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अगले महीने से महंगी हो सकती है रसोई गैस, चुकाने होंगे इतने पैसे ज्यादा

News18Hindi
Updated: September 21, 2018, 2:44 PM IST
अगले महीने से महंगी हो सकती है रसोई गैस, चुकाने होंगे इतने पैसे ज्यादा
रसोई गैस हुई महंगी: महंगाई की मार से जनता परेशान है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतेहाशा बढ़ोत्तरी के बाद घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी) के भी दाम बढ़ा दिए गए हैं. सब्सिडी गैस सिलेंडर की कीमत में 2.89 रुपये बढ़ाए गए हैं. सब्सिडी गैस सिलेंडर अब 499 रुपये 51 पैसे के बजाए 502 रुपए 40 पैसे का मिलेगा. वही गैर सब्सिडी सिलेंडर की कीमत में 59 रुपए प्रति सिलेंडर का इजाफा हुआ है. यह कीमतें रविवार रात 12 बजे के बाद से लागू हो चुकी हैं. गैर सब्सिडी सिलेंडर की कीमत 820 से बढ़कर 879 रुपए प्रति सिलेंडर हो गई है.

देश भर में एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं वहीं दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत भी काफी कम हो गई है. जिसका असर अब सीएनजी और पीएनजी की कीमतों पर पड़ने वाला है.

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  • Last Updated: September 21, 2018, 2:44 PM IST
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देश भर में एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं वहीं दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत भी काफी कम हो गई है. जिसका असर अब सीएनजी और पीएनजी की कीमतों पर पड़ने वाला है. घरेलू नैचरल गैस की कीमतों में अक्टूबर में बदलाव होने वाला है जिसके बाद इसकी कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है.

घरेलू फील्ड्स से निकलने वाली गैस के बेस प्राइस में 14 फीसदी यानी 3.5 डॉलर (करीब 252 रुपये) प्रति यूनिट बढ़ोतरी का अनुमान है. मार्च 2016 में गैस की कीमतों में सर्वाधिक 3.82 डॉलर (अभी के हिसाब से करीब 275.17 रुपये) प्रति यूनिट बढ़ोतरी हुई थी. नैचरल गैस की कीमतें गैस सरप्लस मार्केट्स जैसे यूएस, कनाडा, यूके और रूस में मौजूद ऐवरेज रेट्स के आधार पर हर छह महीने में तय की जाती हैं.

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कमजोर रुपये की वजह से सभी शहरों में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. रुपये में गिरावट से सीएनजी और पीएनजी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नैचरल गैस महंगी हो जाती है जिससे वे कीमत बढ़ाने को मजबूर होते हैं. दिल्ली में सीएनजी की कीमतों को तीन बार बढ़ाया है. तीन बार बढ़ोतरी में सीएनजी की कीमत कुल 2.89 रुपये प्रति किलो ज्यादा हो गई है. इसमें से आधी बढ़ोतरी या 1.43 रुपये प्रति किलो रुपये में गिरावट के वजह से हुई है.



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नैचरल गैस की बेस प्राइस डॉलर में होती है और रुपये में गिरावट से उनका खर्च बढ़ जाता है. आईजीएल ने रुपये में गिरावट के असर से निपटने के लिए सीएनजी और पीएनजी की कीमतें आखिरी बार 1 सितंबर को बढ़ोतरी की थी. सीएनजी की कीमत में 63 पैसे प्रति किलो और पीएनजी की कीमतों में 1.11 प्रति यूनिट बढ़ोतरी हुई थी. जब सरकार ने घरेलू फील्ड्स से निकलने वाली गैस की कीमतों में 6 फीसदी बढ़ोतरी की थी तो आईजीएल ने अप्रैल में सीएनजी की कीमत 90 पैसे प्रति किलो बढ़ाई थी लेकिन पीएनजी की कीमत में इजाफा नहीं हुआ था. इसके बाद 28-29 मई को गिरते रुपये के असर से निपटने के लिए सीएनजी की कीमत में 1.36 रुपये प्रति किलो इजाफा हुआ था.


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नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बढ़े थे दाम
दिल्ली के पड़ोसी शहरों जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कीमतों में थोड़ा ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी. इसकी वजह राज्य कर का ज्यादा होना था. आईजीएल के कर्मचारियों का दावा है कि कीमतों में संशोधन का गाड़ियों के प्रति किलोमीटर रनिंग कॉस्ट पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. रनिंग कॉस्ट की बात की जाए तो बढ़ोतरी के बाद भी वह पेट्रोल के मुकाबले 60 फीसदी और डीजल के मुकाबले 40 फीसदी सस्ता होगा. भारत में आधे से ज्यादा गैस का आयात होता है जिसकी कीमत घरेलू कीमतों की दोगुनी से ज्यादा होती है. भारत में गैस की कीमत इंटरनैशल हब के औसत मूल्य के आधार पर तय की जाती है.

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First published: September 21, 2018, 12:44 PM IST
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