प्राइवेट कंपनियों का 'पापा बचाओ' के माइंडसेट से बाहर आना जरूरी: चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर

प्राइवेट कंपनियों का 'पापा बचाओ' के माइंडसेट से बाहर आना जरूरी: चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर
कंपनियों का 'पापा बचाओ' के माइंडसेट से बाहर आना जरूरी:CEA

बुधवार को हुए एक इवेंट में मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणियन ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर को सरकार से मदद मांगने की बजाय अपने पैरों पर खड़ा होना सीखना चाहिए. उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपना माइंडसेट बदलने की जरूरत है.

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इकॉनोमिक स्लोडाउन (Economic Slowdown) की वजह से प्राइवेट कंपनियों (Private Company) को भारी नुकसान हो रहा है. इस वजह से कंपनियां सरकार से राहत पैकेज देने की डिमांड कर रही हैं. बुधवार को हुए एक इवेंट में मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) कृष्णमूर्ति सुब्रमणियन (K Subramanian) ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर को सरकार से मदद मांगने की बजाय अपने पैरों पर खड़ा होना सीखना चाहिए. उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपना माइंडसेट बदलने की जरूरत है. वे मुनाफा अपने पास रखते हैं. घाटा सबमें में बांट देते हैं और मुश्किल वक्त में राहत पैकेज की डिमांड करते हैं.

उन्होंने कहा कि सरकारी मदद ऐसे समय में की जा सकती है जब कोई सेक्टर बढ़ रहा हो. सुब्रमण्यम ने समझाते हुए कहा, मैं कहूंगा कि इंडिया में प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) की शुरुआत 1991 से हुई. इस हिसाब से यह सेक्टर 30 साल का है. 30 साल के इस सेक्टर के लिए अब वक्त है कि वह कहे कि वह अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है. मुझे पापा के पास जाने की जरूरत नहीं है.

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उन्होंने कहा, हमें आगे बढ़ने की जरूरत है. अब हम मार्केट इकोनॉमी हैं. इस तरह की इकोनॉमी में अगर कोई एसेट संभाल नहीं सकता तो उसे किसी दूसरे को दे दिया जाता है. इस साल इकोनॉमी सर्वे में भी सुब्रमण्यम ने सलाह दी थी कि सरकार को कंपनियों को इंसेंटिव नहीं देना चाहिए. ऐसा होने पर वे हमेशा स्टार्टअप ही रह जाते हैं.
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