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Moody's ने कहा- अगले साल भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर होंगे कारोबारी हालात

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि कि तेज गिरावट के बाद मांग में सुधार होना शुरू हो गया है
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि कि तेज गिरावट के बाद मांग में सुधार होना शुरू हो गया है

कोरोना संकट के बीच रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody's) ने कहा है कि अगले साल भारतीय कंपनियों के लिए परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं.

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नई दिल्ली. लॉकडाउन (Lockdown) समाप्त होने के बाद भारत में आर्थिक गतिविधियों (Economic Activity) ने रफ्तार पकड़ी है. मांग में सुधार होने से विभिन्न क्षेत्रों में कमाई में भी वृद्धि हो रही है. इस बीच रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody's) ने बुधवार कहा है कि इसके चलते अगले साल भारतीय कंपनियों के लिए परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं.

मांग में सुधार होना शुरू, बढ़ेगी कंपनियों की आय
एजेंसी ने कहा कि तेज गिरावट के बाद मांग में सुधार होना शुरू हो गया है. इससे अधिकांश कंपनियों की आय बढ़ेगी. वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियों के पास वित्त पोषण के स्रोत उपलब्ध रहेंगे, जबकि कयासों वाले क्षेत्रों को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

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मूडीज की विश्लेषक श्वेता पटौदिया ने कहा, ''चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 10.6 प्रतिशत की गिरावट के बाद व्यापक स्तर पर मांग में सुधार तथा निम्न तुलनात्मक आधार के दम पर अगले वित्त वर्ष में जीडीपी में 10.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की जा सकती है.''



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मूडीज ने कहा कि 2021 में भारतीय कॉरपोरेट्स के लिए स्थितियां सुधरेंगी, क्योंकि आर्थिक गतिविधियों में लॉकडाउन हटने के बाद तेजी आई है और विभिन्न क्षेत्रों में मांग में व्यापक सुधार देखा गया है.

केयर रेटिंग्‍स ने कहा, बैंकों के कर्ज कारोबार में रहेगी नरमी
इससे पहले मूडीज ने कहा था कि उभरते बाजारों में 2021 के लिए बैंकों का परिदृश्य निगेटिव है. इसके उलट इंश्‍योरेंस कंपनियों के लिए यह स्थिर बना रहेगा. एशिया प्रशांत क्षेत्र में बैंकों की बढ़ती नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) और इंश्‍योरेंस कंपनियों का उतार-चढ़ाव वाला निवेश पोर्टफोलियो चिंता का विषय है. अगले दो साल के दौरान एशिया में बैंकों की पूंजी घटेगी. नया निवेश नहीं मिलने पर भारत के साथ ही श्रीलंका के बैंकों की पूंजी भी तेजी से गिरेगी. केयर रेटिंग्‍स ने कहा कि वैश्विक महामारी से पैदा हुई अनिश्चिता के चलते बैंकों के कर्ज कारोबार की वृद्धि दर नरम रहने का अनुमान है.
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