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    केंद्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम! अब स्ट्रीट फूड की भी होगी होम डिलिवरी, वेंडर्स की होगी आर्थिक मदद

    केंद्र सरकार ने आपके नजदीकी और पसंदीदा स्‍ट्रीट वेंडर के तैयार किए खाने-पीने के सामना की होम डिलिवरी के लिए स्विगी  से करार किया है.
    केंद्र सरकार ने आपके नजदीकी और पसंदीदा स्‍ट्रीट वेंडर के तैयार किए खाने-पीने के सामना की होम डिलिवरी के लिए स्विगी से करार किया है.

    स्‍ट्रीट वेंडर्स (Street Vendors) को कोरोना संकट के कारण बने आर्थिक हालात से उबारने के लिए प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi Scheme) के तहत शहरी विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन फूड आर्डर और होम डिलिवरी करने वाली कंपनी स्विगी (Swiggy) से करार किया है. अब लोगों को घर बैठे अपने नजदीकी पसंदीदा स्‍ट्रीट वेंडर का तैयार किया खाने-पीने का सामान मिल सकेगा.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 6, 2020, 7:06 AM IST
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    नई दिल्‍ली. कोविड-19 महामारी के दौरान स्ट्रीट फूड (Street Foods) का स्वाद लेने से पहले लोगों के मन में कई सवाल उठते होंगे. दूसरी तरफ, कोरोना संकट के कारण लाखों स्ट्रीट फूड वेंडरों (Street Vendors) का काम भी काफी मंदा पड़ गया है. इन परिस्थितियों से वेंडरों को उबारने के लिए प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि यानि पीएम स्वानिधि स्कीम (PM SVANidhi Scheme) के तहत शहरी विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन फूड आर्डर और होम डिलिवरी करने वाली कंपनी स्विगी (Swiggy) के साथ करार किया है.

    फूड स्ट्रीट वेंडर्स के बनाए सामान की होगी होम डिलिवरी
    केंद्र सरकार और स्विगी के बीच हुए करार के बाद स्ट्रीट वेंडर्स खाने-पीने के सामान का ऑनलाइन ऑर्डर लेने के बाद होम डिलिवरी कर सकेंगे. इससे जहां एक तरफ मंदी की मार झेल रहे इस सेक्टर को जीवनदान मिलेगा. वहीं, स्ट्रीट फूड के शौकीन घर बैठे इनका स्‍वाद ले सकेंगे. अहमदाबाद, चैन्नई, दिल्ली, इंदौर और वाराणसी में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी शुरुआत की जाएगी. शुरुआत में इन पांच शहरों के 250 वेंडर्स इस पायलट प्रोग्राम से जुड़ेंगे. इससे सोशल डिस्‍टेंसिंग और दुकानों तक आने-जाने का झंझट भी नहीं रहेगा. स्ट्रीट वेंडर्स का पैन नंबर होगा और इन्हें एफएसएसएआई से पंजीकृत कराया जाएगा.

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    पांच शहरों के 250 स्‍ट्रीट वेंडर्स को दिया जाएगा प्रशिक्षण


    शहरी विकास मंत्रालय नगर निगम, एफएसएसएआई और जीएसटी अधिकारियों के साथ मिलकर इस स्‍कीम को लागू करेगा. परंपरागत तरीके से काम कर रहे इन स्ट्रीट वेंडर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऑनलाइन बुकिंग और डिलिवरी टेक्‍नोलॉजी को समझना होगा. इसे देखते हुए फैसला लिया गया है कि इन सभी 250 स्ट्रीट वेंडर्स को एप के इस्तेमाल की तकनीक, मैन्यू व दामों का डिजिटलीकरण, साफ-सफाई और पैकेजिंग को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा. अगर यह मॉडल सफल होता है तो सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू करेगी. स्‍कीम के तहत 50 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को सस्ती दर पर वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराया जाएगा.

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    पीएम स्‍वनिधि योजना में ले सकते हैं वर्किंग कैपिटल लोन
    पीएम स्‍वनिधि योजना के तहत वेंडर 10,000 रुपये का कर्ज वर्किंग कैपिटल लोन के तौर पर ले सकते हैं. इसे 1 साल में मासिक किस्‍तों में चुकाना होगा. अगर समय पर कर्ज चुकाया जाता है तो वेंडर के बैंक खाते में सालाना 7 फीसदी सब्सिडी तिमाही आधार पर जमा कर दी जाएगी. डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए 1,200 रुपये सालाना कैशबैक दिया जाएगा. लोन का समय से पहले भुगतान किए जाने पर कोई पेनाल्टी नहीं ली जाएगी. 4 अक्टूबर तक के आंकड़ो के मुताबिक पीएम स्वनिधि योजना के तहत 20 लाख आवेदन मिले हैा. इसमें से 7.5 लाख आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 2.4 लाख आवेदनकर्ताओं को कर्ज दिए भी जा चुके हैं.
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