भारत-चीन तनाव के बीच चाइनीज सेंट्रल बैंक PBoC ने क्यों खरीदी Bajaj Finance में हिस्सेदारी

पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज फाइनेंस (Bajaj Finace) में हिस्सेदारी खरीदी है.
पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज फाइनेंस (Bajaj Finace) में हिस्सेदारी खरीदी है.

चीन के सेंट्रल बैंक पीबीओसी-पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (People's Bank of China) ने HDFC Limited और ICICIबैंक के बाद अब बजाज फाइनेंस में निवेश किया है. बजाज फाइनेंस में चीन के बैंक ने 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी खरीदी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 11:14 AM IST
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मुंबई. भारत और चीन तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है. चीन के सेंट्रल बैंक (Chinese Central Bank) पीबीओसी-पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC- People's Bank of China) ने एक और भारतीय कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के सरकारी पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के बाद अब बजाज फाइनेंस (Bajaj Finace) में निवेश किया है. बजाज फाइनेंस में चीन के बैंक ने 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी खरीदी है. पीपल्स बैंक की हिस्सेदारी 1 फीसदी से कम होने की वजह से स्टॉक एक्सचेंज को इस बारे में नहीं बताया गया है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन तीनों कंपनियों में चीनी सेंट्रल बैंक की हिस्सेदारी बहुत कम है कि उससे किसी तरह का खतरा नहीं हो सकता.

चीन का बैंक क्यों खरीद रहा है भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी? अंग्रेजी की वेबसाइट बिजनेस टुडे के मुताबिक, पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज फाइनेंस (Bajaj Finace) में हिस्सेदारी खरीदी है. हालांकि, ये हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है.आपको बता दें कि यह राहुल बजाज के नेतृत्व वाली बजाज फाइनेंशियल सर्विसेज की एक सहयोगी कंपनी है. पिछले महीने पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने देश में निजी क्षेत्र के दिग्गज आईसीआईसीआई बैंक में निवेश किया था.

खबर में बताया गया है कि पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने इससे पहले एचडीएफसी लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर एक फीसदी से ज्यादा कर ली थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था. बजाज फाइनेंस में निवेश के साथ ही चीन के सरकारी बैंक ने भारत में तीसरा निवेश किया है.



अब सवाल उठता है कि क्या भारत में चीनी कंपनियों के निवेश पर कोई रोक नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव की वजह से इस तरह के निवेश पर सवाल उठ रहे हैं? इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीनी सेंट्रल बैंक के पहले निवेश के बाद ही केंद्र सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले एफडीआई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के नियम सख्त कर दिए.
एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने न्यूज 18हिंदी को बताया कि चाइनीज सेंट्रल बैंक के पास काफी फंड है और वह भारत जैसे देशों की वित्तीय संस्थाओं में निवेश कर अपने पोर्टफोलियो को मजबूती देना चाहता है.

बजाज फाइनेंस भारत की सबसे बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में से एक है. उन्होंने बताया कि बैंकिंग सेक्टर में निवेश के नियमों के हिसाब से कोई भी एक निवेशक किसी बैंक में 15 फीसदी से ज्यादा वोटिंग राइट नहीं ले सकता और 5 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी लेने के लिए रिजर्व बैंक की इजाजत लेनी होती है.

चीन के सेंट्रल बैंक ने यह निवेश कब किया- इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. कोरोना संकट के बीच बजाज फाइनेंस के शेयर मार्च के 4,800 रुपये से उच्चतम स्तर से गिरकर अब करीब 2,200 रुपये पर पहुंच गए हैं

1600 से ज्यादा भारतीय कंपनियों में लगे है चीन के 7500 करोड़ रुपये-देश की 1,600 से भी अधिक भारतीय कंपनियों को अप्रैल 2016 से मार्च 2020 के दौरान चीन से एक अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ. सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. सरकार से प्रश्न किया गया था कि क्या यह तथ्य है कि भारतीय कंपनियों, विशेष रूप से स्टार्ट-अप में चीनी एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1,600 से अधिक कंपनियों ने अप्रैल 2016 से मार्च 2020 की अवधि के दौरान चीन से 102 करोड़ 2.5 लाख डॉलर (1.02 अरब डॉलर) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया.
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