EPFO पर सरकार का 9 हजार करोड़ रुपये बकाया: रिपोर्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर

कर्मचारी भविष्य निधि​ संगठन (EPFO) पर केंद्र सरकार के योगदान का कुल 9,115 करोड़ रुपये बकाया है. इस कुल रकम का 8,036.66 करोड़ रुपये कर्मचारी पेंशन स्कीम का है.

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    नई दिल्ली. सरकार द्वारा संचालित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) पर केंद्र सरकार का 9,115 करोड़ रुपये बकाया है. केंद्र सरकार वित्तीय दबाव की वजह से EPFO को यह रकम नहीं दे पा रही है. लाइवमिंट की एक रिपोर्ट में ये बात कही गई है. एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि ईपीएफओ का क्यूमुलेटिव एरियर (Cummulative Arrear) का यह आंकड़ा केवल मार्च तक का है. इसमें आगे भी इजाफा हुआ है. कुल बकाये में कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) पर सरकार का योगदान 8,036.66 करोड़ रुपये है. बाकी की रकम असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) में कम मेहनताने पर काम करने वालें लोगों के मिनिमम पेंशन फंड (Minimum Pension Fund) का है.

    EPFO अधिकारियों से सरकार की बातचीत
    रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले पर सरकार ने EPFO के अधिकारियों से बातचीत की है. अधिकारियों ने मामले पर सरकार के सामने चिंता जताई है. बढ़ते बकाये की वजह से ही EPFO ने अपने मेंबर्स के लिए पेंशन बढ़ाने के फैसले पर सुस्ती दिखा रहा है. EPS स्कीम के तहत, केंद्र सरकार उन पेंशन सब्सक्राइबर्स (Pension Subscribers) को 1.6 फीसदी का अतिरिक्त योगदान देती है, जिनका वेतन 15,000 रुपये से कम है. ईपीएफ एक्ट (EPF Act) के तहत, एक कर्मचारी EPF योगदान में अपनी सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा जमा करता है. इतनी ही रकम नियोक्ता भी कर्मचारी के खाते में जमा करता है. नियोक्ता के योगदान 8.33 फीसदी हिस्सा ईपीएस में जाता है और बाकी का रकम ईपीएफ रकम में जोड़ा जाता है.

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    कुल योगदान का कुछ हिस्सा ही दे पा रही है सरकार
    इस रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से ही केंद्र सरकार ने ईपीएस में अपना सालाना योगदान नहीं दिया है. हालांकि, सरकार अपने हिस्सा के एरियर का कुछ हिस्सा हर साल दे रही है. वित्त वर्ष 2018-19 में, केंद्र सरकार का ईपीएस में 5,483 करोड़ रुपये का योगदान बनता है. लेकिन, सरकार ने इस दौरान केवल 3,900 करोड़ रुपये का एरियर ही दिया है. वित्त वर्ष में 2014-15 के पहले 2005-06 और 2012-13 में भी सरकार ने अपना ईपीएस योगदान न देकर उसका केवल कुछ हिस्सा ही जमा किया था. मार्च 2014 तक सरकार पर कुल 2,882.88 करोड़ रुपये का बकाया था, जोकि अब बढ़कर तीन गुना हो गया है.

    बढ़ सकती है सरकार की परेशानी
    हालांकि, मीनिमम पेमेंट के मामले में सरकार ने अपने योगदान का अधिक पैसा दिया है ताकि उसपर कम बकाया हो. वित्त वर्ष 2016-17 तक सरकार पर कुल 1,198.63 करेाड़ रुपये का बकाया था जो कि मार्च 2019 तक घटकर 1,051 करोड़ रुपये रह गया है. बता दें कि ईपीएफओ केंद्र सरकार के एरियर योगदान पर ब्याज भी लगाता है. एक अन्य सरकारी अधिकारी के हवाले से लिखा गया है कि मौजूदा समय में पेंशन आउटगो अधिक नहीं है इसलिए इसे मैनेज करने में कोई परेशानी नहीं है. हालांकि, अगर यह बढ़ता है दिक्कतें शुरू हो सकती हैं. श्रम मंत्रालय इस मामले को लेकर वित्त मंत्रालय से लगातार संपर्क में है.

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