किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, केंद्र सरकार फ्री में देगी तिलहन, जानें कैसे ले सकते हैं आप?

पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narender Singh Tomar) ने जानकारी देते हुए बताया कि देश के करीब एक तिहाई जिलों में जुलाई महीने से शुरू होने वाली खरीफ (गर्मी) की फसलों के लिए तिलहन के बीज फ्री में दिया जाएगा.

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) की दूसरी लहर में पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ खाने के तेल के दाम भी आसमान पर हैं. इन दिनों खाने के तेल के रेट्स में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. इस बीच केंद्र सरकार (Central Govt) ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने किसानों को फ्री में तिलहन बीज मुहैया कराएगी, जिससे उन लोगों को सस्ते में खाने का तेल मिल सके.

सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से तिलहन का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और अतिरिक्त आयात पर निर्भरता कम होगी. हालांकि, जानकारों का मानना है कि 1960 के दशक का विंटेज का विचार आज बेहतर नतीजा नहीं दे सकता है.

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कृषि मंत्री ने दी जानकारी
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narender Singh Tomar) ने जानकारी देते हुए बताया कि देश के करीब एक तिहाई जिलों में जुलाई महीने से शुरू होने वाली खरीफ (गर्मी) की फसलों के लिए तिलहन के बीज फ्री में दिया जाएगा. किसानों को उच्च गुणवत्ता (high-quality) के हजारों पैकेट दिए जाएंगे.

मनी कंट्रोल की खबर के मुताबिक, सरकार तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 800,000 सोयाबीन बीज के मिनी किट और 74,000 मूंगफली बीज के मिनीकिट दे रही है.

कितने बढ़ें अबतक रेट्स



उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय (Consumer affairs ministry) के एक साल के आंकड़ों के मुताबिक, खाने के तेल की कीमतों में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. एक लीटर सरसों के तेल की औसत कीमत मई में बढ़कर 170 रुपये हो गई है जो कि पिछले साल इसी अवधि में 120 रुपये थी. इसी तरह मूंगफली का तेल, सोया तेल, पॉम तेल, और सन्फ्लॉवर तेल के दाम पिछले एक दशक से हाई लेवल पर हैं.

आपको बता दें सरकार इस साल जुलाई से शुरू होने वाले आगामी खरीफ मौसम में तिलहन के तहत 6.37 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त रकबा में तेल की बुवाई करने का मकसद है. इससे 1.2 लाख क्विंटल तिलहन और 24.3 लाख क्विंटल खाद्य तेल का उत्पादन होने की संभावना है.

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किन लोगों को मिलेगा फायदा

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के 41 जिलों में अंतर-फसल के लिए 76.03 करोड़ रुपये की लागत से सोयाबीन के बीज बांटे जाएंगे. इससे 1.47 लाख हेक्टेयर रकबे में तिलहन की बुवाई होगी. इसके अलावा, 104 करोड़ रुपये की लागत के साथ सोयाबीन के बीज आठ राज्यों में बांटे जाएंगे, जिसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के 73 जिले शामिल हैं। इन राज्यों में 3,90,000 हेक्टेयर का रकबा शामिल होगा.

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार के 90 जिलों में करीब 8.16 लाख बीज के मिनी-किट बांटे जाएंगे. यहां खेती का रकबा 10.06 लाख हेक्टेयर होगा.

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