अब विज्ञापनों में झूठे दावे करने पर जेल जाएंगे सेलेब्रिटीज! मोदी सरकार का नया बिल

अब विज्ञापनों में झूठे वादे करने या गलत जानकारी देने पर कंपनियां, सर्विस प्रोवाइडर्स और तक कि उस विज्ञापन को एंडोर्स करने वाले सेलेब्रिटीज को भी सजा हो सकती है.

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 1:02 PM IST
अब विज्ञापनों में झूठे दावे करने पर जेल जाएंगे सेलेब्रिटीज! मोदी सरकार का नया बिल
अब विज्ञापनों में झूठे दावे करने पर जेल जाएंगे सेलेब्रिटीज
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Updated: July 31, 2019, 1:02 PM IST
अब विज्ञापनों में झूठे वादे करने या गलत जानकारी देने पर कंपनियां, सर्विस प्रोवाइडर्स और तक कि उस विज्ञापन को एंडोर्स करने वाले सेलेब्रिटीज को भी सजा हो सकती है. इन चीजों का दोषी पाए जाने पर जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है. दरअसल, मंगलवार को लोकसभा में उपभोक्ता संरक्षण बिल 2019 (Consumer Protection Bill 2019) पास कर दिया गया है. इस बिल में प्रावधान रखा गया है कि कोई भी विज्ञापन चाहे वो- प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन, आउटडोर, ई-कॉमर्स, डायरेक्ट सेलिंग या टेलीमार्केटिंग किसी भी माध्यम से किया जा रहा हो, अगर इसमें गलत जानकारी दी जाएगी तो ये अपराध की श्रेणी में आएगा.

इस बिल में ऐसे विज्ञापन या मिसलीडिंग ऐड्स को ऐसे परिभाषित किया गया है, जिसमें किसी भी प्रॉडक्ट या सर्विस की झूठी जानकारी देना, झूठी गारंटी देना, कंज्यूमर्स को प्रॉडक्ट के नेचर, सब्सटेंस, क्वांटिटी या क्वालिटी को लेकर फुसलाना या जानबूझकर सर्विस प्रोवाइडर या मैन्युफैक्चरर की ओर से कोई जानकारी छुपाई जाए. इस बिल के तहत दिल्ली में सरकार की ओर से नियुक्त किए गए एक चीफ कमिश्नर की अध्यक्षता में एक सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो उपभोक्ता के अधिकारों के हनन, विज्ञापन के अनैतिक तरीके या गलत दावे करने वाले मिसलीडिंग ऐड्स को रेगुलेट करेगी.

ये है सजा का प्रावधान
इस बिल के प्रावधान के मुताबिक, सर्विस प्रोवाइडर्स को 10 लाख रुपये के जुर्माने के साथ अधिकतम 2 साल की जेल की सजा हो सकती है. वहीं सेलेब्रिटीज को 10 लाख रुपये का जुर्माना झेलना पड़ सकता है. वहीं, बार-बार ये गलती करने पर अथॉरिटी उन पर 50 लाख रुपये के जुर्माने के साथ-साथ 5 साल तक जेल की सजा दे सकती है.

इतना ही नहीं, अथॉरिटी किसी सेलेब्रिटी के विज्ञापन एंडोर्स करने पर एक साल तक की रोक भी लगा सकती है. वहीं बार-बार यह गलती करने पर यह रोक तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है.

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हालांकि, अगर विज्ञापन एंडोर्स करने वाले ये साबित कर देते हैं कि उन्होंने दावों को परखा है तो उन्हें इससे छूट मिल सकती है. तब मैन्युफैक्चरर्स और एंडोर्सर्स के उन झूठे दावों को हटाने या ऐड को मॉडिफाई करने में असफल रहने पर अथॉरिटी उन पर कार्रवाई करेगी.
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फिलहाल, ये बिल लोकसभा में पास हुआ है, इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा. वहां से मंजूरी मिलने के बाद ये कानून बन जाएगा.

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First published: July 31, 2019, 12:28 PM IST
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