केंद्र का CAG रिपोर्ट पर जवाब! सुलह होने तक GST Cess देश के कंसोलिडेटेड फंड में रखना कानून का उल्‍लंघन नहीं

केंद्र सरकार ने जीएसटी कंपनसेशन सेस के सीएफआई में ही पड़े रहने को गलत बताने वाली कैग रिपोर्ट पर कहा है कि कुछ समय के लिए सीएफआई में पड़ी रकम को पैसे का दूसरे काम में इस्‍तेमाल नहीं कहा जा सकता है.
केंद्र सरकार ने जीएसटी कंपनसेशन सेस के सीएफआई में ही पड़े रहने को गलत बताने वाली कैग रिपोर्ट पर कहा है कि कुछ समय के लिए सीएफआई में पड़ी रकम को पैसे का दूसरे काम में इस्‍तेमाल नहीं कहा जा सकता है.

केंद्र सरकार (Central Government) ने नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का जवाब दिया है कि वित्‍त वर्ष 2018 और 2019 के दौरान वस्‍तु व सेवा कर क्षतिपूर्ति उपकर (GST Compensation Cess) की कुल रकम कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया (CFI) में रखने को पैसे का डायवर्जन नहीं कहा जा सकता है. कैग ने कहा है कि दो वित्‍त वर्ष के दौरान जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर कलेक्शन में 47,272 करोड़ रुपये कम फंड क्रेडिट हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 9:27 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने संसद के मानसून सत्र के दौरान बताया था कि राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए कन्सॉलि​डेटेड फंड ऑफ इंडिया (CFI) से पैसे जारी करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है. अब नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) ने कहा है कि खुद केंद्र सरकार ने इस नियम का उल्लंघन किया है. कैग का कहना है कि वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 में केंद्र सरकार ने जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर (GST Compensation Cess) का 47,272 करोड़ रुपये सीएफआई में रखा है. इस फंड को दूसरे काम में इस्तेमाल किया. इस पर केंद्र सरकार का कहना है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर को देश के कंसोलिडेटेड फंड में रखना पैसे का दूसरे काम में इस्‍तेमाल करना नहीं है.

सभी टैक्‍स और सेस सबसे पहले सीएफआई में रखे जाते हैं
वित्‍त मंत्रालय का कहना है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस का अस्‍थायी तौर पर सीएफआई में बना रहना नियमों का उल्‍लंघन नहीं है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इन दोनों साल में राज्‍यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति का पूरा भुगतान किया गया है. क्षतिपूर्ति के निपटान में लगने वाले समय को किसी भी तरह से जीएसटी सेस फंड का दूसरे काम में इस्‍तेमाल नहीं कहा जा सकता है. अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से इकट्ठा किए गए सभी टैक्‍स और सेस सबसे पहले सीएफआई में ही रखे जाते हैं. इसके बाद आम बजट में निर्धारित मद में खर्च के लिए रकम दूसरे फंड्स में ट्रांसफर की जाती है.

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सीएफआई से ही दूसरे फंड में रकम ट्रांसफर करता है केंद्र


अधिकारी ने कहा कि सरकार अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करती है कि सीएफआई में इकट्ठी पूरी रकम हर वित्‍त वर्ष के अंत तक बजटीय प्रावधानों के तहत बनाए गए फंड्स में ट्रांसफर हो जाए. अधिकारी ने साफ किया, 'जीएसटी क्षतिपूर्ति अधिनियम के लिए जरूरी है कि सीएफआई में इकट्ठा उपकर को क्षतिपूर्ति निधि में ट्रांसफर किया जाए और राज्यों को मुआवजा जारी किया जाए.' उन्‍होंने बताया कि हर वित्‍त वर्ष के अंत में पता चलता है कि सीएफआई में इकट्ठा अंतिम रकम कितनी है. सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जून 2021 में पता चलेगा कि कितना ज्‍यादा पैसा पैसा इकट्ठा हुआ. इसके बाद ये अतिरिक्‍त पैसा अस्‍थायी तौर पर सीएफआई में बना रहेगा. सीएफआई में पड़ी इस रकम को किसी भी कल्‍पना के आधार पर नियमों का उल्‍लंघन नहीं कहा जा सकता है.

जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर कलेक्‍श में कम फंड हुआ क्रेडिट
कैग का कहना है कि वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 में केंद्र सरकार ने जीएसटी क्षतिपूर्ति का 47,272 करोड़ रुपये सीएफआई में ही रखा है. इस फंड को दूसरे काम के लिए इस्तेमाल किया गया. इससे उस समय राजस्व प्राप्ति बढ़ी और राजकोषीय घाटा कम हुआ. स्टेटमेंट 8, 9 और 13 के ऑडिट परीक्षण की जानकारी से पता चलता है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर कलेक्शन में कम फंड क्रेडिट हुआ. वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए 47,272 करोड़ रुपये कम फंड क्रेडिट हुआ. यह जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर एक्ट 2017 के नियमों का उल्लंघन है. इस एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक, किसी भी साल में जमा कुल उपकर कलेक्शन नॉन-लैप्सड फंड में क्रेडिट किया जाता है.

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फंड में कितना जमा हुआ और केंद्र ने कितना ट्रांसफर किया
नॉन-लैप्सड फंड पब्लिक अकाउंट का हिस्सा है और इसका इस्तेमाल राज्यों को जीएसटी रेवेन्यू की भरपाई के लिए इस्तेमाल होता है. लेकिन, केंद्र सरकार ने जीएसटी उपकर को जीएसटी कंपेनसेशन फंड में ट्रांसफर करने के बजाय सीएफआई में ही रखा है. बाद में इसका इस्तेमाल किसी अन्य काम के लिए किया गया. आसान भाषा में समझें तो वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान इस फंड में 90,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का बजटीय प्रावधान था. ये रकम राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति के तौर पर जारी की जानी थी. इस साल जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के तौर पर 95,081 करोड़ रुपये जमा हुए. वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने इसमें से 54,275 करोड़ रुपये कंपेनसेशन फंड में ट्रांसफर किए.
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