मोदी सरकार के पास नहीं है राज्याें को देने के लिए पैसे, उधार लेने पड़ सकते हैं ₹1.58 लाख करोड़

राज्यों को मुआवजे सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST)पर एक पैनल शुक्रवार को बैठक करेगा.

राज्यों को मुआवजे सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST)पर एक पैनल शुक्रवार को बैठक करेगा.

राज्यों को मुआवजे सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) पर एक पैनल शुक्रवार को बैठक करेगा.

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नई दिल्ली. राज्यों को मुआवजे सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) पर एक पैनल शुक्रवार को बैठक करेगा. सूत्रों के अनुसार, देशभर में उपभोग कर संग्रह में कमी के कारण राज्यों को उनके राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए भारत सरकार (Central Government) को लगातार दूसरे वर्ष अधिक उधार लेने की आवश्यकता हो सकती है. वित्तीय वर्ष में अतिरिक्त उधार की आवश्यकता 1.58 ट्रिलियन रुपये (21.7 बिलियन डॉलर) होने का अनुमान है. बता दें कि 28 मई को GST काउंसिल की बैठक होने जा रही है.

सरकार 1.1 ट्रिलियन रुपये जुटाएगी

लाइव मिंट ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि राज्यों को भुगतान की जाने वाली कुल राशि 2.7 ट्रिलियन रुपये है, सरकार 1.1 ट्रिलियन रुपये जुटाने की प्रयास करेगी. हालांकि, इस बारे में वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं दिया गया है. बता दें कि यह राशि उस मुआवजे का हिस्सा है जिसे केन्द्र सरकार ने राष्ट्रव्यापी जीएसटी की शुरूआत के कारण किसी भी राजस्व हानि के लिए राज्यों को भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की है. हालांकि, दुनिया की दूसरी लहर के कारण हुई आर्थिक मंदी से टैक्स कलेक्शन को नुकसान पहुंचा है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे चुकाने के लिए अतिरिक्त उधार ले सकती है.

पिछले साल लिया था 1.1 लाख करोड़ रुपया उधार
पिछले साल भी केंद्र सरकार ने राज्यों की ओर से 1.1 लाख करोड़ रुपये का उधार लिया था और इसे लोन के रूप में राज्यों को दिया था.सूत्रों का कहना है कि इस साल अतिरिक्त उधारी लेने, इसकी राशि और समय के बारे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और राज्यों के साथ सलाह मशविरे के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा. शुरुआत में मुआवजे की भरपाई की अवधि 2022 तक के लिए थी लेकिन पिछले साल केंद्र सरकार ने इसे और आगे बढ़ा दिया.

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Barclays ने विकास दर का अनुमान घटाया



बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर का असर इकोनॉमी पर भी दिखने लगा है. ब्रिटिश ब्रोकरेज फर्म Barclays ने वित्त वर्ष 2021-22 की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में 0.80 फीसदी की कटौती की है. बार्कलेज के अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भारतीय जीडीपी 9.2 फीसदी की दर से बढ़ेगी. ब्रिटिश ब्रोकरेज फर्म ने भारतीय जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में यह कटौती कोरोना महामारी की दूसरी लहर के चलते किया है. बार्कलेज का कहना है कि दूसरी लहर अनुमान से अधिक खतरनाक निकली. Barclays ने इस महीने में दूसरी बार GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया है. इससे पहले बार्कलेज ने इसे 3 मई को 11 फीसदी से घटाकर 10 किया था.

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