CBDT ने बढ़ाया वित्‍तीय लेनदेन का दायरा! अब शेयर-म्‍यूचुअल फंड बेचकर मिले मुनाफे की देनी ही होगी जानकारी

अब कैपिटल गेन की जानकारी इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को देनी ही होगी.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने स्पेसिफाइड फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFTs) का दायरा बढ़ा दिया है. अब कैपिटल गेन, डिविडेंड और सेविंग्स पर मिले ब्याज की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) को देनी होगी.

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    नई दिल्‍ली. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने स्पेसिफाइड फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFTs) का दायरा बढ़ा दिया है. सीबीडीटी ने कहा कि अब शेयर और म्यूचुअल फंड्स को बेचने से मिला मुनाफा (Capitals Gains) के साथ कंपनियों के इक्विटी शेयर (Equity Shares) पर मिला डिविडेंड और बचत पर मिले ब्याज को एसएफटी में शामिल कर दिया गया है. अब इनकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग (IT Department) को देनी होगी. सीबीडीटी ने सर्कुलर में कहा है कि बैंक, म्यूचुअल फंड्स हाउस, रजिस्ट्रार, बॉन्ड इश्यू करने वाली कंपनियों और संस्थाओं के साथ दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को एक वित्त वर्ष में निश्चित सीमा से अधिक के ट्रांजैक्शंस की जानकारी टैक्स विभाग को देनी होगी.

    प्री-फील्ड आईटीआर फॉर्म जेनरेट करने में मिलेगी मदद
    सीबीडीटी के इस फैसले के बाद अब स्टॉक एक्सचेंज, कंपनियों, म्यूचुअल फंड्स हाउस, रजिस्ट्रार, बॉन्ड इश्यू करने वाली कंपनियों, बैंकों और पोस्टऑफिस को इसकी जानकारी टैक्स डिपार्टमेंट को देनी ही होगी. अगर आपने म्यूचुअल फंड बेचकर मुनाफा कमाया है तो आपका म्यूचुअल फंड हाउस सीबीडीटी को इसकी जानकारी देगा. यह कदम टैक्स चोरी (Tax Evasion) रोकने के लिए उठाया गया है. दिल्ली बेस्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट तरुण कुमार ने मनीकंट्रोल से कहा कि इससे इनकम टैक्स विभाग को प्री-फील्ड आईटीआर फॉर्म (Pre-Filled ITR Forms) जेनरेट करने में भी काफी मदद मिलेगी.

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    बोनस में मिले इक्विटी शेयर पर नहीं लगता है कोई टैक्स
    कंपनियां कई बार शेयरधारकों को नकद बोनस के बजाए इक्विटी के रूप में बोनस का भुगतान करती हैं. इनकम टैक्स नकद बोनस पर टैक्स वसूलता है, लेकिन शेयर के तौर पर मिले बोनस पर टैक्स नहीं लगता है. कंपनियां कई बार पूंजी की कमी होने या बाजार में अपनी साख बढ़ाने के लिए बोनस शेयर जारी करती हैं. अगर कंपनी के पास शेयरधारकों को नकद बोनस देने के लिए राशि नहीं है तो वे इक्विटी के रूप में बोनस दे सकती हैं. अगर इस शेयर को एक साल के भीतर बेचा जाता है तो मुनाफे पर 15 फीसदी की दर से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. वहीं, एक साल के बाद बेचने पर 10 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा.

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