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बाजार की गिरावट ने बिगाड़ा सरकार का गणित, हालात नहीं सुधरे तो विनिवेश में और देरी संभव

News18Hindi
Updated: March 11, 2020, 1:37 PM IST

कोरोना वायरस औऱ कच्चे तेल की वजह से भारत समेत ग्लोबल मार्केट में गिरावट के चलते सरकार अब विनिवेश की रफ्तार को थोड़ा कम कर सकती है. हालांकि वो बुनियादी प्रक्रिया जारी रखेगी ताकि माहौल सुधरते ही तुरंत इस पर अमल किया जाए.

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  • Last Updated: March 11, 2020, 1:37 PM IST
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नई दिल्ली. बाजार की गिरावट ने विनिवेश (Disinvestment) का गणित पूरी तरह बिगड़ रहा है. सरकार अब विनिवेश की रफ्तार को थोड़ा कम कर सकती है. हालांकि वो बुनियादी प्रक्रिया जारी रखेगी ताकि माहौल सुधरते ही तुरंत इस पर अमल किया जाए. बता दें कि सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), कोल इंडिया (Coal India), सेल (SAIL) में विनिवेश को मंजूरी दे दी है. इन कंपनियों के विनिवेश की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है.

कोरोना वायरस के चलते भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में जोरदार बिकवाली का दौर देखने को मिल रहा है. मार्केट में उठापटक को देखते हुए विनिवेश विभाग भी सतर्क हो गया है. पिछले दिनों सरकार ने ढेर सारी कंपनियों के एसेट वैल्यूअर, लीगल एडवाइजर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. सरकार बहुत तेजी से विनिवेश की प्रक्रिया के रास्ते पर आगे बढ़ रही थी. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, मार्केट के हालात को देखते हुए सरकार यहां पर थोड़ा सतर्क रहेगी. अब सरकार बाजार के मूड सुधरने का इंतजार करेगी.

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BPCL के लिए बोलियां मंगाई



भारत की दूसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में अपनी पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोलियां आमंत्रित कीं. इसकी बोली लगाने के लिए 8 हफ्ते का वक्त दिया गया है. तब तक अगर मार्केट नहीं सुधरा तो हो सकता है कि इसमें एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) में और थोड़ा समय बढ़ाया जा सकता है. इससे खरीदारों को देश की 14 प्रतिशत तेल रिफाइनिंग क्षमता तथा 20 प्रतिशत ईंधन बाजार हिस्सेदारी तक पहुंच होगी. बीपीसीएल का बाजार पूंजीकरण 1.03 लाख करोड़ रुपये है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के बजट में विनिवेश आय से 2.1 लाख करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य रखा था जिसको पूरा करने के लिए बीपीसीएल का निजीकरण आवश्यक है.

दूसरी कंपनियां शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) और कॉन्कोर (Concor) के लिए भी सरकार लीगल एडवाइजर औऱ एसेट वैल्यूअर नियुक्त कर चुकी है. इसका अभी EOI आना बाकी है. सूत्र बता रहे हैं कि थोड़ से मार्केट के हालात सुधरने देना चाहती है.

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इससे पहले, चालू कारोबार साल में SAIL, Coal India, IRCON, NMDC जैसी कंपनियों का ऑफर फॉर सेल (OFS) आना है. इसमें भी सरकार अभी सुस्त रफ्तार में चल रही है. क्योंकि जैसे ही मार्केट की हालात सुधरेगी, सरकार फिर इन रास्तों पर आगे बढ़ेगी.

(लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर- CNBC आवाज़)

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First published: March 11, 2020, 1:29 PM IST
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