CEA सुब्रमनियन का बड़ा बयान कहा- वे रामायण के जामवंत पात्र की भूमिका निभाना चाहते है, जानिए क्यों?

कृष्णामूर्ति सुब्रमनियन का बड़ा बयान कहा- वे जामवंत की भूमिका निभाना चाहते हैं
कृष्णामूर्ति सुब्रमनियन का बड़ा बयान कहा- वे जामवंत की भूमिका निभाना चाहते हैं

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णामूर्ति सुब्रमनियन ने कहा कि मौजूदा देश के आर्थिक हालात रूपी रामायण के जामवंत की भूमिका निभाना चाहते है. वे जामवंत बन कर फाइनेंशियल सेक्टर के हनुमान रुपी ताकत को जगाना चाहते है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 2:29 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना संकट और लॉकडाउन ने देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ को नेगेटिव जोन (Indian Economy in negative zone) में पहुंचा दिया है. लेकिन अच्छी बात यह है कि देश की आर्थिक विकास अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है. केंद्र की मोदी सरकार के सामने असल चुनौती आर्थिक विकास के साथ-साथ अधिक से अधिक रोजगार के मौका पैदा करना है. 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ना सिर्फ तेज दौड़ लगानी होगी बल्कि लंबी-लंबी छलांगें लगाने की तैयारी करनी होगी. जीडीपी ग्रोथ 8 से 10 फीसदी हासिल करनी होगी. इन तमाम लक्ष्यों को हासिल करने में मोदी सरकार और उनकी पूरी टीम जी-जान से लगी है. इसी टीम का अहम हिस्सा है वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णामूर्ति सुब्रमनियन.

सीईए ने कहा कि वे बनना चाहते है जामवंत
उद्योग समूह फिक्की के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णामूर्ति सुब्रमनियन ने कहा कि मौजूदा देश के आर्थिक हालात रूपी रामायण के जामवंत की भूमिका निभाना चाहते है. वे जामवंत बन कर फाइनेंशियल सेक्टर के हनुमान रुपी ताकत को जगाना चाहते है. सर्वविदित है कि जब हनुमान, प्रभू श्रीराम का संदेश लेकर लंका जाने वाले थे तो उन्हे उनकी शक्ति के बारे में जामवंत ने याद दिलाया था. हनुमान अपनी शक्ति के बारे में एक ऋषि के श्राप के कारण अपनी ताकत और क्षमता के बारे में भूल चुके थे. हनुमान ने जामवंत को याद दिलाते हुए कहा था कि राम काज लगि तब अवतारा सुनतहि भयउ पर्वताकार. शक्ति का भान होते ही हनुमान लंका में प्रवेश कर पाये थे और भगवान राम के काम को सफलता से पूरा भी किया था. ठीक इसी तरह आज के फाइनेंसियल सेक्टर की ताकत काफी बड़ी है उन्हें उनकी ताकत और क्षमताओं को याद दिलाना होगा.

भारतीय फाइनेंसियल सेक्टर भारतीय क्रिकेट टीम के 20-20 टीम की तरह है
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने देश के फाइनेन्सियल सेक्टर को इंडियन क्रिकेट के 20-20 टीम की तरह पर्फोम करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि हमने देखा है कई अनुभवी और दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी जो टेस्ट या वन डे में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे वे ट्वेंटी-20 में बेहतरीन प्रदर्शन किया. लिहाजा फाइनेंसियल सेक्टर में काफी पोटेंशियल है. सुब्रमनियन ने  कहा कि जीडीपी में क्रेडिट ग्रोथ का योगदान काफी कम है,इसमें काफी बड़ी संभावनाएं मौजूद है.





फाइनेंनसियल सेक्टर द्वारा अनाप-शनाप लोन बांटने की वजह से भी पैदा हुआ आर्थिक संकट
फाइनेन्सियल सेक्टर आर्थिक विकास का ग्रोथ इंजन बन सकता है. कोविड 19 संकट के दौरान भी एनबीएफसी ने उल्लेखनीय भूमिका निभाया. अच्छी बात यह है कि बुरा दौर खत्म हो चुका है. सीईए ने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें जोम्बी लेंडिंग( Zombie Landing) से बचना चाहिए. लोन देते समय आवेदनकर्ता के लोन रिपेमेंट क्षमताओं और लोन रकम के इस्तेमाल से संबंधित तमाम पहलुओं पर भी गौर करना चाहिए. उन्होंने कहा कि साल 2009 के वैश्विक मंदी के दौरान भी ऐसी ही स्थिति पैदा हुई थी जिसका खामियाजा 2013-14 तक भी देखने को मिला और आज तक उन कदमों की वजह से संघर्ष करना पड़ रहा है. अनाप-शनाप लोन बांटने की वजह से आज तक इकॉनोमी को सफर करना पड़ रहा है. फाइनेंसियल इंस्टिट्यूशन्स को लेंडिंग के दौरान डेटा,आर्टिफिशियल इंटेलिजेेंस और तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए. एनबीएफसी को जोखिम और परस्पर जोखिमों की निगरानी भी करने की जरूरत है.
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