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अगस्त के अंत तक फिस्कल डेफिसिट कुल बजट टारगेट का 31 फीसदी पहुंचा

अगस्त के अंत तक फिस्कल डेफिसिट कुल बजट टारगेट का 31 फीसदी पहुंचा

राजकोषीय घाटा का मतलब केंद्र सरकार की आमदनी और खर्चों का अंतर है

राजकोषीय घाटा का मतलब केंद्र सरकार की आमदनी और खर्चों का अंतर है

अप्रैल से अगस्त से बीच फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) 4.7 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 31.1 फीसदी रहा.

    नई दिल्ली. चालू वित्त वर्ष (FY22) के पहले पांच महीनों में सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त से बीच राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) 4.7 लाख करोड़ रुपये रहा. यह पूरे साल के अनुमान का 31 फीसदी है. 30 सितंबर को सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई है.

    चालू वित्त वर्ष में घाटे का आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में काफी बेहतर रहा. तब यह अनुमान के 109.3 फीसदी तक बढ़ गया था. खास तौर पर कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए खर्च में उछाल के कारण ऐसा हुआ था. पिछले साल इन्हीं 5 महीनों के दौरान सरकार का वित्तीय घाटा 109 फीसदी था. इसका मतलब था कि पिछले साल सिर्फ 5 महीनों में ही वित्तीय घाटा बजट के अनुमान से ज्यादा हो गया था.

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    क्या होता है राजकोषीय घाटा
    राजकोषीय घाटा का मतलब केंद्र सरकार की आमदनी और खर्चों का अंतर है. फिस्कल ईयर 2021 में राजकोषीय घाटा रिवाइज करके 18.49 करोड़ रुपये कर दिया गया था जो जीडीपी का 9.5 फीसदी था. पहले बजट में राजकोषीय घाटा 7.96 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान था जो जीडीपी का 3.5 फीसदी था.

    बुनियादी उद्योगों का उत्पादन अगस्त महीने में 11.6 फीसदी बढ़ा
    गौरतलब है कि कोयला, कच्चा तेल और इस्पात समेत आठ बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों के उत्पादन में अगस्त महीने में सालाना आधार पर 11.6 फीसदी की वृद्धि हुई. 30 सितंबर को जारी सरकारी आंकड़े के मुताबिक, आठ बुनियादी उद्योगों कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27 फीसदी भारांश है. पिछले साल अगस्त महीने में बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों के उत्पादन 6.9 फीसदी की गिरावट आई थी. यह तीसरा महीना है जब बुनियादी क्षेत्र उद्योगों में वृद्धि दर्ज की गई है.

    (एजेंसी इनपुट के साथ)

    Tags: Fiscal Deficit, Ministry of Finance

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