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कोयले की ढुलाई का रेलवे बना रहा रिकॉर्ड, फिर भी संकट से Coal Crisis से जूझ रहे बिजली संयंत्र

कोयले की ढुलाई का रेलवे बना रहा रिकॉर्ड, फिर भी संकट से Coal Crisis से जूझ रहे बिजली संयंत्र

केंद्र सरकार का कहना है कि हमारे पास कोयले का पर्याप्‍त भंडार मौजूद है.

केंद्र सरकार का कहना है कि हमारे पास कोयले का पर्याप्‍त भंडार मौजूद है.

भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने इस साल अब तक 3.09 करोड़ टन कोयले की ढुलाई (Coal Transportation) की है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2.40 करोड़ टन था. हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्‍त कोयला भंडार मौजूद है.

    नई दिल्‍ली. देशभर के बिजली संयंत्र (Power Plants) कोयले के संकट (Coal Crisis) से जूझ रहे हैं. भारत में करीब 70 फीसदी बिजली का उत्पादन (Electricity Production) कोयले से चलने वाले संयंत्रों से ही होता है. देशभर के आधे बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार (Coal Stock) न के बराबर बचा है. इन संयंत्रों को ज्‍यादातर कोयले की आपूर्ति रेलवे की मालगाड़ियों (Goods Trains) से की जाती है. अगर भारतीय रेलवे (Indian Railways) के आंकड़ों पर गौर करें तो अलग ही कहानी सामने आती है. इस महीने रेलवे ने करीब 62 लाख टन कोयले की ढुलाई की है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 57.7 लाख टन ही था.

    रेलवे ने इस साल अब तक 3.09 करोड़ टन कोयले की ढुलाई की है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2.40 करोड़ टन था. रेलवे फिलहाल हर दिन 15.9 लाख टन कोयले की ढुलाई कर रहा है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 14 लाख टन था. रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना कोयले की ढुलाई में करीब 13 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है. फिर भी पावर प्लांट्स में कोयले की कमी के पीछे बड़ी वजह पावर कंपनियों की प्लानिंग में कमी हो सकती है. एक तरफ देश में अर्थव्यवस्था के विकास के साथ बिजली की मांग में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पावर कंपनियों ने इसे ध्यान में रखकर अपना स्‍टॉक नहीं बढ़ाया. वहीं, विदेशी कोयले की कीमत बढ़ने से आयात में भी कमी आई है.

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    बिजली कंपनियों को तैयार करना होगा कोयला भंडार
    कोयला, बिजली और रेल मंत्रालय ने कोयले की कमी के संकट को देखते हुए पिछले महीने बैठक भी की थी. इसमें तय किया गया कि बिजली कंपनियों को दूरी आधारित भंडार बनाना होगा यानि जो प्लांट कोल फील्‍ड से जितनी दूर है, उन्हें उतना ज्‍यादा स्टॉक रखना होगा ताकि संकट के समय पहले से तैयार भंडार का इस्तेमाल किया जा सके. इसके अलावा कंपनियों को मौसम के हिसाब से भी स्टॉक बनाना होगा. मानसून के दौरान कोयले की खुदाई से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए पहले से स्टॉक बढ़ाना होगा. साथ ही ज्‍यादा मांग वाले सीजन के लिहाज से भी स्टॉक तैयार करना होगा.

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    रेलवे को तैयारियों में अभी लग सकता है कुछ समय
    भारतीय रेलवे ने इस बैठक के दौान वादा किया था कि मालगाड़ियों या रेक की कमी नहीं होने दी जाएगी. रेलवे अपने कोल लोडिंग-अनलोडिंग टाइम को भी कम करेगा. साथ ही रेलवे कोयले की ढुलाई की अपनी क्षमता भी बढ़ाएगा. हालांकि, इन सारी तैयारियों में अभी समय लगेगा और तब तक कोशिश की जा रही है कि बिजली कंपनियों की जरूरतों को पूरा किया जा सके. हालांकि, इसका नुकसान दूरदराज के दूसरे छोटे-छोटे उद्योगों को उठाना पड़ सकता है. ईंट, ग्लास और अल्युमिनियम जैसे कई उद्योगों को कोयले की कमी के संकट से जूझना पड़ सकता है.

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    केंद्र ने कहा, हमारे पास है कोयले का पर्याप्‍त भंडार
    केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने चीन (China) में कोयले की कमी और भारत में कोयले की बढ़ती मांग पर मंगलवार को कहा कि देश में कोयले का पर्याप्त भंडार उपलब्‍ध है. इस भंडार से सभी तरह की मांगों की पूर्ति की जा सकती है. उन्होंने कहा कि कोयले की मांग बढ़ी है और हम इस मांग को पूरा कर रहे हैं. हम मांग में और बढ़ोतरी को पूरा करने की स्थिति में हैं. फिलहाल, हमारे पास मौजूद कोयले का स्टॉक 4 दिन तक चल सकता है. उन्‍होंने जोर देकर कहा कि चीन की तरह भारत में कोयला संकट नहीं है.

    Tags: Coal block allocation, Coal Crisis, Coal india, Coal mines, Electricity generation, Indian Railways, Ministry Of Power, Modi government

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