लाइव टीवी
Elec-widget

आपके पैसों को सेफ करने से जुड़े बिल को मिली मंजूरी, यहां जानिए इसके बारे में सब कुछ

भाषा
Updated: November 29, 2019, 10:40 AM IST
आपके पैसों को सेफ करने से जुड़े बिल को मिली मंजूरी, यहां जानिए इसके बारे में सब कुछ
चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 को मिली संसद की मंजूरी

लोगों तक बेहतर वित्तीय पहुंच बनाने के मकसद से लाए गए चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 (Chit Fund (Amendment) Bill, 2019) को गुरुवार को संसद की मंजूरी मिल गई.

  • भाषा
  • Last Updated: November 29, 2019, 10:40 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. चिटफंड सेक्टर के सुव्यवस्थित विकास में आ रही अड़चनों को दूर करने और लोगों तक बेहतर वित्तीय पहुंच बनाने के मकसद से लाए गए चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 (Chit Fund (Amendment) Bill, 2019) को गुरुवार को संसद की मंजूरी मिल गई.

चिटफंड की निवेश सीमा को 3 गुना बढ़ाने और ‘फोरमैन’ के कमीशन को 7 प्रतिशत करने के प्रावधान वाले इस विधेयक को आज राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. लोकसभा इस विधेयक को 20 नवंबर को पारित कर चुकी है. उच्च सदन में इस विधेयक पर हुई चर्चा पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई.

इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए ठाकुर ने कहा कि गरीबों से जुड़ा पैसा सुरक्षित रहना चाहिए. उन्हें उनका पैसा वापस मिलना चाहिए, इसमें कोई अवरोध नहीं होना चाहिए. ठाकुर ने कहा कि पोंजी (Ponzi) और चिटफंड में अंतर है. पोंजी अवैध होता है जबकि चिटफंड वैध कारोबार है.

चिटफंड में निवेश की सीमा बढ़ी

उन्होंने कहा कि विधेयक में चिटफंड की निवेश सीमा को तीन गुना बढ़ाने तथा ‘फोरमैन’ के कमीशन को 7 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है. गौरतलब है कि ‘फोरमैन’ का आशय उस व्यक्ति से है जो चिट चलाता है. वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि इसके तहत व्यक्ति के रूप में चिट की मौद्रिक सीमा को 1 लाख रूपये से बढ़ाकर 3 लाख रूपये किया गया है जबकि फर्म के लिये इसे 6 लाख रूपये से बढ़ाकर 18 लाख रूपये कर दिया गया है.

ये भी पढ़ें: यात्रीगण ध्यान दें! ऐसे बुक करेंगे ट्रेन टिकट तो सस्ता होगा रेल का सफर

गौरतलब है कि चिटफंड सालों से छोटे कारोबारों और गरीब वर्ग के लोगों के लिए निवेश का स्रोत रहा है लेकिन कुछ पक्षकारों ने इसमें अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी जिसके बाद सरकार ने एक परामर्श समूह बनाया. 1982 के मूल कानून को चिटफंड के विनियमन का उपबंध करने के लिए लाया गया था. संसदीय समिति की सिफारिश पर कानून में संशोधन के लिए विधेयक लाया गया. उक्त विधेयक पिछली लोकसभा सत्र में पेश किया गया था लेकिन लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही यह निष्प्रभावी हो गया. विधेयक में चिटफंड की परिभाषा को पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है.
Loading...

इससे पहले विधेयक पर चर्चा में हिस्सा ले रहे ज्यादातर सदस्यों ने चिट फंड में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों के धन की सुरक्षा के लिए सरकार से समुचित उपाय करने को कहा.

क्या है चिटफंड?
चिटफंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिटफंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे. चिटफंड एक्ट 1982 के सेक्शन 61 के तहत चिट रजिस्ट्रार की नियुक्ति सरकार के द्वारा की जाती है. चिटफंड के मामलों में कार्रवाई और न्याय निर्धारण का अधिकार रजिस्ट्रार और राज्य सरकार का ही होता है.

ये भी पढ़ें: साल के 365 दिन खुला रहता हैं ये बैंक, 24 घंटे में कभी भी कर सकते हैं लेनदेन

चिटफंड कंपनियां गैर-बैंकिंग कंपनियों की श्रेणी में आती हैं. ऐसी कंपनियों को किसी खास योजना के तहत खास अवधि के लिए रिजर्व बैंक और सेबी की ओर से आम लोगों से मियादी (फिक्स्ड डिपाजिट) और रोजाना जमा (डेली डिपाजिट) जैसी योजनाओं के लिए धन उगाहने की अनुमति मिली होती है. जिन योजनाओं को दिखाकर अनुमति ली जाती है, वह तो ठीक होती हैं. लेकिन इजाजत मिलने के बाद ऐसी कंपनियां अपनी मूल योजना से इतर विभिन्न लुभावनी योजनाएं बनाकर लोगों से धन उगाहना शुरू कर देती हैं.

ये भी पढ़ें: साल के 365 दिन खुला रहता हैं ये बैंक, 24 घंटे में कभी भी कर सकते हैं लेनदेन

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 28, 2019, 6:53 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...