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निजीकरण को लेकर क्या है सरकार की रणनीति? करीब दो दर्जन तक सिमट जाएंगी 300 से ज्यादा सरकारी कंपनियां

अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि सभी मास्क लगाएं तथा सैनिटाइजर का उपयोग नियमित रूप से करें. (सांकेतिक फोटो)

अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि सभी मास्क लगाएं तथा सैनिटाइजर का उपयोग नियमित रूप से करें. (सांकेतिक फोटो)

निजीकरण नीति के तहत केंद्र सरकार पब्लिक सेक्टर उपक्रमों (PSU) की संख्या कम करने की तैयारी में है. इसके तहत 300 से ज्यादा उपक्रमों को कम कर करीब दो दर्जन किया जाएगा. हालांकि, इस नीति को लेकर सरकार के सामने कुछ चुनौतिया भी होंगी.

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    नई दिल्ली. केंद्र सरकार पब्लिक सेक्टर उपक्रमों (PSU) की संख्या घटाकर करीब दो दर्जन कर सकती है. वर्तमान में इनकी संख्या 300 से ज्यादा है. सरकार निजीकरण को लेकर नई नीति अपना रही है, जिसमें घाटे में चल रहे नॉन-कोर सेक्टर के उपक्रमों से अपनी जिम्मेदारी को खत्म करेगी. टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा है कि नीति आयोग (NITI Aayog) की सिफारिशों के बाद केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) इस पर अंतिम फैसला लेगी. नीति आयोग को जिम्मेदारी दी गई है कि वो अगले चरण की रणनीतिक बिक्री के लिए इन उपक्रमों की पहचान करे.

    बजट में यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है कि इन सेगमेंट में केवल चार ही प्रमुख रणनीतिक सेक्टर्स होंगे. अधिकतम पब्लिक सेक्टर यूनिट्स की संख्या 3 से 4 होगी. इसके अलावा अन्य सभी क्षेत्र में काम करने वाले सरकारी उपक्रमों से केंद्र सरकार जिम्मेदारी मुक्त होगी. इनमें बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां शामिल होंगी. इसके बाद इनकी संख्या घटकर करीब दो दर्जन से भी कम हो जाएगी.

    चुनिंदा कं​पनियां ही रणनीतिक सेक्टर्स में होंगी शामिल
    बजट 2021 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने एटॉमिक एनर्जी, स्पेस, डिफेंस, ट्रांसपोर्ट, टेलीकम्युनिकेशंस, पावर, पेट्रोलियम, कोयला व अन्य मिनरल्स, बैंकिंग, इंश्योरेंस व फाइनेंशियल सेक्टर को रणनीतिक सेक्टर बताया था. सरकार की नीति के मुताबिक, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज की संख्या न्यूनतम होंगी. इसके अलावा अन्य CPSEs का निजीकरण या विलय या अन्य CPSEs की सहायक कंपनी बनाई जाएगी या बंद की जाएंगी. गैर-रणनीतिक क्षेत्र की CPSE का या तो निजीकरण किया जाएगा या बंद किया जाएगा.

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    निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार इस नीति पर खासा ध्यान दे रही है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वो निजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह भी साफ हो चुका है कि प्राइवेट सेक्टर और वैश्विक निवेशक को शामिल किया जाएगा.

    पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज सर्वे 2018-19 के मुताबिक, 31 मार्च 2019 तक कुल केंद्रीय पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज की संख्या 348 है. इसमें से 249 एंटरप्राइजेज का संचालन हो रहा है. जबकि, 83 अं​डर कंस्ट्रक्शन में है. बाकी बचे 13 या तो बंद होने की प्रक्रिया में हैं या इनका लिक्विडेशन हो रहा है.

    सरकार के सामने इस पॉलिसी को लेकर भी कई चुनौतियां हैं. इस रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से ही कहा गया है कि करीब एक दर्जन तो कंसल्टिंग फर्म्स हैं. इसमें कहा गया है कि सरकारी उपक्रमों के कुछ कर्मचारियों को शामिल कर कंसल्टिंग कंपनी बनाना ज्यादा आसान होगा.

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    इसके अलावा सरकार को बड़ी हिस्सेदारी बेचने से पहले कई बातों पर ध्यान देना होगा. कुछ सेक्टर्स में लगातार निजीकरण की वजह से भी असर पड़ सकता है. इससे सरकार को पार्यप्त पूंजी भी नहीं मिलेगी.

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