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जानलेवा कोरोना वायरस का असर : 30 दिन में चीन के डूबे 30 लाख करोड़ रुपये, 30 साल के निचले स्तर पर अर्थव्यवस्था

News18Hindi
Updated: February 3, 2020, 1:47 PM IST
जानलेवा कोरोना वायरस का असर : 30 दिन में चीन के डूबे 30 लाख करोड़ रुपये, 30 साल के निचले स्तर पर अर्थव्यवस्था
चीन के शेयर बाजार में निवेशकों के 30 लाख करोड़ रुपये (42,000 करोड़ डॉलर) डूब चुके हैं.

चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस (China Coronavirus) का संक्रमण अब चीन के साथ-साथ दुनिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा रहा हैं. वहीं, इससे चीन की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 30 दिन में शेयर बाजार निवेशकों के 30 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं. वहीं, आर्थिक गतिविधिया 30 साल के निचले स्तर पर आ गई है.

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  • Last Updated: February 3, 2020, 1:47 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (China Coronavirus) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. कोरोना से चीन में अब तक 361 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 17 हजार से ज्यादा केस की पुष्टि हो चुकी है. चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण अब दुनिया के कई देशों में फैल चुका है. वहीं, इससे चीन की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनियों को 2019 में 4 साल में सबसे कम मुनाफा हुआ है. जानकारों के मुताबिक अमेरिका से ट्रेड वॉर के चलते चीनी फैक्ट्रियों को करारा झटका लगा है. 30 साल की सबसे कमजोर आर्थिक दौर से गुजर रहे चीन में अब औद्योगिक कंपनियों के मुनाफे में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. साथ ही, पिछले 30 दिन के दौरान चीन के शेयर बाजार में निवेशकों के 30 लाख करोड़ रुपये (42,000 करोड़ डॉलर) डूब चुके हैं.

30 दिन में डूबे 30 लाख करोड़ रुपये
नए साल की शुरुआत से ही चीन के शेयर बाजार में भारी गिरावट का दौर जारी हैं. इस दौरान शेयर बाजार 9 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गए हैं. वहीं, निवेशकों के करीब 30 लाख करोड़ रुपये इस दौरान डूब चुके हैं. वहीं, चीन की करेंसी युआन साल 2020 में अब तक 1.2 फीसदी कमजोर हो गई है.

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ING बैंक के अर्थशास्त्री आइरिस पैंग का कहना हैं कि  कोरोना वायरस (China Coronavirus) की वजह से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. साथ ही, बिजनेस एक्टिविटी में गिरावट आई है. इसी वजह से शेयर बाजार में तेज बिकवाली हो रही है.

अब क्या होगा- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीन सरकार की ओर से मार्केट में कैश बढ़ाकर और लोन में इजाफा कर मांग को बढ़ाने के प्रयास किए जा सकते हैं. लेकिन कोरोना वायरस के चलते कम से कम 2020 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार की कम ही उम्मीद है.

ये भी पढ़ें-आर्थिक सुस्ती दूर होने के मिले संकेत! नए ऑर्डर मिलने से 8 साल के टॉप पर पहुंची देश की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ  अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व की चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा है कि कोरोना वायरस चीन और अन्य देशों की आर्थिक विकास के लिए एक नया जोखिम है. फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी मुख्य ब्याज दर को जस का तस छोड़ते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था पर वायरस संक्रमण के संभावित असर को लेकर सतर्कता का इजहार किया.

पॉवेल ने मौद्रिक नीति बैठक के बाद कहा कि चीन में कम से कम निकट भविष्य में उत्पादन निश्चित तौर पर गिरेगा. मेरे खयाल से चीन के पड़ोसी देशों में उत्पादन गिर सकता है. हालांकि वायरस का प्रकोप कहां तक बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा, इस पर सटीक तरीके से कुछ कहना मुश्किल है.

30 साल के निचले स्तर पर पहुंची चीनी कंपनियों का मुनाफा-चीन में औद्योगिक मुनाफा 3.3 फीसदी गिरकर 897 अरब डॉलर पर आ गया हैं. यह 2015 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. तब चीनी कंपनियों के मुनाफे में 2.3 फीसदी की कमी आई थी. आपको बता दें कि यह आंकड़े दिसंबर 2019 तक के ही हैं.

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जानलेवा कोरोना वायरस ने निवेशकों के डुबोए 30 लाख करोड रुपये


ऐसे में जनवरी में सामने आई कोरोना वायरस जैसी महामारी के चलते स्थिति और खराब हो सकती है. अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि 2020 की पहली छमाही में चीन को बेहद खराब ग्रोथ का सामना करना पड़ सकता है.

ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर असर- चीन के वायरस का असर दुनियाभर के देशों की बिजनेस गतिविधियों पर पड़ रहा हैं. कई देशों ने पिछले 15 दिनों में चीन के लिए और चीन से एयरलाइंस सेवाएं बंद कर दी हैं. दुनियाभर की बड़ी कंपनियों ने चीन के अपने ऑपरेशंस को भी बंद कर दिया है.

जापान की ऑटो कंपनी टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन ने कहा है कि वह कम से कम नौ फरवरी तक चीन में अपने प्लांट बंद रखेगी. एप्पल को आपूर्ति करने वाली ताईवान की कंपनी हॉन हई प्रिसीजन इंडस्ट्रीज के शेयरों में नौ फीसदी से अधिक गिरावट दर्ज की गई. कंपनी ने कहा है कि वह चीन में स्थित उसके मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट 10 फरवरी तक बंद रहेंगे.

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हॉन हई प्रिसीजन इंडस्ट्रीज को ज्यादातर फॉक्सकॉन के नाम से जाना जाता है. यह दुनिया की सबसे बड़ी कांट्रैक्ट इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी है. यह आईफोन की असेंबलिंग करती है. इसके साथ ही यह फ्लैट-स्क्रीन टीवी व लैपटॉप व कई अन्य अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के गैजेट्स की भी असेंबलिंग करती है.

फॉक्सकॉन द्वारा चीन के प्लांट को अस्थायी तौर पर बंद किए जाने से टेक्नॉलॉजी कंपनियों का ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हो सकता है. चीन में फॉक्सकॉन के 10 लाख से अधिक कर्मचारी हैं. वायरस संक्रमण के मुख्य केंद्र चीन के हुबेई प्रांत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में वॉल्यूम के लिहाज से फॉक्सकॉन का सर्वाधिक योगदान है.

चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. चीन की जीडीपी में कोई भी कमी वैश्विक जीडीपी को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है. फोर्ब्स की रिपोर्ट के शुरुआती अनुमान के मुताबिक कोरोना वायरस के प्रकोप से चीन की विकास दर 0.5-1.0 फीसदी तक घट सकती है. अगर चीन की विकास दर एक फीसदी घटती है, तो इसका मतलब यह होगा कि चीन की इकोनॉमी को 136 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान होगा.

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First published: February 3, 2020, 12:58 PM IST
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