नए साल में कंपनियों ने अगर दिखाए भ्रामक विज्ञापन तो अब मोदी सरकार कसेगी इस कानून से शिकंजा

प्रधानमंत्री ने शनिवार को कोविड-19 के खिलाफ विश्‍व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत की. (फाइल फोटो)

कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के दौरान भ्रामक विज्ञापनों (Misleading Advertisements) के माध्यम से उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली कई कंपनियों को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने नोटिस भेजना शुरू कर दिया है. उपभोक्ता मामले के मंत्रालय की मानें तो अब तक कई कंपनियों को भ्रामक विज्ञापन को लेकर नोटिस भेजा जा चुका है.

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नई दिल्ली. देश में नए उपभोक्ता कानून 2019 लागू (Consumer Protection Act 2019) हुए एक साल भी नहीं हुए हैं, पर इसका असर अभी से दिखना शुरू हो गया है. कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के दौरान भ्रामक विज्ञापनों (Misleading Advertisements) के माध्यम से उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली कई कंपनियों को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने नोटिस भेजना शुरू कर दिया है. उपभोक्ता मामले के मंत्रालय की मानें तो अब तक कई कंपनियों को भ्रामक विज्ञापन को लेकर नोटिस भेजा जा चुका है. उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने इन कंपनियों को जवाब देने के लिए एक निश्चित वक्त भी दिया है.

नए कानून का इस तरह दिख रहा है असर
कुछ दिन पहले ही केरल की एक कंज्यूमर कोर्ट ने हेयर क्रीम प्रोडक्ट (Hair Cream Product) के विज्ञापन में गलत दावा करने को लेकर एक फिल्म एक्टर को जिम्मेदार ठहराया था. फिल्म एक्टर ने इस हेयर प्रोडक्ट के असर के बारे में जाने बिना ही एंडॉर्स कर रहे थे. त्रिसूर के 'जिला उपभोक्ता फोरम' ने 'Dhathri Hair cream' बनाने वाली कंपनी और फिल्म एक्टर अनूप मेन (Anoop Menon) पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था.

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कुछ दिन पहले ही केरल की एक कंज्यूमर कोर्ट ने हेयर क्रीम प्रोडक्ट के विज्ञापन में गलत दावा करने को लेकर जुर्माना किया था.(फाइल फोटो)


इस कंपनी और एक्टर को भरना पड़ा जुर्माना
शिकायत करने वाा शख्स वडक्कन ने बताया, 'पहली बार इस हेयर क्रीम को जनवरी 2012 में 376 रुपये में खरीदा था. इस हेयर क्रीम को उन्होंने एक विज्ञापन देखने के बाद खरीदा था, जिसमें अनूप मेनन प्रॉमिस करते हैं कि अगर इस प्रोडक्ट को 6 सप्ताह तक इस्तेमाल किया जाता है तो हेयर ग्रोथ देखने को मिलेगा. लेकिन, यह क्रीम इस्तेमाल करने के बाद भी उन्हें कोई लाभ नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने फोरम में शिकायत दर्ज करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी.'



इस तरह हो रही मॉनिटरिंग
केंद्र सरकार पिछले साल 20 जुलाई को ग्राहकों को पहले से और भी मजबूत बनाने और ज्यादा अधिकार देने के लिए 34 साल बाद नया कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 लेकर आई थी. यह कानून देश में पुराने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का जगह लिया है. अब इस कनून के जरिए प्रिंट (Print), टीवी (TV) और डिजिटल मीडिया (Digital Media) पर प्रसारित होने वाले भ्रामक विज्ञापनों की मॉनिटरिंग की जा रही है. देश में विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था एडवटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) इसकी जांच कर रही है.

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इस कानून के आने के बाद उपभोक्ता विवादों को समय पर, प्रभावी और त्वरित गति से निपटारा किया जा सकेगा. नए कानून के तहत उपभोक्ता अदालतों के साथ-साथ एक केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) बनाया गया है. इस प्राधिकरण का गठन उपभोक्ता के हितों की रक्षा कठोरता से हो इसके लिए की गई है. नए कानून में उपभोक्ता किसी भी सामान को खरीदने से पहले भी उस सामान की गुणवत्ता की शिकायत सीसीपीए में कर सकती है.

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