'लोगों के खाते में पैसे डालने से नहीं सुधरेंगे हालात, रोजगार बढ़ाने को एमएसएमई की कर रहे मदद'

'लोगों के खाते में पैसे डालने से नहीं सुधरेंगे हालात, रोजगार बढ़ाने को एमएसएमई की कर रहे मदद'
मुख्‍य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्‍यम ने कहा कि मौजूदा हालात में अर्थव्‍यवस्‍था को सहारा देने के लिए कैश ट्रांसफर जैसी योजना नाकाफी होगी. इससे हालात नहीं सुधरेंगे.

देश के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम (CEA KV Subramanian) ने CNN NEWS18 से खास बताचीत के दौरान भरोसा जताया कि देश की रेटिंग (Rating) फिर सुधर जाएगी. उन्‍होंने कहा कि अभी हम अपने कर्ज लौटाने में पूरी तरह से सक्षम हैं.

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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से दुनिया की मजबूत से मजबूत अर्थव्‍यवस्‍थाओं (Economies) की हालात खराब हो गई है. ऐसे में देश के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्‍यम (CEA KV Subramanian) का आत्‍मविश्‍वास चौंकाने वाला है. उनका कहना है कि भारत बाकी देशों से बहुत अलग है. सुब्रमण्‍यम ने CNN NEWS18 से खास बातचीत में भरोसा जताया कि हम अपनी रेटिंग फिर हासिल कर लेंगे क्‍योंकि अभी हम अपने कर्ज लौटाने में 100 फीसदी सक्षम हैं. बता दें कि दुनियाभर की रेटिंग एजेंसीज (Rating Agencies) ने भारत ही नहीं 30 से ज्‍यादा देशों की रेटिंग घटाई है.

सीईए सुब्रमण्‍यम ने कहा कि वैश्विक महामारी (Pandemic) के कारण पिछली तिमाही में आर्थिक वृद्धि (Growth) पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ा था. इससे निपटने की हरसंभव कोशिश की गई, लेकिन सब बेअसर रहा और अर्थव्‍यवस्‍था को कोई फायदा नहीं मिल पाया. वैश्विक महामारी के कारण फरवरी से ही खपत (Consumption) और निवेश (Investment) घटना शुरू हो गया था.

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कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के तमाम नेता बार-बार कह रहे हैं कि लोगों के खाते में सीधे पैसे डालकर मदद की जानी चाहिए. उनका कहना है कि इससे अर्थव्‍यवस्‍था भी पटरी पर लौट आएगी. वैसे भी अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने के लिए उपभोग बढ़ाना जरूरी है. जब सुब्रमण्‍यम से खपत बढ़ाने के लिए आम उपभोक्‍ता के खाते में पैसे डालने (Cash Transfer) के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि इससे बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. मौजूदा हालात में अर्थव्‍यवस्‍था को सहारा देने के लिए कैश ट्रांसफर जैसी योजना नाकाफी होगी. इससे हालात नहीं सुधरेंगे. इसलिए हम सूक्ष्‍म, लघु व मझोलो उद्योगों (MSMEs) को सहारा देने पर ध्‍यान दे रहे हैं. इससे रोजगार के (Employment) नए अवसर पैदा होंगे.



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मुख्‍य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि मांग के बारीक पहलू को ध्यान में रखना जरूरी है क्‍योंकि रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की मांग को बनाए रखने के लिए उठाए गए एहतियाती कदम फिलहाल जारी रहेंगे. ये ध्‍यान रखा जाना भी जरूरी है कि वैश्विक महामारी के कारण पैदा हुई अनिश्चितता के कारण ही पिछली तिमाही में आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ा था. आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में हमने सुस्‍ती का बारीकी से विश्‍लेषण किया था. इससे साफ हुआ कि आर्थिक सुस्‍ती का मुख्‍य कारण बैंकिंग सेक्‍टर के बैड लोन्‍स (Bad Loans) हैं.

सुब्रमण्‍यम ने कहा कि अगर वित्‍त वर्ष की दूसरी छमाही से रिकवरी होनी शुरू हो जाए तो हालात उतने खराब नहीं रहेंगे, जितने दिख रहे हैं या अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि, अगर रिकवरी अगले साल से होनी शुरू हुई तो वास्‍तव में हमारा सामना आर्थिक सुस्‍ती के हालात से होगा. वहीं, इस वित्‍त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को लेकर फिलहाल काफी अनिश्‍चितता है. अभी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है. इसके लिए हमें दूसरी छमाही के नतीजों का इंतजार करना होगा. आर्थक वृद्धि की दर दूसरी छमाही में आर्थिक विकास में उछाल आने या नहीं आने पर निर्भर करेगी.

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First published: June 6, 2020, 1:31 PM IST
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