाहते हैं उसे लिख लें. हमेशा ऐसे लक्ष्य निर्धारित करें जो निरंतर प्रदर्शन की मांग करें. अपनी प्रगति की समय पर जांच करते रहें. लक्ष्य निर्धारित करने से पहले आपको निम्नलिखित कारकों पर विचार करना चाहिए.

    • उम्र ( Age)
    • स्वास्थ्य (Health)
    • आय – (Income)
    • अल्पकालिक दायित्व – (Short term obligations)
    • दीर्घकालिक दायित्व – (Long term obligations)
    • कोई अन्य वित्तीय प्रतिबद्धताएं – (Any other financial commitments)

    एक बार जब आप लक्ष्यों की एक सूची के लिए प्रतिबद्ध हो जाते हैं, तो आपको अपनी पैसे की आदतों को बदलने के लिए एक मजबूत प्रेरणा मिलेगी.

    4) Manage your surplus – अच्छे कैश फ्लो मैनेजमेंट का मतलब है कि आपकी अगली सैलरी क्रेडिट होने से पहले ही आपके पास सरप्लस पैसा बचा है. आपको न केवल नकदी प्रवाह का प्रबंधन करना चाहिए बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आप इस बचे पैसे को कहीं निवेश कर रहे हैं. अपने पैसे का उपयोग करें, यह मत भूलिए अतिरिक्त आय केक पर एक चेरी की तरह है जिसे हम सभी पसंद करते हैं.

    5) Structure your monthly expenses around the payday- आपको अपना वेतन प्राप्त करने के बाद दूसरे दिन फिक्स खर्चों की लिस्ट बनानी चाहिए. जैसे किराया, नौकरानी, ​​मासिक किराने का सामान. यह आपको उस पैसे से योजना बनाने में मदद करेगा जिसे या तो बचाया जा सकता है या निवेश किया जा सकता है या मंनोरंजन पर खर्च किया जा सकता है.

    6) Track your expenses- आपको अपने खर्चों पर नजर रखने की जरूरत है. कभी-कभी छोटी खरीदारी जल्दी जुड़ जाती है जिससे यह बड़ी रकम बन जाती है. ऐसी संभावना है कि कोई अज्ञात आपात स्थिति आ जाए जो आपके खर्चों का एक बड़ा हिस्सा खा जाए.

    यदि आप समय पर खर्चों को ट्रैक और नोट नहीं करते हैं तो आप अक्सर अपने बजट से अधिक खर्च करते हैं। हमेशा अपने खर्चों को वर्गीकृत करें और विश्लेषण करें कि खर्च को नियंत्रित करना कहां मुश्किल है. आप अपने फोन में कोई भी एप्लिकेशन इंस्टॉल करके खर्चों को ट्रैक भी कर सकते हैं.

    7) Commitment to new expenses- आपको कोई भी नया और अनावश्यक खर्च नहीं करना चाहिए, भले ही आपका वेतन आपको इसके लिए योग्य बनाता हो. कुछ लोग वास्तविक आवश्यकता के बिना अनावश्यक ऋण लेते पाए जाते हैं. आप अपने वेतन के कारण कर्ज को उचित ठहराते हैं. एक वित्तीय संस्थान केवल आपके वेतन और क्रेडिट रिपोर्ट को ध्यान में रखता है. आप इसका भुगतान कर सकते हैं या नहीं, यह आपके बजट के आधार पर आप पर निर्भर है. इसलिए जब तक आवश्यक न हो आपको किसी भी मासिक खर्च के लिए साइन अप नहीं करना चाहिए.

     8) Limit the credit card use-  जब हमारे पास पैसे खत्म हो जाते हैं तो हम आसानी से क्रेडिट कार्ड पर स्विच कर लेते हैं. यह समझना आवश्यक है कि क्या हमें वास्तव में क्रेडिट कार्ड और उसकी सेवा से जुड़े ब्याज का भुगतान करने की आवश्यकता है? उन चीजों को खरीदने की आवश्यकता का मूल्यांकन करें जो अगले वेतन की प्रतीक्षा कर सकें. बहुत जरूरत पड़ने पर ही क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे आपको अनावश्यक खर्चों से बचने में मदद मिलेगी.

    9) It’s a process- जैसे रोम एक दिन में नहीं बना था, वैसे ही कैश मैनेजमेंट जैसी चीजें सीखने और इस तरह की आदत विकसित करने में टाइम लगता है. कैश मैनेजमेंट सीखना एक प्रक्रिया (process) है और यह धीरे-धीरे ट्रैक पर आ जाएगा. स्वस्थ वित्तीय आदतों का विकास करें. ये आदतें आपको अपने नकदी प्रवाह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करेंगी.

    10) Make the most out of your money- अपने पैसे का बुद्धिमानी से उपयोग करने का प्रयास करें. आप छूट, कूपन, बिक्री और ऑफर जैसे विकल्पों का पता लगा सकते हैं जिनका उपयोग खरीदारी करते समय किया जाना चाहिए. आपके पैसे पर अधिकतम रिटर्न आपका आदर्श वाक्य होना चाहिए.

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