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GDP दर पर CEA केवी सुब्रमण्यम का बयान, तीसरी तिमाही में ग्रोथ में आएगी तेजी

News18Hindi
Updated: November 29, 2019, 7:51 PM IST
GDP दर पर CEA केवी सुब्रमण्यम का बयान, तीसरी तिमाही में ग्रोथ में आएगी तेजी
मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यम

जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी दर (GDP Growth Rate) 4.5 फीसदी के स्तर पर फिसलने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम (KV Subramanian) ने कहा कि अर्थव्यवस्था का बुनियादी ढांचा अभी भी मजबूत है. हमें उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में ग्रोथ में तेजी आएगी.

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  • Last Updated: November 29, 2019, 7:51 PM IST
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नई दिल्ली. आर्थिक ग्रोथ दर (Economic Growth Rate) बीते 6 साल के न्यूनतम स्तर पर फिसल चुका है. जुलाई-सितंबर माह में GDP ग्रोथ रेट 4.5 फीसदी के स्तर पर रही. वहीं, इस दौरान ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) भी घटकर 4.3 फीसदी के स्तर पर आ गया है. जीडीपी आंकड़ों को लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम (CEA KV Subramanian) ने कहा कि हमारा मानना है कि अर्थव्यवस्था का बुनियादी ढांचा अभी भी मजबूत है. हमें उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में ग्रोथ में तेजी आएगी.

इस दौरान उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में निवेश और वृद्धि की गति बढ़ाने के लिए कंपनी कर में कटौती की आवश्यकता थी. उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में वृद्धि को गति देनेवाला अनुकूल साइकिल पिछली कुछ तिमाहियों से अपेक्षित ढंग से नहीं चल पा रहा है.



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बुनियादी सुधारों की गति बढ़ानी होगी
केवी सुब्रमण्यम ने राजधानी में स्कॉच के कार्यक्रम ‘भारत आर्थिक मंच’ में कहा कि यदि भारत को 2024- 25 तक पांच हजार अरब डॉलर और 2030 तक दस हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है तो बुनियादी सुधारों की गति बढ़ानी होगी. उन्होंने इसके साथ ही निवेशकों से इस दिशा में सरकार द्वारा हाल में उठाये गए तमाम उपायों की व्याख्या की.

खपत बढ़ने से निवेश में फायदा मिलेगा
केवी सुब्रमण्यम ने कहा कि जुलाई में जारी किये गये सर्वेक्षण में भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक रणनीतिक कदमों की जानकारी दी गई है. इसमें निवेश को प्रमुख उपाय माना गया है. इसके साथ ही खपत बढ़ाने पर भी इसमें जोर दिया गया है. खपत बढ़ने से निवेश के इसके गुणात्मक प्रभाव होंगे.

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कंपनियों का निवेश बढ़ने से होगा फायदा
उन्होंने कहा, ‘‘अर्थव्यवस्था में उत्पादकता बढ़ाने के लिए निवेश महत्वपूर्ण है. उत्पादकता बढ़ने से अंतत: वेतन बढ़ता है, रोजगार सृजन होता है, निर्यात बढ़ता है और इन सबके मिलने से उपभोक्ता की खरीद शक्ति बढ़ती है और इसी मांग की जरूरत अर्थव्यवस्था को है.’’ केवी सुब्रमण्यम ने कहा, ‘‘कंपनियां मांग बढ़ने की उम्मीद में निवेश बढ़ाती हैं और उससे वृद्धि के अनुकूल चक्र बढ़ता है. पिछली कुछ तिमाहियों से यह चक्र उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहा है जितना यह सात प्रतिशत से अधिक आर्थिक वृद्धि के समय बढ़ रहा था. देश में नया निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र में उतरने वाली कंपनियों से 15 प्रतिशत की दर से ही कर लिया जाएगा.''

(भाषा इनपुट के साथ)

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First published: November 29, 2019, 7:23 PM IST
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