Home /News /business /

अच्छी खबर: खाने के तेल हो सकते हैं सस्ते, केन्द्र सरकार ने उठाया यह कदम

अच्छी खबर: खाने के तेल हो सकते हैं सस्ते, केन्द्र सरकार ने उठाया यह कदम

बीते एक साल में खाने का तेल 40 फीसदी तक महंगा हो गया है.

बीते एक साल में खाने का तेल 40 फीसदी तक महंगा हो गया है.

​​बीते एक साल में खाद्य तेल में करीब 40 फीसदी तक की तेजी आई है. लेकिन, केंद्र सरकार के एक कदम के बाद अब इसके सस्ते होने के आसार हैं. सराकर ने पाम ऑयल (Palm Oil) के आयात शुल्क में कटौती करने का फैसला लिया है.

    नई दिल्ली. 2019 की दिवाली से लेकर इस साल की दिवाली (Diwali) तक खाने के तेल (Edible oil) 40 फीसदी तक महंगे हो गए हैं. 100 साल में पहली बार तेल के दामों में इतनी तेजी देखी गई है. पहले ही कोरोना (Corona) और लॉकडाउन से जूझ रही जनता को तेल की महंगाई ने तोड़ दिया था. दूसरी तरफ खाद्य तेलों के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उछाल आने से लगातार बढ़ रहे हैं. अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने यह कहा. उन्होंने बताया कि तेल पर लगातार हो रही महंगाई को देखते हुए केन्द्र सरकार (Central) से पाम ऑयल के आयात शुल्क में कटौती करने की मांग की थी. जिसे अब सरकार ने मान लिया है. अब उम्मीद है कि खाने के तेलों पर कम से कम 7 रुपये प्रति किलो की कमी आएगी.

    सरकार ने पाम आयाल पर इसलिए बढ़ाया था आयात शुल्क
    अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया कि इसके पीछे सरकार की मंशा तिलहन का उत्पादन करने वाले किसानों को अपनी फसल को अच्छे दाम मिले यह था, लेकिन भारत के अंदर तिलहन का उत्पादन करने वाले भारत की आबादी में सिर्फ 2 फीसद ही हैं.

    इसलिए हमने मांग रखी थी कि 98 फीसद जनता को इस महामारी के वक्त इतने महंगे दामों पर तेल की खरीद से बचाने के लिए आयात शुल्क जल्द से जल्द कम करना चाहिए. और इस तहर हमारी इस मांग पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक विचार कर आयत शुल्क क्रूड पामोलिन पर 37.5 फीसद से कम कर 27.5 फीसद कर दिया है.

    किसानों के लिए बड़ी खबर: खेती के लिए सरकार देगी सस्ता ड्रोन, जानिए पूरी योजना के बारे में...

    सरसो के तेल पर इसलिए दिसम्बर के बाद मिल सकती है राहत
    एक अक्टूबर से केन्द्र सरकार ने सरसों के तेल में की जाने वाली ब्लैंडिंग (सरकार की अनुमति से सरसों के तेल में दूसरे तेलों का 20 फीसदी तक मिश्रण) बंद कर दी है. अब कारोबारियों को प्योर सरसों का तेल बेचना होगा. लेकिन यहां सिर मुंडाते ही ओले पड़ने वाली कहावत चरितार्थ हुई है. इस साल सरसों की पैदावार भी कम हो गई है. और प्योर तेल बेचने का खर्च ज़्यादा है. ब्लैंडिंग बंद करने के खिलाफ कुछ कारोबारी कोर्ट भी गए हैं. जहां दिसम्बर में सुनवाई है. वहीं दो कारोबारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में भी ब्लैंडिंग बंद होने के खिलाफ अर्जी दी है.

    Tags: Business news in hindi, Edible oil

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर