केंद्र ने की दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने की तैयारी, अब हाइड्रोजन मिक्स सीएनजी से चलेंगी बसें

केंद्र सरकार ने दिल्‍ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए खास ईंधन से बसें चलाने का फैसला किया है.
केंद्र सरकार ने दिल्‍ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए खास ईंधन से बसें चलाने का फैसला किया है.

केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने आज वायु प्रदूषण की समस्‍या (Air Pollution) से निपटने के लिए दिल्ली में हाइड्रोजन मिक्स सीएनजी के डिस्पेंसिंग स्टेशन और संयंत्र का उद्घाटन किया. प्रधान ने कहा कि ये पायलट प्रोजेक्ट नहीं बल्कि पूरी तरह से काम करेगा. बहुत जल्द दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में एचसीएनजी से सभी बसें (HCNG Buses) चलाई जाएंगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 8:41 PM IST
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नई दिल्‍ली. सर्दियों का मौसम (Winters) शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की हवा में फिर से सांस लेना दूभर होने लगा है. कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) खतरनाक स्तर पर बना हुआ है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रदूषण फैलने में वाहनों से निकलने वाले धुंए की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है. इसी के मद्देनजर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Government) लगातार वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है. इसी कड़ी में भारत ने आज हाइड्रोजन मिक्स सीएनजी (H-CNG) से वाहन चलाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है.

ऐसे वाहनों से निकले धुंए से कम होगा प्रदूषण
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने आज दिल्ली में हाइड्रोजन मिक्स सीएनजी के डिस्पेंसिंग स्टेशन और संयंत्र का उद्घाटन किया. प्रधान ने कहा कि ये पायलट प्रोजेक्ट नहीं बल्कि पूरी तरह से काम करेगा. बहुत जल्द दिल्ली-एनसीआर में एचसीएनजी से सभी बसें (HCNG Buses) चलाई जाएंगी. आने वाले दिनों में छोटे वाहनों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. सरकारी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil) के रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर ने हाल में प्राकृतिक गैस से सीधे हाइड्रोजन-सीएनजी के लिए पेटेंट विकसित किया था.

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भारी वाहनों से 25 फीसदी घटेगा वायु प्रदूषण


इंडियन ऑयल (IOC) के हरियाणा में फरीदाबाद स्थित कैंपस प्रदर्शनी यूनिट्स में इसका नतीजा काफी उत्साहजनक रहा था. अध्ययन में पाया गया था कि इसके इस्तेमाल से कार्बन का उत्सर्जन, माइलेज और टिकाऊपन काफी बेहतर रहा है. हाल में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया पुणे ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट  में बताया कि सीएनजी की तुलना में 18 फीसदी हाइड्रोजन-सीएनजी के इस्तेमाल से 70 फीसदी कम कार्बन मोनोक्साइड उत्सर्जन होता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बीएस 4 इंजन वाले भारी वाहनों में इस ईंधन के इस्तेमाल से 25 फीसदी कम हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन होगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने बसों में ट्रायल का दिया था निर्देश
इंडियन ऑयल के बनाए इस वैकल्पिक ईंधन की खूबियों को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा था कि 18 फीसदी एचसीएनजी ईंधन को दिल्ली में 50 बसों में ट्रायल के तौर पर इस्‍तेमाल किया जाए. इसके बाद दिल्ली में एचसीएनजी से बसें चलाई जा रही हैं. इसका ट्रायल अभी जारी रहेगा. इंडियन ऑयल इसके नतीजों का अध्ययन कर रही है. इस मामले में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नॉलोजी थर्ड पार्टी की भूमिका में होगी. वहीं, एनवॉयरमेंटल पॉल्यूशन(प्रीवेंशन एंड कंट्रोल) अथॉरिटी फॉर दिल्ली एंड एनसीआर (EPCA) निगरानी एजेंसी की भूमिका में होगी. छह महीने के ट्रायल के बाद डिटेल परफॉर्मेंस रिपोर्ट ईपीसीए और सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी.

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एचसीएनजी के लिए इंजन में बदलाव जरूरी नहीं
दावा किया गया है कि हाइड्रोजन मिक्स सीएनजी ईंधन का इस्तेमाल करने के लिए वाहनों के इंजन में खास बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस ईंधन का इस्तेमाल करने के लिए आईसी इंजनों में मामूली बदलाव कना होगा. दुनिया में पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिये सीएनजी में उच्च दाब के साथ हाइड्रोजन को मिक्स किया जाता है, जबकि इंडियन ऑयल ने इससे बहुत आसान और सस्ते तरीके से इस ईंधन को बनाने में सफलता हासिल की है. इंडियन ऑयल ने दावा किया है कि सीएनजी से सीधे एचसीएनजी बनाया जा सकता है. इंडियन ऑयल को एनर्जी इंटेंसिव इलेक्ट्रोलिसिस प्रोसेस और उच्च दबाव के जरिये इसे बनाने में सफलता मिली है. इस प्रक्रिया से एचसीएनजी बनाने में 22 फीसदी कम लागत आती है. वहीं, गैस भी कम खर्च होती है.
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