ग्राहकों को धोखा देने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना, मिलावट पर होगी उम्रकैद

अगर कोई कंपनी झूठा या भ्रामक प्रचार करती है जो उपभोक्ता के हित के खिलाफ है तो उसे दो साल की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.

News18Hindi
Updated: December 21, 2018, 7:12 PM IST
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Updated: December 21, 2018, 7:12 PM IST
गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर सरकार सख्त कदम उठाया है. गुरुवार को ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए ज्यादा कड़े प्रावधानों वाला उपभोक्ता संरक्षण विधेयक (Consumer Protection Bill 2018) 2018 को लोकसभा में हंगामे के बीच सरकार ने पारित कर दिया है. इस बिल के तहत अगर कोई कंपनी झूठा या भ्रामक प्रचार करती है जो उपभोक्ता के हित के खिलाफ है तो उसे दो साल की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.

अपराध दोहराए जाने पर जुर्माने की राशि 50 लाख रुपये तक और कैद की अवधि पांच साल तक हो जाएगी. साथ ही, मिलावट करते हुए पाए जाने पर उम्रकैद हो सकती है. इसके अलावा एक एजेंसी बनाई जाएगी जो ग्राहकों के हितों का ध्यान रखेगी और कंपनियों पर कार्रवाई करेगी.

अमेरिका की तरह भारत में बनेगी नई एजेंसी- नए बिल के तहत सरकार अमेरिकी तर्ज पर एक ऐसी एजेंसी का गठन करने जा रही है, जो देश के हर कंज्यूमर के अधिकार का ख्याल रखेगी. जरूरत पड़ने पर ये एजेंसी कंज्यूमर के साथ ठगी करने वाली कंपनी पर जुर्माने के साथ-साथ कंपनी को सामान बाजार से वापिस बुलाने का आदेश भी दे सकेगी.(ये भी पढ़ें-आज ही निपटा लें अपने जरूरी काम, कल से 5 दिन तक बंद रहेंगे बैंक)

अब क्या होगा- इस बिल को राज्यसभा में पास होगा. इसके बाद मंत्रालय इसको नोटिफाई करेगा.

कंज्यूमर बना किंग


(1) विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने बताया कि 32 साल बाद उपभोक्ता संरक्षण कानून में कोई बदलाव किया गया है. यह विधेयक दो बार स्थायी समिति के पास भेजा जा चुका है. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को लागू कराने के लिए तीन स्तरीय नियामक की व्यवस्था की गयी है. सबसे ऊपर राष्ट्रीय आयोग, उसके नीचे राज्य आयोग और सबसे नीचे स्तर पर जिला आयोग होंगे. केंद्रीय आयोग का आदेश नहीं मानने पर छह महीने तक की कैद या 20 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. (ये भी पढ़ें-कच्चे तेल में गिरावट से पेट्रोल-डीज़ल ही नहीं ये चीजें भी होती हैं सस्ती!)

(2) जिला आयोग के आदेश के खिलाफ राज्य आयोग में और राज्य आयोग के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय आयोग में अपील की जा सकती है. राष्ट्रीय आयोग के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकेगी. असामान्य परिस्थितियों को छोड़कर अपील आदेश के 30 दिन के भीतर करनी होगी. (ये भी पढ़ें-ड्राइविंग लाइसेंस होने के बावजूद भी आपको हो सकती है जेल, मत करें ये गलती)
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(3) अगर उपभोक्ता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है तो छह महीने तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना, यदि उपभोक्ता को मामूली स्वास्थ्य नुकसान पहुंचा है तो एक साल तक की कैद और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा.स्वास्थ्य नुकसान की स्थिति में सात साल तक की कैद और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना तथा उपभोक्ता की मृत्यु की स्थिति में कम से कम सात साल और अधिक से अधिक आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने की व्यवस्था है.(ये भी पढ़ें-अचानक नौकरी जाने पर ESIC से मिल सकती है 90 दिनों की सैलरी, जानिए क्या करना होगा?)

(4) विधेयक में ई-कॉमर्स और डायरेक्ट सेलिंग में अनुचित व्यवहार को रोकने तथा इन मामलों में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को समुचित कदम उठाने का अधिकार दिया गया है.(ये भी पढ़ें-IRCTC का ऑफर! 2490 रुपये में करें वैष्णो देवी की यात्रा, जानें सबकुछ)
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