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Milk Price Hike: देश में कहां मिलता है सबसे सस्ता दूध? फुल क्रीम दूध में है 16 रुपये का अंतर

Milk Price Hike: देश में कहां मिलता है सबसे सस्ता दूध? फुल क्रीम दूध में है 16 रुपये का अंतर

प्राइस का इतना कम होना राज्य सरकार की एक योजना की वजह से है.

प्राइस का इतना कम होना राज्य सरकार की एक योजना की वजह से है.

Milk Price in Bengaluru Today in Hindi : भारत का एक शहर ऐसा है, जहां काफी कम रेट पर दूध मिलता है. इस शहर का नाम है बेंगलुरु. देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले बेंगलुरु में लगभग 16 रुपये प्रति लीटर कम कीमत में दूध बिकता है.

हाइलाइट्स

फुल क्रीम दूध की कीमत अहमदाबाद, कोलकाता, दिल्ली एनसीआर और मुंबई में 62 रुपये प्रति लीटर है
टोंड दूध अहमदाबाद में 50 और दिल्ली NCR, मुंबई और कोलकाता में 52 रुपये प्रति लीटर है.
देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले बेंगलुरू में लगभग 16 रुपये प्रति लीटर कम कीमत में दूध बिकता है.

नई दिल्ली. कैसा हो अगर आपको फुल क्रीम दूध 46 रुपये प्रति लीटर और टोंड मिल्क मात्र 38 रुपये लीटर मिलने लगे? जाहिर है आपको अच्छा लगेगा. भारत का एक शहर ऐसा है, जहां इसी रेट पर दूध मिलता है. इस शहर का नाम है बेंगलुरु. लेकिन सवाल ये है कि आखिर वहां दूध इतना सस्ता क्यों है? जबकि पूरे देश में अलग-अलग हिस्सों में फुल क्रीम दूध की कीमत 60 रुपये प्रति लीटर से अधिक है.

अमूल के फुल क्रीम दूध की कीमत अहमदाबाद, कोलकाता, दिल्ली एनसीआर और मुंबई में 62 रुपये प्रति लीटर है, तो टोंड दूध अहमदाबाद में 50 और दिल्ली NCR, मुंबई और कोलकाता में 52 रुपये प्रति लीटर है. डबल टोंड दूध के दाम भी 46 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं. चेन्नई में, लोकल डेयरी कोऑपरेटिव टोंड मिल्क 40 रुपये और फुल क्रीम दूध 48 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बेच रही हैं. हैदराबाद में विजया नाम से दूध उपलब्ध कराने वाली लोकल डेयरी कोऑपरेटिव 48 रुपये में टोंड और 66 रुपये में फुल क्रीम दूध उपलब्ध करा रही है.

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राज्य सरकार की इंसेंटिव योजना
देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले बेंगलुरु में लगभग 16 रुपये प्रति लीटर कम कीमत में दूध बिकता है. प्राइस का इतना कम होना राज्य सरकार की एक योजना की वजह से है. वर्ष 2008 में राज्य सरकार ने कर्नाटक कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर फेडरेशन या KMF के साथ जुड़े दुग्ध उत्पादकों को 2 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से इंसेंटिव देना शुरू किया था. बाद में 2013 में राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 5 रुपये प्रति लीटर कर दिया. इसके बाद अगली सरकार आई तो उसने इसे बढ़ाते हुए 6 रुपये प्रति लीटर कर दिया.

इस इंसेंटिव को पाने के लिए दूध का उत्पादन बढ़ा और KMF द्वारा दूध की खरीद कई गुना बढ़ गई. कुछ समय बाद हालात ऐसे हो गए कि सप्लाई अधिक और मांग सीमित हो गई. अधिक सप्लाई के चलते दूध की कीमत या तो स्थिर रही या फिर थोड़ी सी बढ़ी. इतना ज्यादा दूध खरीदकर KMF देश की दूसरी सबसे बड़ी डेयरी बन गई.

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चूंकि सप्लाई अधिक है और स्थानीय स्तर पर मांग कम है तो KMF के पास उतना पैसा नहीं है, जितना कि कुछ अन्य डेयरियां बना रही हैं. ऐसे में फेडरेशन अपने नेटवर्क को फैलाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी डेवलप नहीं कर पाई. अत: 2021-22 में केएमएफ ने हर दिन करीब 82 लाख किलो दूध की खरीद की, जबकि उसकी हर दिन की बिक्री 50 लाख लीटर से भी कम थी. बता दें कि KMF नंदिनी नाम के ब्रांड के तहत दूध बेचती है.

Tags: Amul, Business news, Business news in hindi, Milk

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