केंद्र का GST Compensation पर यू-टर्न, 1.1 लाख करोड़ रुपये कर्ज लेकर राज्यों को देगी सरकार

केंद्र सरकार ने कर्ज लेकर जीएसटी कंपनसेशन देने का फैसला किया.
केंद्र सरकार ने कर्ज लेकर जीएसटी कंपनसेशन देने का फैसला किया.

केंद्र सरकार (Central Govt) पहले से ही राज्य सरकारों से कर्ज लेने की बात कह रही थी. लेकिन राज्य सरकारों ने जीएसटी काउंसिल (GST Council) की बैठक में कर्ज लेने से मना कर दिया. जिसके बाद केंद्र सरकार ने खुद ही कर्ज (loan) लेकर राज्य सरकारों को लोन के रुप में राशि मुहैया कराई है. इस फैसले से राज्य सरकारों को केवल कम ब्याज पर कर्ज (Loan at low interest) मिल रहा है.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने GST Compensation पर यू-टर्न लेते हुए खुद ही 1.1 करोड़ रुपये का कर्ज लेने और राज्यों को लोन के रुप में देने का फैसला किया है. जानकार सरकार के इस कदम को स्मार्ट कैलकुलेशन बता रहे है. दरअसल सरकार के इस लोन से राजकोषीय घाटे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और इस राशि को राज्य सरकारों की पूंजीगत प्राप्ति के रुप में दिखाया जाएगा. वहीं दूसरी और केंद्र सरकार के इस फैसले से उसका राज्यों से जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर टकराव भी कम होगा. इससे पहले सोमवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई थी. जिसमें केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से खुद लोन लेने का सुझाव दिया था. जिसकों राज्य सरकारों ने नकार दिया. वहीं राज्य सरकरों ने इस मामलें को कोर्ट में उठाने की बात कही. जिसकें बाद केंद्र सरकार ने खुद ही कर्ज लेकर राज्यों को राशि उपलब्ध कराने का फैसला किया.

राज्य सरकारों ने किया केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत- राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. आपकों बता दें केंद्र सरकार को सभी राज्य सरकारों कुल 2.35 लाख करोड़ रुपये का GST Compensation देना है, लेकिन फिलहाल केंद्र सरकार ने केवल 1.1 लाख करोड़ रुपये कर्ज लेकर अदा करने की बात कही हैं. जिससे कुछ राज्य सरकार नाराज है. केरल के वित्त मंत्री ने कहा है कि, जब केंद्र सरकार लोन ले ही रही है और राजकोषीय घाटे पर कोई असर नहीं पड़ रहा तो केंद्र सरकार को GST Compensation की पूरी रकम अदा करनी चाहिए.

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स्मार्ट कैलकुलेशन से जीती सरकार- केंद्र सरकार पहले से ही राज्य सरकारों से कर्ज लेने की बात कह रही थी. लेकिन राज्य सरकारों ने जीएसटी काउंसिल की बैठक में कर्ज लेने से मना कर दिया. जिसके बाद केंद्र सरकार ने खुद ही कर्ज लेकर राज्य सरकारों को लोन के रुप में राशि मुहैया कराई है. इस फैसले से राज्य सरकारों को केवल कम ब्याज पर कर्ज मिल रहा है. क्योंकि राज्य सरकारों के मुकाबले केंद्र सरकार को कम रेट पर लोन मिलता है. वहीं इस केंद्र सरकार को इस कर्ज से राजकोषीय घाटा भी नहीं हो रहा. क्योंकि केंद्र सरकार इस राशि को राज्य सरकारों पर बकाया राशि के तौर पर दिखा सकता है.
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फंड जुटाने के लिए टाइमटेबल जारी- केंद्र सरकार की ओर से जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए बाजार से 1.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने की घोषणा के साथ ही एक्सट्रा फंड जुटाने के लिए टाइमटेबल जारी किया गया है. RBI के साथ विचार विमर्श करने का बाद केंद्र सरकार ने यह कैलेंडर जारी किया है. इसके तहत वित्त वर्ष 2020-21 की शेष अवधि (19 अक्टूबर 2020 से 31 मार्च 2021) के लिए भारत सरकार कुल मिलाकर 4,88,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेगी. साथ ही जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए तीन और पांच साल की अवधि के लिए 55,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जुटाई जाएगी. वित्त मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि कोविड-19 संकट के दौरान होने वाले खर्च की भरपाई के लिए सरकार वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 4.34 लाख करोड़ रुपये का कर्ज उठाएगी. अब इस इस अतिरिक्त राशि के साथ दूसरी छमाही में कुल उधार बढ़कर 5.44 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा.
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