बदलता निवेश ट्रेंड: पैसिव फंड्स में बढ़ी रिटेल निवेशकों की रुचि, जानिए विस्तार से

 mutual funds investment

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मुंबई . म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्पी के मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक रिटेल निवेशकों के निवेश रुझान बदल रहे हैं. पश्चिमी देशों की तरह अब भारत के भी रिटेल निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंजीविजुअल्स की रुचि पैसिव फंड में बढ़ने लगी है. दोनों ही श्रेणियों के निवेशकों का पैसिव फंड्स में निवेश पिछले एक साल में ढ़ाई गुना से अधिक हो चुका है.

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मुंबई . म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्पी के मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक रिटेल निवेशकों के निवेश रुझान बदल रहे हैं. पश्चिमी देशों की तरह अब भारत के भी रिटेल निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंजीविजुअल्स की रुचि पैसिव फंड में बढ़ने लगी है. दोनों ही श्रेणियों के निवेशकों का पैसिव फंड्स में निवेश पिछले एक साल में ढ़ाई गुना से अधिक हो चुका है.

कम खर्च और बेहतर रिटर्न के चलते निवेशक इंडेक्स फंड्स और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) जैसे पैसिव फंड्स का रूख कर रहे हैं. इंडेक्स फंड्स के मुताबिक, मार्च 2021 तक इंडेक्स फंड्स में एचएनआई (दो लाख रुपए से अधिक निवेश करने वाले निवेशक को एचएनआई कहा जाता है) का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 176 फीसदी बढ़कर 8,267 करोड़ रुपए पर पहुंच गया. जबकि रिटेल निवेशकों के एएमयू में 157 फीसदी का उछाल देखने को मिला है.

इसी तरह एक्विटी और डेट ईटीएफ में वित्त वर्ष 2020-21 के अंत में एचएनआई का एयूएम 82 प्रतिशत बढ़कर 13,704 करोड़ रुपए पर पहुंच गया. इस श्रेणी में रिटेल निवेशकों का एयूएम 5 फीसदी बढ़कर 3,860 करोड़ रुपए रहा. यह इससे पिछले वित्त वर्ष में 4,054 करोड़ रुपए था. दो लाख रुपए से अधिक निवेश करने वाले निवेशक को एचएनआई कहा जाता है.

पैसिव फंड्स में रुचि बढ़ने के प्रमुख कारण
1- निवेशकों में पैसिव फंड को लेकर जागरुकता बढ़ रही है.

2- निवेश के लिए निवेशक सस्ते विकल्प चाहते हैं.

3- इंडेक्स फंड्स और ईटीएफ का प्रदर्शन कई एक्टिव फंड से बेहतर है.



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पैसिव फंड्स में फंड मैनेजर की भूमिका सीमित होती है

विशेषज्ञों के मुताबिक एक्टिव फंड्स में फंड मैनेजर फैसला करता है कि पैसा किन-किन सेक्टर के किन-किन शेयरों में लगाया जाए. वहीं, पैसिव फंड्स सूचकांकों, मसलन सेंसेक्स की 30 कंपनियों या निफ्टी की 50 कंपनियों में उनके वेटेज के अनुपात में निवेश करते हैं. ऐसे में पैसिव फंड्स में फंड मैनेजर की भूमिका बहुत सीमित हो जाती है. इसलिए इन की मैनेजमेंट फीस भी कम होती है.

एक्टिव के मुकाबले पैसिव फंड्स का प्रदर्शन बेहतर

विशेषज्ञों के मुताबिक, रिटर्न में एक्टिव फंड्स के मुकाबले पैसिव फंड्स का प्रदर्शन बेहतर रहा है. 2020 में लॉर्ज कैप फंड्स ईएलएसएस फंड्स और मिड/स्मॉल कैप फंड्स का प्रदर्शन इनके वेंचमार्क की तुलना में क्रमश 100%, 80% और 53% कमजोर रहा था. पैसिव फंड्स का खर्च भी कम रहता है. एसलिए निवेशक इन्हें पसंद कर रहे हैं.

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