देश में 5G मोबाइल नेटवर्क के ट्रायल में चीनी कंपनियों को नहीं मिला मौका, जल्‍द होगा उपलब्‍ध

देश में जल्‍द शुरू हो रहे 5जी मोबाइल नेटवर्क ट्रायल में चीन की कंपनियों को मौका नहीं दिया गया है.

देश में जल्‍द शुरू हो रहे 5जी मोबाइल नेटवर्क ट्रायल में चीन की कंपनियों को मौका नहीं दिया गया है.

टेलिकॉम कंपनियों को 2 से 3 दिन में 5जी मोबाइल नेटवर्क ट्रायल (5G Network Trail) के लिए स्पेक्ट्रम उपलब्ध करा दिया जाएगा. ये कंपनियां ऑरिजिनल इक्विमेंट मैन्युफैक्चरर और टेक कंपनी एरिक्शन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट के साथ गठजोड़ करेंगी. रिलायंस जियो इंफोकॉम (Reliance Jio Infocom) स्वदेशी तकनीक के साथ 5जी मोबाइल नेटवर्क का ट्रायल करेगी.

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नई दिल्‍ली. अगर आप 5जी मोबाइल नेटवर्क (5G Mobile Network) का बेसब्री से इंतजार कर रहे है तो आपके लिए खुशखबरी है. भारत में 5जी मोबाइल नेटवर्क अब महज एक कदम की दूरी पर है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने 5जी के ट्रायल की मंजूरी दे दी है. दूरसंचार कंपनियों (Telecom Companies) को 5जी ट्रायल के लिए इस सप्ताह 5जी स्पेट्रम उपलब्ध कराया जाएगा. इसका मतलब है कि दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियां रिलायंस जियो (Jio), भारती एयरटेल (Airtel), वोडोफोन-आइडिया (Vi) और एमटीएनएल-बीएसएनएल (MTNL-BSNL) को ट्रायल के लिए 5जी स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाएगा.

6 माह के लिए 5जी स्पेक्ट्रम का होगा ट्रायल

News18 को मिली जानकारी के मुताबिक, अगले 2 से 3 दिनों में टेलिकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम उपलब्ध करा दिया जाएगा. ये कंपनियां ऑरिजिनल इक्विमेंट मैन्यूफेक्चरर और तकनीकी प्रदाता कंपनियों एरिक्शन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट के साथ गठजोड़ करेंगी. यहीं नहीं, रिलायंस जियो इंफोकॉम स्वदेशी तकनीक के साथ 5जी मोबाइल नेटवर्क का ट्रायल करेगी. मोबाइल उपभोक्ताओं को बहुत जल्द बहुत तेज गति से चलने वाले 5जी नेटवर्क की सेवा मिलने जा रही है. दूरसंचार विभाग ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियों को 6 माह के लिए 5 जी स्पेक्ट्रम का ट्रायल करने की इजाजत दी जा रही है. इस अवधि में वे दो महीने भी शामिल होंगे, जिसमें इसके लिए जरूरी उपकरणों की खरीद और सेटिंग की जानी है.

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ट्रायल से चीनी कंपनियों के हाथ लगी निराशा

दूरसंचार विभाग ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियों को ना सिर्फ शहरों बल्कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में भी 5जी मोबाइल नेटवर्क का ट्रायल करना होगा. इसके पीछे मकसद साफ है कि पूरे देश में एक साथ 5जी नेटवर्क का लाभ उपलब्ध कराया जा सके. कोरोना वायरस और भारत-चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की नापाक हरकत को शायद ही भुलाया जा सकता है. यहीं नहीं, चीनी कंपनियों की नापाक इरादे से भारत में काम करने के मामले भी समय-समय पर आते रहे हैं. इसकी वजह से भारतीय आईटी विभाग ने कई चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था. अब भारत सरकार ने चीनी कंपनियों जेडटीई और हुवैई को 5जी ट्रायल से भी बाहर रखना मुनासिब समझा. दूरसंचार विभाग ने कहा है कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में ही 5जी स्पेक्ट्रम का ट्रायल किया जाएगा.

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व्‍यावसायिक इस्‍तेमाल किया तो होगी कार्रवाई

विभाग ने यह भी कहा है कि 4जी की तुलना में 5जी से 10 गुना ज्‍यादा गति से डाउनलोड किया जा सकेगा. साथ ही स्पेक्ट्रम की एफिसिएंसी भी 3 गुना ज्यादा होगी. दूरसंचार विभाग ने कहा है कि 5जी का ट्रायल अलग नेटवर्क में किया जाएगा ना कि मौजूदा नेटवर्क में. 5जी नेटवर्क का ट्रायल गैर-व्यवसायिक आधार पर किया जएगा. उम्मीद की जा रही है कि 1800 MHz, 2500 MHz के साथ 800 MHz और 900 MHz बैंड पर 5जी नेटवर्क कवर होगा. कंपनियों को 700 मेगाहर्ट्ज पर भी ट्रायल करने के लिए स्‍पेक्‍ट्रम उपलब्ध कराया जाएगा. टेलिकॉम कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे इन एयरवेव को सिर्फ ट्रायल के लिए इस्तेमाल करेंगे. अगर वे इसका व्यावसायिक कामकाज के लिए इस्तेमाल शुरू करते हैं तो इसे शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा और उन पर गंभीर कार्रवाई भी की जा सकती है.

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5जी के आने से होंगे ये क्रांतिकारी बदलाव

5जी नेटवर्क का व्यावसायिक इस्तेमाल के बाद मेडिकल फैसिलिटी, स्मार्ट शहरों को तकनीक से जोड़ने, वर्चुअल बैंकिंग, गेम और स्पोर्ट्स को 360 डिग्री से आनंद लेने, ऑगमेंटेड रियलिटी, बडे डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को काफी बढ़ावा मिलेगा. टेली मेडिसिन और टेली एजुकेशन को भी नये पंख लगेंगे. ड्रोन के जरिए भी कृषि, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में नई सीढियां चढ़ने का मौका मिलेगा. वियावी (VIAVI's) के डेटा के मुताबिक, दुनिया के 34 देशों के 378 शहरों में 5जी नेटवर्क उपलब्ध है. पिछले साल तक दक्षिण कोरिया के 85 शहर, चीन के 57 शहर, अमेरिका के 50 शहर और यूके के 31 शहरों में 5जी मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध था.
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