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क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस ने भारत में रोकी ट्रेडिंग, CEO ने RBI पर लगाए गंभीर आरोप

यूएस बेस्ड क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस (Coinbase) ने भारत में UPI से ट्रेडिंग रोक दी है.

यूएस बेस्ड क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस (Coinbase) ने भारत में UPI से ट्रेडिंग रोक दी है.

कॉइनबेस (Coinbase) पर UPI के जरिए ट्रेंडिंग को अस्थाई तौर पर रोक दिया गया है. कॉइनबेस के को-फाउंडर और चीफ एग्जिक्यूटिव ब्रायन आर्मस्ट्रॉन्ग ने इस मामले में सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

नई दिल्ली. यूएस बेस्ड क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस (Coinbase) ने भारत से अस्थाई तौर पर ट्रेडिंग को रोक दिया है. भारत में लॉन्चिंग के कुछ ही दिनों के भीतर कंपनी की तरफ से ऐसा फैसला लिया गया है. कॉइनबेस के को-फाउंडर और चीफ एग्जिक्यूटिव ब्रायन आर्मस्ट्रॉन्ग ने इस मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

ब्रायन आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा, हमें “रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से अनौपचारिक दबाव (Informal Pressure)” की वजह से ऐसा करना पड़ा है. 10 मई को कंपनी के पहली तिमाही की अर्निंग कॉल के दौरान ब्रायन आर्मस्ट्रॉन्ग ने ये तमाम बातें कहीं. इस बारे में CNBC-TV18 की तरफ से आरबीआई से बात करने की कोशिश की, लेकिन अभी उधर से उत्तर आना बाकी है.

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NPCI को नहीं थी जानकारी
कॉइनबेस ने भारत में अपनी क्रिप्टो ट्रेडिंग सर्विस 7 अप्रैल को शुरू की थी. यह सर्विस अपने क्लाइंट्स को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) के माध्यम से क्रिप्टो खरीदने की अनुमति देती थी. नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा यह कहने के बाद कि “नहीं पता कि कोई क्रिप्टो एक्सचेंज यूपीआई का इस्तेमाल कर रही है”, कॉइनबेस ने भारत में यूपीआई के जरिए क्रिप्टो ट्रेडिंग को रोक दिया है. मतलब UPI ऑपरेशन्स पर रोक लगा दी है.

“कुछ तत्व हैं, जो सकारात्मक नहीं दिखते”
कल मतलब 10 मई को ब्रायन आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा, आरबीआई का अनौपचारिक दबाव भारत के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लंघन हो सकता है, जिसने क्रिप्टोकरेंसी पर केंद्रीय बैंक के प्रतिबंध को उलट दिया था. उन्होंने कहा, “भारत इस मायने में एक यूनिक मार्केट है कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि वे क्रिप्टो पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते हैं, लेकिन सरकार में कुछ ऐसे तत्व हैं, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक भी शामिल है, जो इस पर उतना सकारात्मक नहीं दिखता है.” आगे उन्होंने कहा, “और इसलिए वे प्रेस में इसे शैडो-बैन बताते हैं. मूल रूप से, वे इन भुगतानों में से कुछ को अक्षम (डिसेबल) करने का प्रयास करने के लिए पर्दे के पीछे से सॉफ्ट प्रैशर डाल रहे हैं, जिसमें कि UPI के माध्यम से भुगतान भी हो सकता है.”

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क्या फिर से भारत में आएंगे?
कंपनी के सीईओ आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ‘उनके’ साथ काम करने और इसे रिलॉन्च करने की है. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हम पेमेंट्स के अन्य तरीकों के साथ फिर से लॉन्च कर सकते हैं. यही वह तरीका है, जिस पर आगे बढ़ा जा सकता है.” उन्होंने कुछ अन्य देशों के साथ फिर से भारत में इसे रि-लॉन्च करने को लेकर उम्मीद जतायी.

Tags: Cryptocurrency, RBI

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