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सरकार 12 कंपनियों में घटाएगी हिस्सेदारी, जानिए किन-किन कंपनियों के नाम हैं शामिल

News18Hindi
Updated: September 19, 2019, 3:58 PM IST

सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक विनिवेश विभाग ने ड्राफ्ट कैबिनेट नोट पर संबंधित मंत्रालय से राय मांगी है.

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  • Last Updated: September 19, 2019, 3:58 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) जल्द 12 सरकारी कंपनियों (PSUs) में अपनी हिस्सेदारी घटाएगी. नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC), इंडियन ऑयल (Indian Oil) समेत 12 कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे ला सकती है. सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक विनिवेश विभाग ने ड्राफ्ट कैबिनेट नोट (Cabinet Note) पर संबंधित मंत्रालय से राय मांगी है.

इसमें पावर सेक्टर की तीन कंपनियां NTPC, PFC, Powergird शामिल हैं. इसके साथ ही NALCO, CONCOR, BEL में भी हिस्सा घटाने की तैयारी है.

किन कंपनियों में सरकार की कितनी हिस्सेदारी
NTPC में अभी सरकार की हिस्सेदारी 56.41 फीसदी है. वहीं, पावर फाइनांस कॉरपोरेशन में अभी सरकार की हिस्सेदारी 59.05 फीसदी और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन इंडिया में सरकार की हिस्सेदारी 55.37 फीसदी है. इस सूचि में ऑयल एंड गैस सेक्टर की 3 कंपनियां GAIL, BPCL और इंडियन ऑयल शामिल हैं. गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (GAIL) में अभी सरकार की हिस्सेदारी 52.64 फीसदी, BPCL में 53.29 फीसदी और इंडियन ऑयल में 52.18 फीसदी है. नेल्को, कॉनकोर, BEL औऱ MOIL में भी सरकारी हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे लाने की तैयारी है.

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सरकारी हिस्सेदारी की निचली सीमा तय नहीं
सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव में सरकारी हिस्सेदारी की निचली सीमा तय नहीं है. मंत्रियों के समूह को निचली सीमा तय करने का अधिकार होगा. ये हिस्सेदारी एक साथ की बजाय अलग-अलग किश्तों में बेची जाएगी. अभी ड्राफ्ट कैबिनेट नोट पर संबंधित मंत्रालय से राय मांगी गई है. अगले दो हफ्ते में इसे कैबिनेट से अंतिम मंजूरी की संभावना है.
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विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य
सरकार ने बजट 2019 में विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. सरकार ने 2019-20 के पहले दो महीने में 2357.10 करोड़ रुपए जुटाए हैं. वहीं साल 2018-19 में सरकार ने विनिवेश के जरिए 84,972.16 करोड़ रुपये जुटाए थे. हालांकि 2018-19 में 80 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.

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क्‍या होती है विनिवेश प्रक्रिया?
विनिवेश प्रक्रिया निवेश का उलटा होता है. जहां निवेश किसी कारोबार, किसी संस्था या किसी परियोजना में रकम लगाना होता है तो वहीं विनिवेश का मतलब उस रकम को वापस निकालना होता है. यहां निजीकरण और विनिवेश के अंतर को समझना जरूरी है. निजीकरण में सरकार अपने 51 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेच देती है जबकि विनिवेश की प्रक्रिया में वह अपना कुछ हिस्सा निकालती है लेकिन उसकी मिल्कियत बनी रहती है लेकिन अब ''रणनीतिक विनिवेश'' में मिल्कियत भी नहीं बचेगी.

(लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिटिकल एडिटर- CNBC आवाज़)

(सोर्स- हिंदी मनीकंट्रोल)

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First published: September 19, 2019, 3:12 PM IST
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