CEA कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन बोले- FY22 में 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल होने योग्य

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन

कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने शनिवार को कहा कि एलआईसी (LIC) के प्रस्तावित आईपीओ (IPO) से ही सरकार को एक लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है.

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नई दिल्ली. देश के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन (Krishnamurthy Subramanian) ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 (FY22) का 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश (Disinvestment) लक्ष्य काफी हद तक हासिल होने योग्य है.

LIC के आईपीओ से एक लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद

सुब्रमण्यम ने शनिवार को कहा कि एलआईसी के प्रस्तावित आईपीओ से ही सरकार को एक लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. सीईए ने कहा कि आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति को लक्ष्य में रखने का जो लक्ष्य दिया गया है, उससे उतार-चढ़ाव तथा मुद्रास्फीति के स्तर को कम करने में मदद मिली है. बता दें कि आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) को 31 मार्च, 2021 तक वार्षिक मुद्रास्फीति को चार फीसदी (दो फीसदी ऊपर या नीचे) पर रखने का लक्ष्य दिया गया है.

जन स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक वर्चुअल सम्मेलन में सुब्रमण्यम ने कहा कि 2021-22 के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य वास्तव में 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष के 2.10 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का शेष हिस्सा है.
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बीपीसीएल के निजीकरण से 75,000 से 80,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि इसमें बीपीसीएल का निजीकरण और एलआईसी का आईपीओ महत्वपूर्ण होंगे. अनुमानों के अनुसार बीपीसीएल के निजीकरण से 75,000 से 80,000 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं. एलआईसी के आईपीओ से ही एक लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. विनिवेश के ये आंकड़े काफी हद तक हासिल होने योग्य हैं. इनमें से कई पर काम शुरू हो गया है. अगले वित्त वर्ष में इन्हें पूरा कर लिया जाएगा.



और बैंकों की जरूरत

सुब्रमण्यम ने निजीकरण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का भी उल्लेख किया. प्रधानमंत्री ने पिछले महीने कहा था कि सरकार का काम व्यापार करना नहीं है और उनका प्रशासन चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश को प्रतिबद्ध है. चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने कहा कि भारत को अपनी वृद्धि की क्षमता को पूरा करने के लिए और बैंकों की जरूरत है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका की आबादी भारत की एक-तिहाई है लेकिन वहां 25,000 से 30,000 बैंक हैं.

अर्थव्यवस्था के 10 फीसदी से ज्यादा की दर से बढ़ने की उम्मीद

भारत की दीर्घावधि की वृद्धि पर उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 10 फीसदी से ज्यादा की दर से बढ़ने की उम्मीद है. 2022-23 में यह घटकर 6.5 से 7 फीसदी रह सकती है. उसके बाद अर्थव्यवस्था 7.5 से 8 फीसदी की दर से बढ़ेगी.
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